मुक्केबाजों को आवास खाली करने को कहा गया, राष्ट्रीय चैंपियनशिप में लॉजिस्टिक चुनौतियां
मुक्केबाजों को आवास खाली करने को कहा गया, राष्ट्रीय चैंपियनशिप में लॉजिस्टिक चुनौतियां
… अपराजिता उपाध्याय …
ग्रेटर नोएडा, 10 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप के दौरान शुक्रवार को कई राज्य इकाइयों के मुक्केबाजों, कोच और टीम अधिकारियों को उनके आवंटित आवास खाली करने को कहा गया, जिससे आयोजन में नयी लॉजिस्टिक (व्यवस्था संबंधी) समस्याएं खड़ी हो गईं। यह समस्या लगातार दूसरे दिन सामने आई जिसमें कई अधिकारियों ने दावा किया कि उनके कमरों की बुकिंग की पुष्टि नहीं हुई है। टीम के एक अधिकारी ने शुक्रवार को गोपनीयता की शर्त पर पीटीआई से कहा, “जब हम प्रतियोगिता स्थल से लौटे तो हमें कमरे खाली करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि हमारी बुकिंग नहीं हुई थी।” एक अन्य अधिकारी ने आरोप लगाया कि दिन के मुकाबलों के बाद जब वे लौटे, तो उनका सामान पहले ही पैक कर रिसेप्शन में रख दिया गया था। छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मणिपुर और तमिलनाडु जैसी कई टीमें इस समस्या की जानकारी दे रही हैं। दस डिग्री सेल्सियस से भी कम तापमान में रात के समय बाहर खड़े मुक्केबाजों और कोच की तस्वीरें मुक्केबाजी समुदाय में व्यापक रूप से वायरल हुईं। एक कोच ने कहा, “हमें जो कमरे दिए गए थे उनमें ताले नहीं थे। जब हम प्रतियोगिता स्थल से लौटे, तो हमारे बैग पहले ही पैक कर रिसेप्शन में रख दिए गए थे।” अधिकारियों ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय महासंघ द्वारा जारी ‘टूर्नामेंट प्रोस्पेक्टस’ स्पष्ट रूप से कहता है कि ‘ आयोजन के दौरान सभी मुक्केबाजों और अधिकारियों को आयोजकों द्वारा मुफ्त आवास प्रदान किये जायेंगे।’’ उन्होंने शुक्रवार रात को यह आरोप भी लगाया कि आयोजकों से बार-बार संपर्क करने के प्रयास व्यर्थ रहे। भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) ने कहा कि स्थिति की जानकारी मिलने के बाद उसने तुरंत कदम उठाए। बीएफआई ने कहा, “तत्काल कदम उठाए गए हैं ताकि प्रभावित खिलाड़ियों को ‘जीबी यूनिवर्सिटी’ के सबसे नजदीकी स्थान पर आवास प्रदान किया जा सके, जहां रात के लिए उपयुक्त सोने की व्यवस्था की गई है। महासंघ स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है।” आवास संबंधी यह विवाद राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में पिछले सप्ताह से चल रही कई समस्याओं में जुड़ गया है। इस आयोजन में कई विवाद सामने आये जिसमें रेफरी और मुकाबलों के फैसले को लेकर विवाद, बाधित मुकाबले और कार्यक्रम में अराजकता जैसी समस्याओं से खिलाड़ियों को परेशान होना पड़ा। भाषा आनन्द मोनामोना

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