विरोधी खेमों में ‘भाई’ : एल्बी और मोर्ने मोर्कल दिलचस्प रणनीतिक मुकाबले के लिए तैयार

विरोधी खेमों में ‘भाई’ : एल्बी और मोर्ने मोर्कल दिलचस्प रणनीतिक मुकाबले के लिए तैयार

विरोधी खेमों में ‘भाई’ : एल्बी और मोर्ने मोर्कल दिलचस्प रणनीतिक मुकाबले के लिए तैयार
Modified Date: February 20, 2026 / 06:30 pm IST
Published Date: February 20, 2026 6:30 pm IST

(तस्वीरों के साथ) … कुशान सरकार ….

अहमदाबाद, 20 फरवरी (भाषा) क्रिकेट मैदान पर एक ही टीम के लिए खेलने वाले भाइयों की कहानियां आम हैं, लेकिन रविवार को टी20 विश्व कप के सुपर-आठ चरण में एक अनोखा नजारा दृश्य देखने को मिलेगा जब वर्षों तक साथ खेलने वाले दो सगे भाई अलग-अलग ‘डगआउट’ में बैठकर प्रतिद्वंद्वी टीमों के लिए रणनीति बनाते नजर आएंगे और घर पर बैठी उनकी मां इस उलझन में होंगी कि आखिर समर्थन किसे करें। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज एल्बी मोर्कल और मोर्ने मोर्कल की भाइयों की जोड़ी इस समय ऐसी ही स्थिति में हैं। एल्बी इस टूर्नामेंट में दक्षिण अफ्रीका के “विशेष सलाहकार” की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि मोर्ने भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर के नेतृत्व वाले कोचिंग दल में गेंदबाजी कोच की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। एल्बी ने हाल ही में मजाकिया अंदाज में कहा था, “नहीं, हम अभी एक-दूसरे से बात नहीं कर रहे। हमसे ज्यादा हमारी मां परेशान हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि भारत का समर्थन करें या दक्षिण अफ्रीका का।’’ ग्रुप चरण में दोनों टीमों ने अपराजित रहते हुए सुपर-आठ में जगह बनाई है। यह सुपर आठ चरण में दोनों टीमों का यह पहला मैच होगा। मोर्ने ने भी स्वीकार किया कि बड़े भाई से उनकी बातचीत ज्यादा नहीं हुई है। उन्होंने शुक्रवार को कहा, “मैंने उन्हें मैदान पर आते देखा, लेकिन ज्यादा बात नहीं हुई। फिर भी उन्हें देखकर अच्छा लगा।” अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसे कई प्रेरक उदाहरण रहे हैं जब भाइयों ने साथ खेलकर इतिहास रचा। इस सूची में चैपल बंधु (इयान और ग्रेग), वॉ बंधु (स्टीव और मार्क), अमरनाथ बंधु (मोहिंदर, सुरिंदर और राजिंदर) , पठान बंधु (इरफान और यूसुफ), पांड्या बंधु (हार्दिक और कृणाल), मोहम्मद बंधु (हनीफ, सादिक, मुश्ताक, वजीर) और हेडली बंधु (रिचर्ड और डेल) के नाम शामिल हैं। इसमें कुछ अपवाद भी रहे हैं जब भाइयों ने अलग-अलग टीमों का प्रतिनिधित्व किया हो। इसमें सैम कुरेन का इंग्लैंड के लिए खेलना और उनके भाई बेन कुरेन का जिम्बाब्वे का प्रतिनिधित्व करना शामिल है। मोर्कल बंधुओं का मामला थोड़ा अलग है। यहां मुकाबला मैदान पर खिलाड़ियों के बीच नहीं, बल्कि रणनीति और दिमाग की जंग का है। क्रिकेट में सगे भाइयों के बीच इस तरह की ‘दिमागी जंग’ के उदाहरण कम ही देखने को मिले हैं। करियर के लिहाज से मोर्ने का अंतरराष्ट्रीय सफर अधिक लंबा और प्रभावशाली रहा। उन्होंने 86 टेस्ट में 309 विकेट लिए। वहीं एल्बी सीमित ओवरों के विशेषज्ञ रहे और टी20 व वनडे मिलाकर 100 से अधिक मैच खेले। एल्बी के करियर का एक कम चर्चित पहलू यह भी है कि आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के शुरुआती वर्षों में वह कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के भरोसेमंद खिलाड़ी रहे। निचले क्रम की विस्फोटक बल्लेबाजी और आखिरी ओवरों की गेंदबाजी ने उन्हें टीम का अहम हिस्सा बनाया था। टीम के लंबे समय तक मुख्य कोच रहे स्टीफन फ्लेमिंग से उन्होंने कोचिंग के गुर सीखे। फुटबॉल और अन्य खेलों में भाइयों के बीच अलग-अलग टीमों क कोचिंग मुकाबले के कई उदाहरण हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह दृश्य दुर्लभ है। रविवार को जब मुकाबला शुरू होगा, तो लगभग साढ़े तीन घंटे के लिए ‘भाईचारा’ पीछे छूट जाएगा। उस दौरान एल्बी और मोर्ने का एक ही लक्ष्य होगा कि अपनी-अपनी टीम को कैसे जीत दिलाये। भाषा आनन्द मोनामोना


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