(अमित कुमार दास)
नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) भारतीय जिमनास्ट प्रणति नायक ने चोटों से संघर्ष और इनसे उबरने की लंबी प्रक्रिया के बाद प्रतिस्पर्धा में वापसी करना सीख लिया है और अब वह अपने चौथे एशियाई खेलों में पहला पदक जीतने की कोशिशों में जुटी हैं।
चोटों के निराशाजनक दौर ने उनके हौसले को कम नहीं किया है और 31 साल की प्रणति एशियाड के लिए चुनी गई एकमात्र भारतीय जिमनास्ट हैं। वह 19 सितंबर से शुरू होने वाले खेलों के लिए बुधवार रात जापान के आइची-नागोया के लिए रवाना हुईं।
वह इस सत्र में उन्हें परेशान करने वाली ‘प्लांटर फैसीसाइटिस’ (पैर में सूजन) की समस्या की वजह से राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं के वॉल्ट फाइनल में हिस्सा नहीं ले पाई थीं। लेकिन इससे उबरने के बाद वह एशियाड की टीम में जगह बनाने में सफल रहीं।
ओडिशा के ‘जिमनास्टिक्स हाई परफॉर्मेंस सेंटर’ में ट्रेनिंग करने वाली प्रणति ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैं अब शत प्रतिशत फिट हूं। चोट जिमनास्ट की जिंदगी का हिस्सा है। जिमनास्ट को कई चोटें लगती हैं। हमें उनका ध्यान रखना पड़ता है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने (ग्लास्गो में) दौड़ते समय एक गलती की थी, लेकिन चोट उसकी वजह नहीं थी। राष्ट्रमंडल खेलों से लौटने के बाद मैंने ‘परफेक्शन, लैंडिंग और फ्लेक्सिबिलिटी’ पर ध्यान दिया है। मैंने दौड़ते समय गलती की थी। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘अब मैं इसके बारे में कुछ नहीं कर सकती। वह मेरे लिए बहुत मुश्किल दौर था। अब मैं तैयार हूं। ’’
हालांकि ग्लास्गो के बाद तुरंत काम का बोझ बढ़ाने के बजाय, उन्हें उस उपकरण से दूर रखा गया। उनके कोच अशोक मिश्रा ने कहा, ‘‘उनके पैर में हल्की चोट थी। इसलिए राष्ट्रमंडल खेलों के बाद हमने उन्हें पूरे तीन हफ्ते का आराम दिया। वह अपने परिवार से मिलने घर गईं। उसके बाद, मैंने उनसे पूरी तरह से वॉल्टिंग नहीं करवाई। हमने तैयारी के शुरुआती बुनियादी ट्रेनिंग चरणों पर ध्यान दिया। ’’
प्रणति ने कहा, ‘‘यह बहुत मुश्किल है। ठीक होने में लंबा समय लगता है। उस चोट के बाद मुझे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। मैं आने वाली प्रतियोगिता में अपना शत प्रतिशत देने की कोशिश करूंगी। ’’
मिदनापुर की जिम्नास्ट एशियाई चैंपियनशिप में तीन पदक जीतने वाली पहली भारतीय हैं। उन्होंने अपनी वापसी के लिए मानसिक तैयारी पर भी काम किया है जिसमें मनोवैज्ञानिकों से सलाह लेना भी शामिल है ताकि वह दबाव के बजाय अपने रूटीन पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कई मनोवैज्ञानिकों की भी मदद ली। वे कहते हैं कि आपको इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि आप क्या कर रही हैं। अगर आप अच्छा सोचेंगी तो सब अच्छा होगा। आपको अपने दिमाग को प्रशिक्षित करना चाहिए। भले ही मैं ज्यादा ट्रेनिंग नहीं कर पाऊं, लेकिन मैं अपने दिमाग में ड्रिल को दोहराती रहती हूं। ’’
भाषा नमिता
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