(पूनम मेहरा)
नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के लिये छह माही परीक्षा से कम नहीं थे जिसमें खेलों के अलावा प्रशासनिक चुनौतियां भी थी जिन पर खरे उतरने के बावजूद कुछ पहलुओं पर सुधार की जरूरत भी सामने आई ।
खेल मंत्रालय के तहत साइ राष्ट्रीय शिविरों के आयोजन, चयन, खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और प्रतिस्पर्धाओं के कैलेंडर की निगरानी के लिये जवाबदेह है । ग्लास्गो खेलों में 13 स्वर्ण और 17 रजत समेत 39 पदक जीतने से अपेक्षाओं पर खरे उतरने का संतोष है तो तैराकी और साइकिलिंग जैसे खेलों में और काम करने की जरूरत का भी अहसास है ।
इसके अलावा मुक्केबाजों और जूडो खिलाड़ियों को ग्लास्गो में समय पर सामान नहीं मिलने जैसे प्रशासनिक मसले भी सामने आये जिनमें आने वाले समय में सुधार की जरूरत है ।
साइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा ,‘‘ सबसे अच्छी बात जूडो (दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य ) में प्रदर्शन है । तैराकी और साइकिलिंग में प्रदर्शन बेहतर करना होगा । मुक्केबाजी में भी अच्छे पदक (सात स्वर्ण, तीन रजत) मिले हैं । इस बार खेल कम थे तो इसमें हम कुछ नहीं कर सकते थे ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ कुछ प्रशासनिक मसले आये हैं और सुधार की जरूरत है । जैसे खिलाड़ियों को अपना बैगेज नहीं मिला । टीम के साथ एक ऐसा व्यक्ति होना जरूरी है जो इन चीजों से निपट सके ताकि भविष्य में ऐसी दिक्कतें नहीं आये ।’’
अधिकारी ने प्रदर्शन पर संतोष जताते हुए कहा ,‘‘ इससे साबित होता है कि ग्लास्गो जैसे हालात में अभ्यास कराने का फायदा मिला । मसलन लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने अमेरिका के कोलोराडो में पिछले दो साल अभ्यास किया था।’’
गुलवीर एक ही खेलों में ट्रैक स्पर्धा में दो पदक जीतने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बने जिन्होंने 10000 मीटर में रजत और 5000 मीटर में कांस्य जीता ।’
अधिकारी ने कहा ,‘‘ चोटों के प्रबंधन में भी हमने काफी काम किया है । तेजस्विन शंकर के घुटने की समस्या ऊंची कूद के दौरान उभर आई थी जिससे उन्हें पीछे हटना पड़ा लेकिन दो दिन के बाद उसने डेकाथलन में भाग लिया ।’’
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