नेपाल के गंडकी प्रांत ने औषधीय उपयोग के लिए गांजे की खेती और उपयोग को वैध किया

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नेपाल के गंडकी प्रांत ने औषधीय उपयोग के लिए गांजे की खेती और उपयोग को वैध किया

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  • Publish Date - August 5, 2026 / 02:58 PM IST,
    Updated On - August 5, 2026 / 02:58 PM IST

काठमांडू, पांच अगस्त (एपी) नेपाल की एक प्रांतीय सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लागू होने के बावजूद औषधीय उपयोग के लिए गांजे की खेती और उसके इस्तेमाल को वैध कर दिया है।

गंडकी प्रांत प्रमुख के कार्यालय के प्रवक्ता प्रबीन पौड्याल ने बताया कि इस संबंध में पारित विधेयक को प्रांत प्रमुख की मंजूरी मिलने के बाद सोमवार से यह प्रभावी हो गया। उन्होंने कहा कि इसके तहत औषधीय उपयोग के लिए गांजे की खेती और उसके इस्तेमाल की अनुमति दी गई है।

उन्होंने कहा कि गांजे की खेती करने के इच्छुक किसानों को प्रांतीय प्रशासन से आधिकारिक अनुमति लेनी होगी और उनकी गतिविधियों की कड़ी निगरानी की जाएगी।

यह प्रांतीय कानून ऐसे समय लागू किया गया है, जब देशभर में गांजे की खेती, उसे रखने और उपयोग पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लागू है। व्यक्तिगत उपयोग के लिए गांजा रखने पर एक महीने तक की जेल हो सकती है, जबकि इसकी बिक्री और वितरण करने पर बरामद मात्रा के आधार पर 10 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।

नेपाल के सात प्रांतों में से एक गंडकी अपने प्रसिद्ध पर्वतों, ट्रेकिंग मार्गों और पर्यटन नगरी पोखरा के लिए जाना जाता है।

गांजे का पौधा नेपाल में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है और विभिन्न त्योहारों के दौरान इसका व्यापक उपयोग होता है। नेपाल में कई सामाजिक कार्यकर्ता लंबे समय से सरकार से इस संबंध में कानून में बदलाव कर गांजे की खेती की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं।

एक समय ऐसा था, जब गांजा नेपाल की संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा माना जाता था। हालांकि, 1970 के दशक के उत्तरार्ध में नेपाल ने अन्य देशों की तरह गांजे पर प्रतिबंध लगा दिया और इसके बाद, बड़ी संख्या में यहां आने वाले विदेशी पर्यटकों को भी यह देश छोड़ना पड़ा।

नेपाल में वसंत ऋतु के दौरान मनाए जाने वाले महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव के भक्त मंदिरों में खुलेआम गांजे का सेवन करते हैं। इस दौरान प्रशासन आम तौर पर इसके उपयोग की अनुमति देता है।

एपी अमित सुभाष

सुभाष