बांग्लादेश के हिस्से मिलाकर ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ बनाने की मांग लोगों को गुमराह करेगी: माणिक साहा

बांग्लादेश के हिस्से मिलाकर ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ बनाने की मांग लोगों को गुमराह करेगी: माणिक साहा

बांग्लादेश के हिस्से मिलाकर ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ बनाने की मांग लोगों को गुमराह करेगी: माणिक साहा
Modified Date: April 3, 2026 / 07:53 pm IST
Published Date: April 3, 2026 7:53 pm IST

अगरतला, तीन अप्रैल (भाषा) त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बांग्लादेश के कुछ हिस्सों को मिलाकर ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ बनाने के टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) प्रमुख प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा के वादे की शुक्रवार को आलोचना करते हुए कहा कि ऐसी मांग लोगों को गुमराह करेगी।

देबबर्मा ने गोमती जिले के सिलाचरी मोटरस्टैंड इलाके में जनजातीय परिषद चुनाव रैली को बुधवार को संबोधित करते हुए कहा था कि उनका उद्देश्य बांग्लादेश के कॉक्स बाजार, चटगांव एवं खगराचारी को मिलाकर ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ बनाना है और उन्होंने टिपरासा समुदाय से एकजुट होने का आह्वान किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘टीएमपी प्रमुख ने कॉक्स बाजार, चटगांव और खगराचारी पर कब्जा कर ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ बनाने का वादा करके आदिवासी लोगों को गुमराह करने की एक बार फिर कोशिश की है। क्या यह संभव है? यह एक अवैध बयान है जिसके लिए कानूनी कार्रवाई हो सकती है।’’

साहा ने दुकानदारों के बहिष्कार के बीच पश्चिम त्रिपुरा के गबार्डी बाजार में एक आदिवासी परिषद चुनाव रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हमने बांग्लादेश के एक राजनीतिक कार्यकर्ता का भी ऐसा ही एक बयान सुना था जो हमारे पूर्वोत्तर पर नियंत्रण करना चाहता था। यह लोगों को भ्रमित करने की एक सोची-समझी कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है।’’

मुख्यमंत्री ने टीएमपी समर्थकों की कथित धमकियों के बाद गबार्डी बाजार में दुकानदारों के बहिष्कार का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की जबरदस्ती से लोगों का समर्थन हासिल नहीं किया जा सकता।

साहा ने कहा, ‘‘बल प्रयोग करके वोट हासिल नहीं किए जा सकते… आदिवासी परिषद के चुनाव में टीएमपी को वोट देने का विचार कर रहे व्यापारी अब उसका समर्थन करने से पहले दो बार सोचेंगे क्योंकि पार्टी ने उन्हें अपनी दुकानें बंद करने पर मजबूर कर दिया। अब वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) उम्मीदवार के पक्ष में करेंगे।’’

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह आदिवासी लोगों के समग्र विकास के लिए मार्च 2024 में हुए टिपरासा समझौते के कार्यान्वयन के पक्ष में हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई हमारे साथ नहीं रहना चाहता तो हम साथ कैसे रह सकते हैं? टीएमपी प्रमुख ने दावा किया था कि भाजपा गठबंधन चाहती थी। अब हम अलग हो गए हैं और एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।’’

टिपरा मोथा त्रिपुरा में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार का हिस्सा है लेकिन जनजातीय परिषद चुनाव में दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं।

साहा ने कहा, ‘‘चुनाव लड़ने के लिए टीएमपी को धन कहां से मिल रहा है? हमें यह पता है और जब भाजपा आदिवासी परिषद में सरकार बनाएगी तो न्याय जरूर होगा।’’

जनजातीय परिषद की 28 सीट के लिए 12 अप्रैल को मतदान होगा और 17 अप्रैल को मतगणना होगी।

भाषा

सिम्मी अविनाश

अविनाश


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