इंग्लैंड में सैमसन को बाहर करना मेरे कोचिंग कैरियर का सबसे कठिन फैसला था: गंभीर
इंग्लैंड में सैमसन को बाहर करना मेरे कोचिंग कैरियर का सबसे कठिन फैसला था: गंभीर
… भरत शर्मा …
नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने कहा है कि इंग्लैंड के हालिया दौरे पर संजू सैमसन को टीम से बाहर रखना उनके कोचिंग कार्यकाल का “शायद सबसे कठिन फैसला” था। सैमसन ने भारत में आयोजित टी20 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ का पुरस्कार हासिल किया था। लगातार कुछ खराब पारियों के बाद सैमसन को इंग्लैंड के खिलाफ टी20 शृंखला में जगह नहीं मिली और उनकी अनुपस्थिति में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को अंतरराष्ट्रीय पदार्पण का मौका दिया गया। इसके बाद भारतीय टीम ने अपनी पुरानी सलामी जोड़ी अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन पर फिर भरोसा जताया। अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 शृंखला में दोनों ने अर्धशतक से अधिक की दो-दो पारियां खेलीं और भारत ने शृंखला में 3-0 से जीत दर्ज की। शृंखला के बाद मीडिया से बातचीत में गंभीर ने सैमसन की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें ड्रेसिंग रूम में बने रहने के लिए किसी से श्रेय लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सैमसन की प्रतिभा अपने आप में उन्हें टीम में जगह दिलाने के लिए पर्याप्त है। गंभीर ने कहा, “कोई खिलाड़ी विश्व कप में ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ यूं ही नहीं बन जाता। उसमें प्रतिभा जरूर होती है। उसने काफी कुछ हासिल किया है।” सैमसन को इंग्लैंड शृंखला से बाहर किए जाने के फैसले पर गंभीर ने कहा, “निश्चित रूप से यह कठिन था। मेरे कोचिंग कार्यकाल में शायद उन्हें इंग्लैंड सीरीज से बाहर रखना सबसे कठिन फैसला था, खासकर उससे पहले उन्होंने जैसा प्रदर्शन किया था। लेकिन कई बार आपको खिलाड़ियों की मौजूदा फॉर्म को भी ध्यान में रखना पड़ता है।” गंभीर ने स्पष्ट किया कि वैभव सूर्यवंशी को अगला मौका पाने के लिए इंतजार करना होगा। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के खिलाफ शृंखला में टीम पहले ही तय कर चुकी थी कि विश्व कप के दौरान सफल रही संयोजन को वापस लाया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम हमेशा से स्पष्ट थे कि इस शृंखला में हम विश्व कप वाले संयोजन पर वापस जाना चाहते हैं। तीन-चार असफलताओं के बाद खिलाड़ी विफल नहीं हो जाते।” सूर्यवंशी के बारे में गंभीर ने कहा कि उनसे साफ बातचीत हुई है कि उन्हें अपने मौके का इंतजार करना होगा। टीम उनकी प्रतिभा और उनकी क्षमता से पूरी तरह परिचित है। मुख्य कोच ने कहा, ‘‘ टीम चयन में लंबे समय तक लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अधिक महत्व दिया जाएगा। इस मामले में पिछले दो वर्षों में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाला खिलाड़ी उस खिलाड़ी से आगे रहेगा जो अभी-अभी टीम में आया है।’’ गंभीर ने खिलाड़ियों के बार-बार चोटिल होने और उनके प्रबंधन के मुद्दे पर भी अपने विचार साझा किये। टेस्ट और वनडे कप्तान के तौर पर गिल को अपनी कप्तानी के शुरुआती दौर में कभी भी पूरी मज़बूत टीम नहीं मिली। जसप्रीत बुमराह चोट के कारण श्रीलंका का टेस्ट दौरा नहीं कर पाए और हार्दिक पंड्या मई में आईपीएल के बाद से नहीं खेले हैं। गंभीर ने कहा, ‘‘अगर मैं पूरी तरह सच कहूं, तो हां। खासकर टेस्ट और वनडे क्रिकेट में आप चाहते हैं कि आपके सबसे अच्छे खिलाड़ी खेलें क्योंकि अगले साल विश्व कप 50 ओवर के प्रारूप में होगा। उन्होंने कहा, ‘‘ इससे भी ज़रूरी बात यह है कि एक युवा कप्तान (गिल) के लिए यह सही नहीं है कि उसे लगातार और नियमित रूप से अपनी सबसे अच्छी टीम न मिले। एक कोच के तौर पर, मैं सारी आलोचना झेल सकता हूं, लेकिन मुझे लगता है कि शुभमन के लिए यह जरूरी है कि उसे दोनों प्रारूप में अपनी सबसे अच्छी एकादश मिले।’’ भाषा आनन्द मोनामोना

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