श्रीनगर, 30 मई (भाषा) अंतरराष्ट्रीय ‘वॉटर स्पोटर्स’ स्टार और जानी मानी खेल प्रशासक बिल्किस मीर ने जम्मू कश्मीर खेल विभाग के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) में अवमानना का मामला दायर किया है क्योंकि फरवरी में उनका वेतन जारी करने के न्यायाधिकरण के स्पष्ट आदेश के बावजूद विभाग ने ढाई साल से अधिक समय से उनका वेतन रोके रखा है ।
जम्मू कश्मीर युवा कार्य और खेल विभाग के आयुक्त सचिव और महानिदेशक के खिलाफ दायर याचिका में उन्होंने कहा कि सीएटी ने पांच फरवरी के फैसले में उनका वेतन जारी करने के स्पष्ट निर्देश दिये थे ।
पेरिस ओलंपिक 2024 की कयाकिंग और केनोइंग स्पर्धा में भारत की अकेली महिला जज मीर के लिये समस्या नवंबर 2023 में शुरू हुई जब जम्मू कश्मीर की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने जम्मू कश्मीर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत उनके खिलाफ मामला दायर किया । उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने सरकारी काम के लिए अपने कानूनी वेतन से अधिक पैसे लिए और एक आपराधिक साजिश में शामिल थीं।
पिछले साल जुलाई में जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय ने प्राथमिकी रद्द करते हुए जम्मू कश्मीर के अधिकारियों की कड़ी आलोचना की और कहा था कि ऐसा लगता है कि जो लोग सत्ता की बागडोर संभाल रहे हैं, वे ऐसे प्रतिभाशाली लोगों को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
मीर के 28 साल के सुनहरे कैरियर की शुरूआत आठ वर्ष की उम्र में हुई थी । वह हंगरी में केनोइंग और कयाकिंग विश्व कप 2009 में भारत का प्रतिनिधित्व करके आठवें स्थान पर रही थी ।
वह एशियाई खेलों में जज बनने वाली पहली भारतीय महिला थी । वह लंदन ओलंपिक 2012 में भारत की महिला कयाकिंग और केनोइंग टीम की कोच भी थी । वह पेरिस ओलंपिक में भी जज बनी थी जिसके लिये उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा और अदालती आदेश के बाद ही वह फ्लाइट ले सकी ।
वह जापान में इस साल होने वाले एशियाई खेलों में भारतीय कयाकिंग और केनोइंग टीम की मुख्य कोच हैं ।
लेकिन जम्मू कश्मीर सरकार ने उन्हें फारिग नहीं किया, जिसके चलते भारतीय कयाकिंग और केनोइंग संघ ने जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इस याचिका में केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को उन्हें तुरंत फारिग करने का निर्देश देने की मांग की गई थी, क्योंकि टीम को नुकसान हो रहा था।
मीर को नवंबर 2023 के तनख्वाह नहीं मिली है जबकि पांच फरवरी को सीएटी की पीठ ने जम्मू कश्मीर खेल विभाग को तुरंत उनका वेतन जारी करने का निर्देश दिया था ।
अपनी याचिका में मीर ने नौकरशाही गतिरोध के कारण उत्पन्न अत्यधिक वित्तीय और पेशेवर तनाव का जिक्र किया । उन्होंने कहा कि लगातार नियमों का पालन न किए जाने से उन्हें गंभीर नुकसान और वित्तीय कठिनाई का सामना करना पड़ा है, क्योंकि अपनी सेवायें वास्तव में देने के बावजूद उन्हें अपनी आजीविका से वंचित कर दिया गया।
भाषा
मोना नमिता
नमिता