ट्रंप की इच्छा पूरी करने और अमेरिकी फारवर्ड बेलोगुन को खेलने देने के फीफा के फैसले से हंगामा
ट्रंप की इच्छा पूरी करने और अमेरिकी फारवर्ड बेलोगुन को खेलने देने के फीफा के फैसले से हंगामा
जिनेवा, छह जुलाई (एपी) फुटबॉल विश्व कप में उस समय हंगामा मच गया जब बेल्जियम ने अमेरिकी फारवर्ड फोलारिन बेलोगुन पर सोमवार के मैच के लिए प्रतिबंध नहीं लगाने के फीफा के फैसले का विरोध किया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फुटबॉल संस्था के प्रमुख को मनाने का श्रेय लिया।
फुटबॉल की सबसे बड़ी प्रतियोगिता की निष्पक्षता पर हमला हुआ जो साफ तौर पर राजनीतिक दखलंदाजी का मामला लग रहा था। फीफा के नियमों के सख्त पालन से अमेरिका को वैश्विक खेल से निलंबित किया जा सकता था।
ट्रंप ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बात करने का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने बस रैफरी के उस ‘बेहद खराब’ फैसले की ओर इशारा किया था जिसमें पिछले बुधवार को राउंड ऑफ 32 मैच में बोस्निया-हर्जेगोविना के खिलाड़ी पर गलत टैकल के लिए बेलोगुन को लाल कार्ड दिया गया था।
ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने बस समीक्षा करने के लिए कहा था। मुझे नहीं लगा कि यह फाउल था।’’
उन्होंने अपने करीबी सहयोगी इन्फेंटिनो से बेलोगुन पर एक मैच का प्रतिबंध नहीं लगाने के लिए लॉबिंग की थी।
विश्व कप के 96 साल के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा विवाद बनता जा रहा है जबकि कुछ घंटों बाद सिएटल में अमेरिका-बेल्जियम मैच होना है जिसका विजेता क्वार्टर फाइनल में जगह बनाएगा।
बेल्जियम फुटबॉल महासंघ ने एक बयान में कहा कि वह ‘बहुत चिंतित’ है। बयान में फीफा के प्रति स्पष्ट निराशा जाहिर की गई क्योंकि बेलोगुन से जुड़े फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया तय करने में अच्छी नीयत की कमी दिखी।
इससे पहले यूरोपीय फुटबॉल संस्था यूएफा ने फीफा के ‘समझ से बाहर और अनुचित फैसले’ की आलोचना की थी। यूएफा ने कहा कि बेलोगुन पर अनिवार्य एक मैच का प्रतिबंध नहीं लगाकर फीफा ने सीमा पार की है।
इस फैसले की दुनिया भर में कड़ी आलोचना हुई।
नॉर्वे के कोच स्टेल सोलबक्केन ने रविवार को अपनी टीम के ब्राजील को हराकर क्वार्टर क्वार्टर में पहुंचने के बाद कहा, ‘‘यह बहुत, बहुत, बहुत, बहुत, बहुत बुरा फैसला है जो विश्व कप को नुकसान पहुंचाएगा।’’
यूएफा ने कहा, ‘‘जब नियमों को लागू करने वाले ही उनकी निश्चितता की गारंटी नहीं देते तो खेल की ईमानदारी खतरे में पड़ जाती है और प्रतियोगिता की विश्वसनीयता कम हो जाती है।’’
एपी सुधीर
सुधीर

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