नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) अपने पिछले तीन एशियाई खेलों में पदक जीत चुकी अनुभवी कंपाउंड तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम चौथी बार महाद्वीपीय खेलों में उतरते हुए नतीजे के बारे में ज्यादा सोचने के बजाय अपने प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहती हैं।
तीस वर्षीय ज्योति के लिए ये एशियाई खेल कुछ मायनों में जाना-पहचाना अनुभव होंगे तो कुछ मायनों में नई चुनौती। भारतीय महिला टीम में अब नए सदस्य हैं और टीम अभी आपसी तालमेल और लय हासिल करने की प्रक्रिया में है।
ज्योति ने कहा, ‘‘अभी मेरा पूरा ध्यान खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर है, बजाय इसके कि मैं किसी और चीज के बारे में सोचूं।’’
उन्होंने कहा कि वह मुख्य रूप से उपकरणों और खुद से जुड़ी हर छोटी-बड़ी चीज को दुरुस्त रखने पर ध्यान दे रही हैं।
इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (आईआईएस) द्वारा समर्थित ज्योति ने कहा, ‘‘हम बहुत मेहनत कर रहे हैं। तैयारी कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे उपकरण हों या हम खुद, हर चीज अच्छी तरह तैयार हो। हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ तीरंदाजी ही नहीं, किसी भी खेल को जब हम किसी को खेलते हुए देखते हैं तो लगता है कि यह बहुत आसान है और हम भी इसे कर सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। हर खेल की अपनी चीजें, तकनीक और दूसरी बारीकियां होती हैं। जब आप प्रशिक्षण शुरू करते हैं या खेलना शुरू करते हैं, तब आपको पता चलता है कि यह कितना मुश्किल है।’’
महिला टीम को विश्व कप के तीसरे और चौथे चरण में साथ खेलने के दो मौके मिल चुके हैं। इन प्रतियोगिताओं से खिलाड़ियों को एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाने और टीम के रूप में आत्मविश्वास हासिल करने में मदद मिली है।
भाषा सुधीर आनन्द
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