नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) सरकार ने कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के कर्मचारियों के वेतनमान, भत्तों और पदोन्नति नियमों में व्यापक बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
सोमवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, कृषि संबंधी तकनीक, प्रशिक्षण और वैज्ञानिक जानकारी किसानों तक पहुंचाने वाले केवीके कर्मचारियों के राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में अंशदान और सेवानिवृत्ति लाभ का वित्तपोषण राज्य सरकारों की जिम्मेदारी होगी।
कृषि मंत्रालय के प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय की मंजूरी कृषि विज्ञान केंद्रों को मजबूत करने की व्यापक पहल का हिस्सा है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को केवीके की कार्ययोजनाओं को लेकर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
उन्होंने कहा कि केवीके के पुनर्गठन की सफलता केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, समय पर राशि जारी होने, आधुनिक बुनियादी ढांचे, पर्याप्त कर्मचारियों और जिला स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।
चौहान ने कहा कि केवीके को पर्याप्त बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन और संस्थागत सहयोग से लैस किया जाना चाहिए, ताकि ये केंद्र किसानों की प्रभावी ढंग से सेवा कर सकें और कृषि क्षेत्र की उभरती चुनौतियों के अनुरूप काम कर सकें।
बैठक में कर्मचारियों से जुड़े सुधारों पर विस्तार से चर्चा की गई। व्यय विभाग ने केवीके कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पदोन्नति में बदलाव को मंजूरी दे दी है।
राज्यों से खाली पदों को जल्द भरने को भी कहा गया, ताकि केवीके अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए आवश्यक कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकें।
बैठक में 300 प्राथमिकता वाले केवीके के बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक को उन्नत करने पर विशेष जोर दिया गया। यह काम मार्च, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
चौहान ने राज्यों से सक्रिय भागीदारी करने और समय पर सहयोग देने को कहा। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव ने इस योजना के लिए वित्तीय और संस्थागत सहयोग जुटाने को लेकर विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से संपर्क किया है।
कई राज्यों ने राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से प्रक्रिया शुरू कर दी है। महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और छत्तीसगढ़ ने अपने विश्वविद्यालयों और केवीके के माध्यम से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) जमा कर दी हैं, जबकि अन्य राज्य अभी तैयारी के शुरुआती चरण में हैं।
समीक्षा में दिसंबर, 2028 तक सभी केवीके में कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के साथ कौशल केंद्र स्थापित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। प्रत्येक केंद्र को स्थानीय कृषि आधारित उद्यमों, तकनीकी संस्थानों और जिले की विशिष्ट संभावनाओं से जोड़ा जाएगा।
बैठक में अधिकारियों ने खासकर मौसमी कृषि कार्यक्रमों के लिए केवीके को समय पर पैसा जारी करने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि कृषि गतिविधियों के उपयुक्त समय के दौरान कोई कार्यक्रम प्रभावित न हो।
बैठक में कुछ राज्यों में धनराशि जारी होने में देरी का मुद्दा भी उठाया गया। राज्यों से कहा गया कि वे एटीएआरआई और केवीके स्तर तक धन का सुचारू प्रवाह, किसानों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज की पहुंच और प्रदर्शन कार्यक्रमों की योजना एवं क्रियान्वयन में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करें।
यह समीक्षा 2025 के पांचवें मुख्य सचिव सम्मेलन की सिफारिशों के बाद की गई। बैठक में केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) के महानिदेशक एम एल जाट और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
अधिकारियों ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से क्रियान्वयन में तेजी लाने और केंद्र के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने को कहा, ताकि केवीके तकनीक के प्रसार, कौशल विकास, नवोन्मेष और ग्रामीण उद्यमिता के प्रभावी केंद्र के रूप में काम कर सकें।
भाषा रमण अजय
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