दो साल तक सिर्फ कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के बारे में सोचता रहा, हार से निराशा स्वाभाविक : प्रज्ञानानंदा
दो साल तक सिर्फ कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के बारे में सोचता रहा, हार से निराशा स्वाभाविक : प्रज्ञानानंदा
(अजय मसंद)
ओस्लो, चार जून (भाषा) भारत के स्टार शतरंज खिलाड़ी आर प्रज्ञानानंदा ने बृहस्पतिवार को स्वीकार किया कि कैंडिडेट्स टूर्नामेंट नहीं जीत पाने के मलाल से वह उबर नहीं सके क्योंकि उन्होंने इसके लिये काफी मेहनत की थी ।
बीस वर्ष के ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानानंदा इस साल साइप्रस में कैंडिडेट्स टूर्नामेंट खेलने वाले आठ खिलाड़ियों में थे लेकिन खिताब उजबेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव ने जीता जो विश्व चैम्पियनशिप खिताब के लिये डी गुकेश के चैलेंजर होंगे । प्रज्ञानानंदा सातवें स्थान पर रहे थे ।
अब उनके पास उस हार को भुलाकर नॉर्वे शतरंज जीतने का मौका है जिसमें वह वेसले सो से दो अंक पीछे तीसरे स्थान पर हैं और अभी दो राउंड बाकी हैं ।
चेन्नई के इस खिलाड़ी ने कहा ,‘‘ मैं पिछले दो साल से सिर्फ कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के बारे में सोच रहा था तो उसे नहीं जीत पाने के गम से उबरना आसान नहीं था । लेकिन अब मैं सिर्फ अपने शतरंज का मजा लेना चाहता हूं । पिछले साल मैं एक ही टूर्नामेंट के बारे में सोच रहा था लेकिन अब ऐसा नहीं है । मैं बस खेल का मजा लेना चाहता हूं ।’’
उन्होंने कहा कि उनकी बहन आर वैशाली के महिला कैंडिडेट्स जीतने और गत चैम्पियन जु वेंजुन के खिलाफ विश्व चैम्पियनशिप मैच के लिये क्वालीफाई करने से उन्हें राहत मिली ।
उन्होंने कहा ,‘‘ मैं निराशाओं से जल्दी उबर जाता हूं । मेरी बहन के जीतने से मुझे अपना दुख भुलाने में मदद मिली ।’’
भाषा मोना सुधीर
सुधीर

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