जूडोका हर्ष एशियाई खेलों से पहले जापान, जॉर्जिया में अभ्यास करना चाहते हैं

जूडोका हर्ष एशियाई खेलों से पहले जापान, जॉर्जिया में अभ्यास करना चाहते हैं

जूडोका हर्ष एशियाई खेलों से पहले जापान, जॉर्जिया में अभ्यास करना चाहते हैं
Modified Date: August 5, 2026 / 11:36 am IST
Published Date: August 5, 2026 11:36 am IST

… सुमन रे …

नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन कर इतिहास रचने वाले पुरुष जुडोका हर्ष सिंह ने अब अपनी अगली चुनौती एशियाई खेलों की तैयारी शुरू कर दी है। मौजूदा चैंपियन हर्ष अगले महीने होने वाले आइची-नागोया एशियाई खेलों से पहले मेजबान जापान या जॉर्जिया में प्रशिक्षण लेने की योजना बना रहे हैं। हर्ष ने जुडो खिलाड़ियों के सम्मान समारोह के दौरान ‘पीटीआई’ से कहा, ‘मैं जापान या जॉर्जिया जाना चाहता हूं। ये दोनों देश भारतीय जुडो खिलाड़ियों के लिए आदर्श हैं। जापान के साथ जॉर्जिया भी जुडो की दुनिया के सबसे मजबूत देशों में शामिल है। वहां प्रशिक्षण लेना हमारी भविष्य की तैयारियों के लिए बहुत फायदेमंद होगा। हम अगर ओलंपिक में सफलता हासिल कर चुके प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में अभ्यास करते हैं तो अपने लक्ष्य को हासिल करने में सक्षम होंगे।’’ हर्ष ने कहा कि तकनीकी पहलुओं में भारतीय जुडो खिलाड़ी अभी भी दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों से पीछे हैं। उन्होंने इस अंतर को कम करने के लिए विदेश में प्रशिक्षण, खासकर जापानी प्रशिक्षकों के साथ अभ्यास को जरूरी बताया। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अभी किसी से संपर्क नहीं किया है, लेकिन जापान के प्रशिक्षक अनुभव और तकनीक के मामले में काफी मजबूत हैं। हम भारतीय खिलाड़ी भी मजबूत हैं, लेकिन तकनीक में थोड़ा पीछे हैं। फुटवर्क और पकड़ बनाने की कला में सुधार करने से हमारा प्रदर्शन और बेहतर हो सकता है।’’ ग्लास्गो में स्वर्ण पदक जीतने वाले हर्ष ने माना कि राष्ट्रमंडल खेलों में प्रतिस्पर्धा का स्तर एशियाई खेलों और ओलंपिक की तुलना में काफी आसान था। उन्होंने कहा, ‘अगर राष्ट्रमंडल खेलों की तुलना एशियाई खेलों या ओलंपिक से करें तो जुडो में पदक जीतना यहां थोड़ा आसान होता है।’ यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें भरोसा था कि वह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचेंगे, हर्ष ने कहा कि उनका लक्ष्य हमेशा से केवल स्वर्ण पदक जीतना था। उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने पहले रजत और कांस्य पदक जीते थे, इसलिए मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक था। मैं उसी की तैयारी कर रहा था। अगर हम अच्छी तैयारी करें और सकारात्मक सोच के साथ उतरें तो स्वर्ण जीत सकते हैं।’’ भाषा आनन्द आनन्द


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