टी20 विश्व कप से पहले भारत के लिए सलामी बल्लेबाजों और गेंदबाजों की फॉर्म चिंता का विषय
टी20 विश्व कप से पहले भारत के लिए सलामी बल्लेबाजों और गेंदबाजों की फॉर्म चिंता का विषय
नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) आठ महीने के अंदर दूसरा आईसीसी खिताब जीतने की कवायद में लगी भारतीय महिला क्रिकेट टीम को 12 जून से इंग्लैंड में शुरू होने वाले टी20 विश्व कप में परचम लहराने के लिए व्यक्तिगत प्रतिभा पर निर्भर रहना पड़ सकता है, क्योंकि उसके सभी विभागों में कुछ न कुछ कमियां हैं।
भारतीय महिला टीम ने पिछले साल नवंबर में वनडे विश्व कप जीतकर इतिहास रचा था लेकिन तब भी उसकी टीम को बीच में संघर्ष करना पड़ा था। ऐसे में जेमिमा रोड्रिग्स ने जिम्मेदारी संभाली और भारत को चैंपियन बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कुछ समय पहले तक ऐसा लग रहा था कि भारत ने सबसे छोटे प्रारूप में लगभग सभी विभाग में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, लेकिन टी20 विश्व कप से पहले दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड से लगातार दो श्रृंखला हारने से उसकी कमजोरियां उजागर हो गई हैं।
सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना का प्रदर्शन हाल ही में अच्छा नहीं रहा है। यही नहीं निचले क्रम के बल्लेबाज भी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। टीम की प्रमुख पावर हिटर ऋचा घोष 14 जून को पाकिस्तान के खिलाफ विश्व कप के पहले मैच से पहले रन बनाने के लिए जूझ रही हैं।
अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा का प्रदर्शन भी बल्ले और गेंद दोनों से ही निराशाजनक रहा है।
भारत की पूर्व कप्तान शांता रंगास्वामी के अनुसार भारत की मुख्य समस्या बल्लेबाजी और फील्डिंग से नहीं बल्कि गेंदबाजी विभाग से जुड़ी है।
उनकी चिंताएं जायज हैं क्योंकि इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ 181 रन के मुश्किल लक्ष्य को आसानी से हासिल कर तीन मैचों की श्रृंखला जीती।
चोटिल ऑलराउंडर काश्वी गौतम और अमनजोत कौर की अनुपस्थिति ने टीम का संतुलन गड़बड़ा गया है। भारतीय टीम स्पिन गेंदबाजों पर अधिक निर्भर रही है और तेज गेंदबाजी विभाग में उसके पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं।
तेज गेंदबाजी विभाग में नंदिनी शर्मा का अच्छा प्रदर्शन भारत के लिए सकारात्मक पहलू रहा है। इसके अलावा बाएं हाथ की स्पिनर श्री चरणी ने भी अपना प्रभाव छोड़ा है।
ऑफ स्पिनर श्रेयांका पाटिल ने वापसी के बाद से ठीक-ठाक प्रदर्शन किया है, लेकिन कुल मिलाकर गेंदबाजी बहुत ज्यादा आत्मविश्वास नहीं दिलाती है।
रंगास्वामी ने पीटीआई से कहा, ‘‘हाल में टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है, लेकिन उनका रवैया सकारात्मक बना हुआ है। मुझे पूरा भरोसा है कि वे विजेता बनने में सफल रहेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, हमारी गेंदबाजी हमारी बल्लेबाजी और फील्डिंग जितनी अच्छी नहीं है। शुरू से ही हमारा गेंदबाजी आक्रमण अच्छा रहा था लेकिन अब ऐसा नहीं है।’’
भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर अब 37 वर्ष की हो गई हैं और यह उनका अंतिम विश्व कप हो सकता है। भारत को अगर लगातार 180 इससे अधिक का स्कोर बनाना है तो मध्य क्रम में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
रंगास्वामी ने कहा, ‘‘मैं बल्लेबाज के तौर पर हरमनप्रीत की प्रशंसक हूं। वह पहले की तरह ही फिट हैं। लेकिन मुझे शुरू से ही लगता था कि उन्हें कप्तानी के बजाय अपनी बल्लेबाजी पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। अगर वह लय हासिल कर लेती हैं तो अन्य खिलाड़ियों के लिए काम आसान हो जाएगा।’’
भारत को अगर चैंपियन बनना है तो सलामी बल्लेबाज मंधाना और शेफाली को अच्छी शुरुआत देनी होगी। यास्तिका भाटिया ने वापसी के बाद से नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते हुए रन बनाए हैं, लेकिन उन्हें अपना स्ट्राइक रेट सुधारना होगा।
भाषा
पंत मोना
मोना

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