खेतों से राष्ट्रमंडल खेलों के पोडियम तक, प्रवीण चित्रावेल का रजत पदक बना गांव के लिए प्रेरणा
खेतों से राष्ट्रमंडल खेलों के पोडियम तक, प्रवीण चित्रावेल का रजत पदक बना गांव के लिए प्रेरणा
तिरुवरुर (तमिलनाडु), दो अगस्त (भाषा) सेट्टीसथिरम गांव में दिहाड़ी पर खेतों में काम करने वाले एक मजदूर के साधारण घर में उस समय खुशी की लहर दौड़ गई, जब भारतीय एथलीट प्रवीण चित्रावेल ने 2026 ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों की पुरुष त्रिकूद स्पर्धा में रजत पदक जीत लिया।
प्रवीण के पिता चित्रावेल ने अपने बेटे की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर फक्र महसूस करते हुए परिवार के संघर्षपूर्ण सफर को याद किया। उन्होंने पीटीआई वीडियो से कहा, ‘‘मैं खेतों में एक दिहाड़ी मजदूर हूं। मैंने दिहाड़ी मजदूरी से होने वाली कमाई से अपने बच्चों को पढ़ाया-लिखाया और उनके सपनों को पूरा करने में हरसंभव सहयोग दिया। ’’
प्रवीण की शुरुआती खेल यात्रा को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मैं जहां भी जाता था, उसे अपनी साइकिल पर साथ लेकर जाता था। मैंने उसे धीरे-धीरे दुनिया दिखाई और वह कदम-दर-कदम आगे बढ़ता गया, अंततः अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया। ’’
प्रवीण ने शनिवार को कड़ाके की ठंड के बीच 16.58 मीटर की सर्वश्रेष्ठ कूद लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। वह बेहद मामूली अंतर से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए।
इस करीबी मुकाबले का जिक्र करते हुए उनके पिता ने कहा कि परिवार को स्वर्ण पदक की उम्मीद थी, लेकिन बेटे की उपलब्धि पर उन्हें बेहद गर्व है।
उन्होंने कहा, ‘‘वह बहुत मामूली अंतर से स्वर्ण से चूक गया, लेकिन कोई बात नहीं। अगली बार मेरा बेटा निश्चित रूप से स्वर्ण पदक जीतेगा और भारत के साथ तमिलनाडु राज्य का नाम रोशन करेगा। ’’
चित्रावेल की बेटी एक शिक्षिका है और दोनों बेटे एथलीट हैं। उन्होंने प्रवीण की सफलता का श्रेय पूरे गांव को दिया। उन्होंने कहा, ‘‘इस गांव के युवाओं ने उसे अपने बच्चे की तरह प्रोत्साहित किया। शिक्षकों, रिश्तेदारों और पूरे गांव ने मुझे उन तरीकों से मार्गदर्शन दिया, जिनके बारे में मुझे जानकारी भी नहीं थी। उनकी मदद से मेरा बेटा लगातार आगे बढ़ता गया।’’
उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘मैं राज्य और केंद्र सरकार का बेहद आभारी हूं। उन्होंने हमें हर जरूरी सहायता और सहयोग उपलब्ध कराया। ’’
पूरे गांव और परिवार ने टीवी पर प्रवीण की इस उपलब्धि का सीधा प्रसारण देखकर जश्न मनाया।
इससे पहले प्रवीण एशियाई खेलों में कांस्य पदक भी जीत चुके हैं। भविष्य को लेकर उनके पिता ने उम्मीद जताई कि बेटे की सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं प्रार्थना करता हूं कि अगली बार मेरा बेटा स्वर्ण पदक जीते। इससे भी अधिक मेरी इच्छा है कि उसकी सफलता इस गांव का गौरव बढ़ाए और यहां के कम से कम दस और युवा खेलों को अपनाकर देश का नाम रोशन करें। ’’
भाषा नमिता सुधीर
सुधीर

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