(अमित कुमार दास)
नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) जापान में 32 साल बाद हो रहे एशियाई खेलों की शुरूआत से पहले ही विवादों का सिलसिला शुरू हो गया लेकिन इन खेलों का विवादों से पुराना नाता रहा है और कई बार ये विवाद खेल के दायरे से बाहर तक के रहे हैं ।
जापान के आइची नागोया में 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक होने वाले 20वें एशियाई खेलों में एशिया के 11000 के करीब खिलाड़ी भाग ले रहे हैं ।
एशियाई खेलों को राजनयिक विवादों, चयन से जुड़े मसलों, विवादित फैसलों और खेल के नियमों पर उठते सवालों से समय समय पर जूझना पड़ा है । पीटीआई भाषा ने ऐसे ही कुछ विवादों की सूची तैयार की है ।
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जकार्ता में 1962 में हुए एशियाई खेलों पर राजनीति हावी रही जब इंडोनेशिया ने इस्राइल और ताईवान के खिलाड़ियों को वीजा देने से इनकार कर दिया था । अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों और प्रतिनिधिमंडलों ने इसका काफी विरोध किया ।
एशियाई खेल महासंघ के उपाध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सदस्य भारतीय खेल प्रशासक गुरू दत्त सोंढी ने इंडोनेशिया के विरोध में मुखर रहे । इंडोनेशिया के प्रदर्शनकारियों ने सोंढी को निशाना बनाया और एक भीड़ ने जकार्ता में भारतीय दूतावास के कुछ हिस्से को क्षतिग्रस्त कर दिया । खेल समाप्त होने से पहले सोंढी इंडोनेशिया से रवाना हो गए ।
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चार दशक बाद एक प्रशासनिक त्रुटि से भारतीय पहलवान सतीश कुमार 2002 बुसान एशियाई खेलों में भाग नहीं ले सके । इसी नाम के एक अन्य पहलवान से जुड़े डोपिंग के मामले को गलत तरीके से उनसे जोड़े जाने के कारण वह भारतीय दल के साथ नहीं जा सके ।
दिल्ली की एक अदालत ने सितंबर 2017 में फैसला सुनाया कि यह गलत पहचान का मामला था और सतीश को मुआवजे के तौर पर 25 लाख रूपये दिये गए ।
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दोहा एशियाई खेल 2006 में भारत की शांति सुंदरराजन से महिलाओं की 800 मीटर दौड़ का रजत पदक छीन लिया गया क्योंकि वह लिंग निर्धारण जांच में विफल रही थी । बाद में उसने एथलेटिक्स की बाकी स्पर्धाओं से नाम वापिस ले लिया ।
इसके बाद से इस तरह की जांच को लेकर लंबी बहस छिड़ गई ।
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इंचियोन में 2014 खेलों में मुक्केबाज एल सरिता देवी महिलाओं के लाइटवेट सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया की पार्क जिन से विवादित तरीके से हार गई । इसके बाद उन्होंने पोडियम पर कांस्य पदक लेने से इनकार कर दिया और विरोध स्वरूप पार्क के गले में पदक डाल दिया ।
इससे उन्हें अस्थायी निलंबन और बाद में अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ से एक साल का प्रतिबंध झेलना पड़ा । उनके कोच बी आई फर्नांडिज पर दो साल का प्रतिबंध लगा ।
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हांगझोउ खेल 2023 में खेल शुरू होने से पहले ही विवाद शुरू हो गए । अरूणाचल प्रदेश के तीन भारतीय वुशू खिलाड़ियों को चीन ने सामान्य वीजा की बजाय ‘स्टेपल किये गए वीजा’ जारी किये । भारत ने इसका विरोध किया और ये खिलाड़ी हांगझोउ नहीं गए जिससे दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव और बढ गया ।
कुश्ती में चयन प्रक्रिया पर विवाद हुआ जब विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया को भारतीय ओलंपिक संघ की तदर्थ समिति ने चयन ट्रायल में छूट देकर सीधे प्रवेश दिया । अंडर 20 विश्व चैम्पियन अंतिम पंघाल और अंडर 23 एशियाई पदक विजेता सुजीत कलकल ने इसे दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी लेकिन अदालत ने दखल देने से इनकार कर दिया ।
ज्योति याराजी की महिलाओं की 100 मीटर बाधादौड़ फाइनल में भी विवाद हुआ । चीन की वू यान्नी के साथ गलत शुरूआत के कारण पहले याराजी को अयोग्य करार दिया गया । बाद में दोनों को खेलने की अनुमति मिली जिसमें याराजी तीसरे स्थान पर रही । भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने इस फैसले को चुनौती दी जिसके बाद वू को तकनीकी नियम के कारण अयोग्य करार दिया गया और याराजी का कांस्य रजत में बदला ।
भारत और ईरान के बीच पुरूष कबड्डी फाइनल में भी अधिकारियों के फैसले में बार बार बदलाव का दोनों टीमों ने विरोध किया । लंबे स्टॉपेज टाइम के कारण खिलाड़ी मैट पर बैठे रहे । अधिकारियों ने भारत के पक्ष में फैसला दिया और भारत ने 33 . 29 से जीत दर्ज की ।
भाषा मोना आनन्द
आनन्द