जर्सी विवाद समेत आठ आरोपों पर हॉकी इंडिया ने महानिदेशक को कारण बताओ नोटिस भेजा, अधिकार छीने

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जर्सी विवाद समेत आठ आरोपों पर हॉकी इंडिया ने महानिदेशक को कारण बताओ नोटिस भेजा, अधिकार छीने

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  • Publish Date - September 12, 2026 / 10:30 PM IST,
    Updated On - September 12, 2026 / 10:30 PM IST

… मोना पार्थसारथी …

नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) हॉकी इंडिया ने शनिवार को अपने महानिदेशक (डीजी) कमांडर आर के श्रीवास्तव को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उनके सभी अधिकार तत्काल प्रभाव से छीन लिए। भारतीय हॉकी टीम की जर्सी के रंग में बदलाव का विवाद इस नोटिस में लगाए गए प्रमुख आरोपों में शामिल है। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की की ओर से उनके वकील के माध्यम से भेजे गए नोटिस में श्रीवास्तव पर कुल आठ आरोप लगाए गए हैं। उन्हें नोटिस मिलने के चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब देने का निर्देश दिया गया है। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं देने पर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी गई है। नोटिस में स्पष्ट शब्दों में कहा गया, “तत्काल प्रभाव से हॉकी इंडिया के महानिदेशक के रूप में आपके सभी अधिकार समाप्त किए जाते हैं और हॉकी इंडिया के उपनियमों के अनुसार आगे के निर्णय तक आप किसी भी अधिकार का प्रयोग नहीं करेंगे और न ही हॉकी इंडिया की ओर से कोई कार्य करेंगे।” अध्यक्ष कार्यालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया कि इसका उद्देश्य हॉकी इंडिया में अनुशासन, जवाबदेही, पारदर्शिता, रिकॉर्ड के संरक्षण और संस्था के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करना है। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह कार्रवाई अंतिम आरोप निर्धारण या अंतिम अनुशासनात्मक दंड नहीं है। नोटिस के मुताबिक, ‘‘यह निर्देश हॉकी इंडिया के अध्यक्ष की ओर से अनुशासन, जवाबदेही, पारदर्शिता, रिकॉर्ड के संरक्षण और हॉकी इंडिया के सुचारु संचालन को बनाए रखने के लिए जारी किया गया है। यह आपके जवाब देने के अधिकार को प्रभावित किए बिना प्रभावी रहेगा और हॉकी इंडिया के उपनियमों के अनुसार पुनर्विचार, संशोधन या प्रतिस्थापन तक लागू रहेगा।” श्रीवास्तव के खिलाफ लगाए गए प्रमुख आरोपों में भारतीय राष्ट्रीय टीम की जर्सी का रंग बदलने का मामला शामिल है। नोटिस के अनुसार पारंपरिक नीली जर्सी की जगह नारंगी जर्सी लागू करने और उसे सार्वजनिक रूप से पेश करने से पहले हॉकी इंडिया के अध्यक्ष या कार्यकारी समिति से उचित परामर्श नहीं किया गया। नोटिस में कहा गया, “भारतीय राष्ट्रीय टीमों की खेल जर्सी में बदलाव अध्यक्ष या कार्यकारी समिति से पूर्व परामर्श के बिना लागू किया गया और सार्वजनिक रूप से पेश किया गया। जब विशेष रूप से इस निर्णय के अधिकार, मंजूरी, प्रत्यायोजन और खिलाड़ियों/कोचों से परामर्श का आधार बताने को कहा गया, तब बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्यकारी समिति का कोई प्रस्ताव, अध्यक्ष की मंजूरी या पूरा दस्तावेजी आधार प्रस्तुत नहीं किया गया।” भारतीय टीम की पारंपरिक नीली जर्सी को दृश्यता संबंधी कारणों का हवाला देते हुए नारंगी रंग में बदला गया था। इस फैसले के बाद हॉकी जगत में विवाद खड़ा हो गया था। नोटिस में श्रीवास्तव के विश्व कप के लिए नीदरलैंड और बेल्जियम जाने को भी गंभीर आरोप के रूप में शामिल किया गया है। उन्हें पहले भारत में रहकर हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) और अन्य प्राथमिक मामलों पर ध्यान देने का निर्देश दिया गया था। नोटिस में कहा गया, “जैसा कि पहले ही निर्देश दिया गया था, कमांडर आर के श्रीवास्तव विश्व कप की यात्रा नहीं करेंगे, क्योंकि उनका पूरा ध्यान हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) से जुड़े मामलों और तत्काल समाधान की आवश्यकता वाले अन्य प्राथमिक मुद्दों पर होना आवश्यक है।” नोटिस के मुताबिक, 30 जुलाई को भेजे गए एक ई-मेल में भी आगामी एचआईएल सत्र, फ्रेंचाइजी समन्वय, योजना और उससे जुड़े कार्यों के कारण श्रीवास्तव को भारत में रहने की सलाह दी गई थी। श्रीवास्तव ने अध्यक्ष के निर्देश के बावजूद यात्रा की। नोटिस में इसे “हॉकी इंडिया के अध्यक्ष के पद का सीधा अपमान और आदेश की अवज्ञा” बताया गया है। विश्व कप प्रतिनिधिमंडल से जुड़े मामले में नोटिस में कहा गया, “जब इन संस्थागत उद्देश्यों के लिए विशेष रूप से चिन्हित व्यक्तियों को नहीं भेजा गया, तब आपने स्वयं को उन व्यक्तियों से ऊपर रखते हुए खुद विश्व कप में जाने का निर्णय लिया।” नोटिस में कहा गया कि ये सभी आठ मामले “प्रथम दृष्टया कार्यकारी जवाबदेही को लेकर गंभीर और बार-बार उठने वाले सवाल” खड़े करते हैं। श्रीवास्तव के खिलाफ अन्य आरोपों में जर्सी विवाद के दौरान पीआर एजेंसी और मीडिया से संबंधित प्रतिबंध, दक्षिण अफ्रीका दौरे में खिलाड़ियों के कथित दुर्व्यवहार का मामला, मुख्य कोच क्रेग फुल्टन से जुड़ा स्पष्टीकरण, विक्रम पाल के आईसीसी/पीओएसएच रिकॉर्ड, सुमित मोहाइट से संबंधित विकास अंपायर मामला तथा एफआईएच, एएचएफ और राष्ट्रीय महासंघों के साथ बाहरी संवाद शामिल हैं। भाषा मोना आनन्द नमितानमिता