नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर काबिज और पिछले साल विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता डेनमार्क के एंडर्स एंटोनसन का मानना है कि इंडिया ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट को जनवरी-फरवरी की बजाय साल के इस समय आयोजित किया जाना चाहिए क्योंकि सर्दियों में राष्ट्रीय राजधानी की जलवायु खेलों के लिए अनुकूल नहीं होती और धुएं की मौजूदगी वाले कोहरे के कारण खिलाड़ियों को परेशानी होती है।
इस साल की शुरुआत में इंडिया ओपन सुपर 750 में हिस्सा नहीं लेने वाले एंटोनसन ने दिल्ली में प्रदूषण वाले सर्दियों के महीनों में टूर्नामेंट आयोजित करने के फैसले पर सवाल उठाया था। 29 वर्षीय एंटोनसेन अब इंडिया ओपन को साल के इस समय आयोजित करने के पक्ष में हैं।
सोमवार को यहां बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप के पहले दौर में अजरबैजान के डिकी द्वी पंगेस्टु को 21-19, 21-17 से हराने के बाद एंटोनसन ने कहा, ‘‘जैसा कि मैंने साक्षात्कारों में कहा है, यहां अलग-अलग मौसमों में काफी अंतर है। मुझे समझ आया है कि जनवरी और फरवरी में यहां प्रदूषण काफी ज्यादा होता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उस समय खेलना सुखद नहीं होता। गले में जलन जैसी महसूस होती है और रोशनी में धुंध साफ दिखाई देती है। यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगता। मुझे नहीं लगता कि उस समय इंडिया ओपन आयोजित करना सही फैसला है। अब स्थिति काफी बेहतर है। सुबह खिड़की खोलने पर मैं चीजें देख सकता हूं, लेकिन जनवरी में ऐसा करने पर मैं बगल की इमारत तक नहीं देख पाता।’’
एंटोनसन ने कहा, ‘‘कल्पना कीजिए कि आपकी धड़कन तेज हो और आप हवा के लिए संघर्ष कर रहे हों। यह सुखद एहसास नहीं है। मैं नहीं जानता कि आप लोग इसके बारे में कैसा महसूस करते हैं। आप यहां रहते हैं और मुझसे बेहतर जानते हैं, लेकिन अभी स्थिति काफी बेहतर है। इसलिए अगर मैं बीडब्ल्यूएफ होता तो इंडिया ओपन को साल के किसी और समय आयोजित करता।’’
एंटोनसन ने कहा कि वह आयोजन स्थल की परिस्थितियों, खासकर रोशनी से खुश हैं, हालांकि सोमवार के मैच के दौरान कैमरों की फ्लैश लाइट से उन्हें कुछ परेशानी हुई।
एंटोनसन ने कहा कि मौजूदा समय में पुरुष एकल में प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी है और किसी भी दिन कोई भी खिलाड़ी जीत सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह अविश्वसनीय है। इतने सारे शानदार खिलाड़ी हैं। ऐसा लगता है कि हर किसी ने अपना स्तर बढ़ा लिया है। मैं करीब 20 खिलाड़ियों की ओर इशारा करके कह सकता हूं कि अगर इनमें से कोई अगला विश्व चैंपियन बन जाए तो मुझे बिल्कुल आश्चर्य नहीं होगा। इसलिए इस समय मेरे लिए यह आसान नहीं है।’’
भाषा सुधीर आनन्द
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