एशियाई खेलों में पदक का रंग बदलने के लिए हरसंभव प्रयास करूंगी: अनाहत

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एशियाई खेलों में पदक का रंग बदलने के लिए हरसंभव प्रयास करूंगी: अनाहत

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  • Publish Date - August 17, 2026 / 08:34 PM IST,
    Updated On - August 17, 2026 / 08:34 PM IST

(सुमन रे)

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) विश्व जूनियर स्क्वाश चैंपियन अनाहत सिंह अगले महीने जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों में पिछली बार जीते पदकों का रंग बदलने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहतीं।

भारत की 18 वर्षीय अनाहत ने 2023 में चीन के हांगझोउ में हुए एशियाई खेलों में मिश्रित युगल और टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीते थे। मिश्रित युगल में उन्होंने अभय सिंह के साथ जोड़ी बनाई थी जबकि टीम स्पर्धा में उनके साथ जोशना चिनप्पा, दीपिका पल्लिकल और तन्वी खन्ना थीं।

सोमवार को यहां एक सम्मान समारोह से इतर पीटीआई से बातचीत में अनाहत ने कहा, ‘‘मैं अपने पदक का रंग बदलना चाहती हूं। एशियाई खेलों तक मेरे पास जो एक महीना बचा है उसमें कड़ी ट्रेनिंग करूंगी और हरसंभव प्रयास करूंगी। उम्मीद है कि पदक का रंग बदलने और पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहूंगी।’’

उन्होंने कहा कि विश्व जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने का जश्न मनाने का उनके पास अधिक समय नहीं है क्योंकि 19 सितंबर से शुरू होने वाले एशियाई खेलों की तैयारी करनी है।

अनाहत ने कहा, ‘‘टूर्नामेंट खत्म हुए लगभग दो सप्ताह हो गए हैं इसलिए अब इसका अहसास थोड़ा होने लगा है। लेकिन अब मुझे एशियाई खेलों पर ध्यान देना है और उससे पहले कुछ टूर्नामेंट भी हैं। इसलिए मैं पिछली प्रतियोगिता को पीछे छोड़ने की कोशिश कर रही हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘बेशक उससे मिली सीख को अपने साथ लेकर चलूंगी लेकिन अब आने वाली प्रतियोगिताओं पर ध्यान देना है और उनमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर ध्यान देना है।’’

इस युवा खिलाड़ी ने कहा कि विश्व जूनियर खिताब जीतने के बाद उनकी जिंदगी में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो ज्यादा नहीं। असल में बहुत कुछ नहीं बदला है। मुझे अब भी वही प्रतियोगिताएं खेलनी हैं। यह बस एक छोटी सी उपलब्धि है। मुझे अभी बहुत कुछ हासिल करना है और बहुत खेलना है।’’

अनाहत ने कहा, ‘‘मैं केवल 18 साल की हूं और मेरे सामने अभी स्क्वाश में खेलने के लिए काफी लंबा समय है। यह उपलब्धि मेरे साथ रहेगी और अगले कुछ महीनों में मुझे थोड़ा अधिक आत्मविश्वास देगी कि मैं यह खिताब जीत चुकी हूं।’’

भाषा सुधीर आनन्द

आनन्द