भारतीय पहलवानों को विदेशी कोच का पूरा पैनल मिला
भारतीय पहलवानों को विदेशी कोच का पूरा पैनल मिला
… अमनप्रीत सिंह …
नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (भाषा) एशियाई खेलों और 2028 ओलंपिक की तैयारी को ध्यान में रखते हुए भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने मंगलवार को बड़ा कदम उठाते हुए तीन विदेशी कोच और एक ‘हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर (एचपीडी)’ की नियुक्ति की है। यह फैसला कई वर्षों बाद विदेशी विशेषज्ञों की वापसी के रूप में देखा जा रहा है। जॉर्जिया के एमजारियोस शाको बेंटिनिडिस (फ्रीस्टाइल), रूस के गोर्गी कोगुआशविली (ग्रीको-रोमन) और जापान के कोसेई अकाइशी (महिला कुश्ती) को कोच नियुक्त किया गया है। वहीं अमेरिका के आयन बटलर को एचपीडी नियुक्त किया गया है। ये सभी एक मई से राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों से जुड़ेंगे और उन्हें लगभग 7,000 डॉलर मासिक वेतन दिया जाएगा। इन नियुक्तियों पर भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और कई भारतीय कोच के साथ हुई ऑनलाइन बैठक में अंतिम मुहर लगी। एचपीडी आयन बटलर लखनऊ और दिल्ली स्थित पुरुष एवं महिला शिविरों के बीच समन्वय स्थापित करेंगे, ताकि विदेशी और भारतीय कोच के बीच बेहतर तालमेल बन सके। डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि यह निर्णय एशियाई खेलों की तैयारी को तेज करने के लिए लिया गया है। उन्होंने कहा कि बेंटिनिडिस पहले भी बजरंग पुनिया के साथ काम कर चुके हैं और उनके मार्गदर्शन में कई पहलवानों के प्रदर्शन में सुधार हुआ था। पूर्व विश्व चैंपियन और ओलंपिक पदक विजेता कोगुआशविली ग्रीको-रोमन शैली में अनुशासन और रणनीति के लिए जाने जाते हैं। उन पर इस शैली में भारत के प्रदर्शन को बेहतर करने की जिम्मेदारी होगी। अकाइशी जापान की सफल महिला कुश्ती प्रणाली का हिस्सा रहे हैं। पहले वे बेंगलुरु स्थित एक केंद्र से जुड़े थे, लेकिन सक्रिय खिलाड़ियों की कमी के चलते अब उन्हें राष्ट्रीय महिला टीम से जोड़ा गया है। उनके साथ भाषा संबंधी बाधा दूर करने के लिए जापानी दूतावास की ओर से एक दुभाषिया भी उपलब्ध कराया जाएगा। एचपीडी आयन बटलर प्रशिक्षण योजना, खिलाड़ियों की निगरानी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भारत की कुश्ती प्रणाली को मजबूत करने पर काम करेंगे। डब्ल्यूएफआई ने 2019–20 के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में विदेशी कोच की नियुक्ति की है। इससे पहले कई विदेशी कोच का कार्यकाल विवादों या प्रदर्शन संबंधी कारणों से समाप्त हो गया था। डब्ल्यूएफआई के विदेशी कोचिंग अनुभव में पहले कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। ईरान के होसैन करीमी को अक्टूबर 2019 में पुरुष फ्रीस्टाइल कोच नियुक्त किया गया था। उन्हें महज छह महीने के अंदर “वीआईपी कल्चर” से जुड़े आरोपों के चलते हटा दिया गया था। इसके बाद अमेरिकी कोच एंड्रयू कुक ने महिला शिविर की जिम्मेदारी संभाली, लेकिन 2020 में राष्ट्रीय शिविर कोरोना महामारी के कारण बंद होने के बाद उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। बाद में 2025 में उन्हें औपचारिक रूप से बर्खास्त किया गया। डब्ल्यूएफआई ने ऑनलाइन सत्रों में भाग न लेने का कारण बताया, जबकि कुक ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उनकी विदाई वेतन संबंधी मुद्दों पर उनके रुख के कारण हुई। इसी तरह जॉर्जिया के ग्रीको-रोमन कोच तेमो कासारशविली को तोक्यो ओलंपिक के लिए इस श्रेणी के एक भी पहलवान के क्वालीफाई न कर पाने पर 2021 में हटा दिया गया था। इन अनुभवों से सीख लेते हुए अब डब्ल्यूएफआई ने अधिक समन्वित और सहयोगात्मक प्रणाली अपनाने का निर्णय लिया है, जिसमें विदेशी और भारतीय कोच एचपीडी की निगरानी में मिलकर काम करेंगे। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पदक संभावनाओं को मजबूत करना है। डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि पहले संगठन का मानना था कि भारतीय कोच पर्याप्त हैं, लेकिन अब जरूरत के अनुसार यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा, “कई पहलवान मानते हैं कि विदेशी कोच तकनीक सुधारने में मदद करते हैं। हम अपने पहलवानों को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” भाषा आनन्द सुधीरसुधीर

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