बारबासोल में संयुक्त तीसरे स्थान पर रहे लाहिड़ी, अब ओलंपिक पदक है लक्ष्य

बारबासोल में संयुक्त तीसरे स्थान पर रहे लाहिड़ी, अब ओलंपिक पदक है लक्ष्य

बारबासोल में संयुक्त तीसरे स्थान पर रहे लाहिड़ी, अब ओलंपिक पदक है लक्ष्य
Modified Date: November 29, 2022 / 07:49 pm IST
Published Date: July 19, 2021 6:25 am IST

निकलसविले (अमेरिका), 19 जुलाई (भाषा) भारतीय गोल्फर अनिर्बान लाहिड़ी ने ओलंपिक खेलों से पहले अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए सात अंडर 65 का स्कोर बनाया जिससे वह बारबासोल चैंपियनशिप में संयुक्त तीसरे स्थान पर रहे।

ओलंपिक की तैयारियों में लगे 34 वर्षीय लाहिड़ी ने आठ बर्डी बनायी। इनमें से चार बर्डी उन्होंने आखिरी पांच होल में की। उन्होंने कीन ट्रेस गोल्फ क्लब में कुल 20 अंडर 268 का स्कोर बनाया तथा सीमस पावर और जे टी पोस्टन से एक शॉट पीछे रहे।

आयरलैंड के पावर ने छह होल के प्लेऑफ के बाद अपना पहला पीजीए टूर खिताब जीता।

अप्रैल में कोविड-19 से जूझने वाले लाहिड़ी के लिये यह अच्छी वापसी रही। वह पीजीए टूर में तीसरी बार शीर्ष तीन में शामिल रहे। इससे वह फेडएक्स तालिका में 129वें से 108वें स्थान पर पहुंच गये। शीर्ष 125 गोल्फर अगस्त में फेडएक्स कप प्लेऑफ में खेलेंगे और अगले सत्र के लिये अपना टूर कार्ड बरकरार रखेंगे।

लाहिड़ी ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि पूरे सप्ताह मैंने जितना स्कोर बनाया, मैं उससे बेहतर खेला था। मैं अपने स्कोर से थोड़ा निराश हूं। यह उतना अच्छा नहीं रहा जैसा कि मैं चाहता था। तोक्यो जाने के कारण मैं अगले सप्ताह नहीं खेल पाऊंगा और इसलिए मैं यह सुनिश्चित करना चाहता था कि इस सप्ताह मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूं। ’’

लाहिड़ी ने इस सप्ताह 68, 67, 68 और 65 के कार्ड खेले। उन्होंने 2018 में मैक्सिको में मयाकोबा क्लासिक में संयुक्त 10वें नंबर पर रहने के बाद पहली बार चारों दौर में 70 से कम का स्कोर बनाया।

यह भारतीय खिलाड़ी इस सप्ताह के आखिर में तोक्यो जाएगा जहां वह 29 जुलाई से एक अगस्त को होने वाली ओलंपिक गोल्फ प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

लाहिड़ी ने कहा, ‘‘भारत का प्रतिनिधित्व करना हमेशा विशेष होता है। मुझे ऐसा जो भी अवसर मिला मैंने उसे हाथों हाथ लिया। उम्मीद है कि मैं इस शानदार फॉर्म को तोक्यो में भी जारी रखूंगा। मेरे लिये पदक जीतना महत्वपूर्ण है। इससे भारत में गोल्फ के प्रति धारणा भी बदलेगी। इससे कारपोरेट और सरकार से हमें मिल रहे सहयोग में भी बदलाव होगा। ’’

भाषा

पंत

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