एमसीसी ने क्रिकेट नियमों में 73 बदलाव किए, अंतिम ओवर पूरा करना अनिवार्य

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एमसीसी ने क्रिकेट नियमों में 73 बदलाव किए, अंतिम ओवर पूरा करना अनिवार्य

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  • Publish Date - February 3, 2026 / 07:00 PM IST,
    Updated On - February 3, 2026 / 07:00 PM IST

लंदन, तीन फरवरी (भाषा) मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने क्रिकेट के नियमों में कुल 73 बदलावों की घोषणा की है जिसमें बहु-दिवसीय मैचों में अगर अंतिम ओवर के दौरान विकेट गिरता है तो पूरा ओवर खेलना अनिवार्य करना भी शामिल है। नये नियम इस साल अक्टूबर से लागू होंगे।

एमसीसी ने कहा कि 2022 के बाद पहली बार जारी की गई ‘लॉज ऑफ क्रिकेट की नयी प्रति’ का मकसद नियमों को समय के अनुरूप और आधुनिक खेल के लिए अधिक समावेशी बनाना है।

एमसीसी ने अपनी वेबसाइट पर बताया कि बहु-दिवसीय मैचों में दिन का अंतिम ओवर अब हर हाल में पूरा कराया जाएगा। एमसीसी के अनुसार, ऐसा न होने से “खेल का रोमांच कम हो जाता है।”

एमसीसी ने कहा, ‘‘यह अनुचित माना गया कि अगर दिन के अंतिम ओवर में गेंदबाजी कर रही टीम विकेट ले ले, तो बल्लेबाजी टीम को नया बल्लेबाज भेजने की जरूरत नहीं पड़ती।”

उन्होंने कहा कि इससे समय की बचत भी नहीं होती, क्योंकि बची हुई गेंदें अगले दिन पूरी करनी ही पड़ती हैं। साथ ही इससे खेल का रोमांच कम हो जाता है। नया बल्लेबाज मुश्किल परिस्थितियों से बच जाता है क्योकि आमतौर पर उस समय गेंदबाजों के लिए हालात अनुकूल होते हैं।

एमसीसी ने स्पष्ट किया, “नये नियम के तहत अगर परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो अंतिम पूरा किया जाएगा, भले ही उस दौरान विकेट गिर जाए।”

एमसीसी ने मौजूदा और पूर्व महिला खिलाड़ियों के साथ मिलकर जूनियर और महिला क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाली गेंदों के लिए नए मानक और नाम भी तय किए हैं।

एमसीसी के अनुसार अब गेंदों को साइज-1, साइज-2 और साइज-3 के रूप में वर्गीकृत किया गया है। साइज-1 (पारंपरिक पुरुषों की गेंद) में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अब तीनों श्रेणियों के लिए मानक एक समान कर दिए गए हैं।

एमसीसी ने लागत कम करने के उद्देश्य से ‘ओपन एज क्रिकेट’ में ‘लैमिनेटेड’ बल्लों के इस्तेमाल को भी मंजूरी दे दी है। इससे पहले ऐसे बल्लों की अनुमति केवल जूनियर क्रिकेट में थी।

एमसीसी ने कहा,“इन बल्लों की व्यापक जांच की गई है और ऐसा नहीं माना गया कि लैमिनेटेड बल्ले प्रदर्शन में कोई बड़ा फायदा देंगे। शीर्ष स्तर पर हालांकि अब भी एक ही टुकड़े के विलो से बने बल्लों का इस्तेमाल जारी रहने की संभावना है।”

विकेटकीपर से जुड़े नियम में भी बदलाव किया गया है। अब गेंद फेंके जाने से पहले अगर विकेटकीपर स्टंप्स के बराबर या आगे खड़ा होता है, तो इसे नोबॉल नहीं माना जाएगा।

एमसीसी ने कहा, “विकेटकीपर अब भी गेंद को पकड़ने के लिए तब तक स्टंप्स के आगे नहीं आ सकता, जब तक गेंद बल्लेबाज के विकेट को पार न कर जाए या बल्ले अथवा शरीर से संपर्क न कर ले। लेकिन अब नियम यह है कि गेंद छोड़े जाने के बाद ही विकेटकीपर को पूरी तरह स्टंप्स के पीछे होना होगा।”

सीमा रेखा के पास लिए जाने वाले कैच को लेकर ‘बनी हॉप कैच’ को हटाया गया है। अब कोई भी क्षेत्ररक्षक सीमा के बाहर रहते हुए हवा में गेंद को केवल एक बार छू सकता है और उसके बाद पूरी तरह बाउंड्री के अंदर जमीन पर होना जरूरी होगा।

एमसीसी ने कहा कि अगर कोई क्षेत्ररक्षक बाउंड्री के बाहर से गेंद को उछालकर अंदर खड़े साथी खिलाड़ी की ओर भेजता है और बाद में खुद सीमा के बाहर चला जाता है, तो उसे बाउंड्री माना जाएगा।

एमसीसी ने पहली बार ‘ओवरथ्रो’ की स्पष्ट परिभाषा भी दी है। इसके अनुसार, रन रोकने या रनआउट के प्रयास में स्टंप्स की ओर फेंकी गई गेंद को ओवरथ्रो माना जाएगा, जबकि केवल गेंद रोकने या दूसरे क्षेत्ररक्षकों को देने में हुई चूक को ओवरथ्रो नहीं माना जाएगा।

जानबूझकर शॉर्ट रन लेने की स्थिति में अब क्षेत्ररक्षक टीम को यह तय करने का अधिकार होगा कि अगली गेंद पर कौन सा बल्लेबाज स्ट्राइक पर रहेगा।

एमसीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि गेंद को तब “पूरी तरह से रुकी हुई” माना जाएगा जब वह किसी क्षेत्ररक्षक के हाथ में हो या जमीन पर स्थिर हो। अब गेंद का गेंदबाज या विकेटकीपर के हाथ में होना जरूरी नहीं होगा।

भाषा

आनन्द सुधीर

सुधीर