नबी की ताकत रक्षात्मक में खेलने के लिए मजबूर कर बल्लेबाजों को आउट करना है: पठान

नबी की ताकत रक्षात्मक में खेलने के लिए मजबूर कर बल्लेबाजों को आउट करना है: पठान

नबी की ताकत रक्षात्मक में खेलने के लिए मजबूर कर बल्लेबाजों को आउट करना है: पठान
Modified Date: August 4, 2026 / 05:20 pm IST
Published Date: August 4, 2026 5:20 pm IST

… कुशान सरकार …

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) भारत के पूर्व हरफनमौला इरफान पठान का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने जा रहे जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी की सबसे बड़ी ताकत तेज रफ्तार नहीं, बल्कि शीर्ष बल्लेबाजों को रक्षात्मक बल्लेबाजी के दौरान गलती करने पर मजबूर करने की क्षमता है। अनुभवी जसप्रीत बुमराह के चोटिल होने के कारण नबी को श्रीलंका में 15 अगस्त से शुरू होने वाले दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। पठान ने 2018 में श्रीनगर में हुए ट्रायल के दौरान पहली बार नबी की प्रतिभा पहचानी थी। उन्होंने बाद में जम्मू-कश्मीर के युवा क्रिकेटरों को मार्गदर्शन भी दिया। उनका मानना है कि नबी की स्वाभाविक गेंदबाजी शैली, कलाई की स्थिति और गेंद को मूव कराने की क्षमता उन्हें बिना तेज रफ्तार के भी प्रभावी बनाती है। पठान ने ‘पीटीआई’ से बातचीत में कहा, ‘‘गेंद को स्विंग कराने के लिए आदर्श रफ्तार लगभग 135 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। अगर आप गेंद को देर से स्विंग करा सकते हैं तो आप सफल हो सकते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उसकी लय और गेंदबाजी एक्शन को देखते हुए मेरा मानना है कि वह नियमित रूप से 133-135 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार हासिल कर सकता है।’’ पठान के अनुसार तेज गति गेंदबाजी का केवल एक हिस्सा है। असली क्षमता यह है कि गेंदबाज किस तरह विश्वस्तरीय बल्लेबाजों को रक्षात्मक शॉट खेलने के लिए मजबूर करता है और फिर उन्हें आउट करने का रास्ता निकालता है। उन्होंने कहा, ‘‘क्या गेंदबाज में यह क्षमता है कि वह शीर्ष स्तर के बल्लेबाजों को डिफेंस करते हुए भी आउट कर सके? यही वह खूबी है जिसकी तलाश होती है।’’ पठान ने इस साल रणजी ट्रॉफी फाइनल का उदाहरण देते हुए कहा कि नबी ने कर्नाटक के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया था। जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी की बढ़त के आधार पर ऐतिहासिक खिताब जीता। उन्होंने कहा, ‘‘रणजी ट्रॉफी फाइनल में हमने देखा कि उसने अनुभवी लोकेश राहुल को परेशान किया। भले ही उसे विकेट नहीं मिला, लेकिन उसने बल्लेबाज को सामान्य तरीके से रक्षात्मक बल्लेबाजी करने पर मजबूर किया और फिर आउट किया।’’ भाषा आनन्द मोनामोना


लेखक के बारे में