राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी पोल वॉल्ट खिलाड़ी और कोच को पोल साथ ले जाने के लिये भरना पड़ा दंड
राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी पोल वॉल्ट खिलाड़ी और कोच को पोल साथ ले जाने के लिये भरना पड़ा दंड
(मोना पार्थसारथी)
नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय चैम्पियनशिप से लौट रहे भारत के राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी पोलवॉल्ट खिलाड़ी देव कुमार मीणा और उनकी टीम को पनवेल में अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा जब उन्हें पोल रेलवे स्टेशन पर ही छोड़कर जाने के लिये कहा गया और काफी मिन्नतें करने तथा जुर्माना भरने के बाद ही उन्हें इसे साथ ले जाने की अनुमति दी गई ।
जुलाई 2025 में जर्मनी में विश्व यूनिवर्सिटी खेलों में अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीसरी बार तोड़कर 5 . 40 मीटर का नया रिकॉर्ड बनाने वाले देव, मंगलुरू में मीट रिकॉर्ड बनाने वाले कुलदीप और उनके साथी खिलाड़ी कोच घनश्याम के साथ मंगलुरू में अखिल भारतीय यूनिवर्सिटी खेलों से हिस्सा लेकर लौट रहे थे ।
कोच घनश्याम ने भाषा को बताया ,‘‘हम मंगलुरू में अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय चैम्पियनशिप से लौट रहे थे और महाराष्ट्र के पनवेल से भोपाल के लिये ट्रेन लेनी थी । हम स्टेशन के बाहर खाना खाने गए थे और कुछ खिलाड़ी पोल के पास बैठे थे । टीसी ने उनसे पोल हटाने को कहा तो मैने आकर उन्हें बताया कि यह पोल वॉल्ट है और प्रतिस्पर्धा में भागीदारी का सबूत और पदक भी दिखाया ।’’
वहीं मध्य रेलवे के सीपीआरओ ने कहा कि रेलवे के किसी कर्मचारी का किसी खिलाड़ी की भावना आहत करने का इरादा नहीं था और वे सिर्फ नियम का पालन कर रहे थे ।
अधिकारी ने पीटीआई भाषा से कहा ,‘‘ हम खिलाड़ियों का सम्मान करते हैं । हमने उन्हें पनवेल स्टेशन से पोल लगैज में बुक करने के लिये कहा था क्योंकि वह जायज सीमा से अधिक लंबा था ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ सोशल मीडिया पोस्ट में जो आरोप लगाये गए हैं , उनके विपरीत तथ्य यह है कि उनकी ट्रेन विलंब के कारण रिशेड्यूल की गई थी । रेलवे के किसी कर्मचारी का किसी खिलाड़ी की भावना आहत करने का इरादा नहीं था।’’
वहीं कोच घनश्याम ने कहा ,‘‘ टीसी ने कहा कि इसे लगैज में भेजना चाहिये था तो यह पांच मीटर लंबा है और लगैज में आयेगा नहीं और टूटने का डर रहता है ।लगैज में जिस तरह से सामान फेंका जाता है , फाइबर ग्लास का पोल टूट सकता है और एक पोल दो लाख रूपये का आता है । हमारे पास छह सात पोल थे ।’’
घनश्याम ने बताया कि खिलाड़ियों के साथ वह थर्ड एसी में सफर करते हैं और स्लीपर या जनरल डिब्बे में लगे पंखों के ऊपर पोल रख देते हैं ताकि किसी को परेशानी नहीं हो । उन्होंने कहा कि इसमें भी चोरी होने का डर रहता है लिहाजा थोड़ी थोड़ी देर में आकर उसे देखते रहना होता है ।
कोच ने कहा ,‘‘ हमने टीसी को दिखाया भी कि पोल कहां रखा जाता है और उससे किसी यात्री को दिक्कत नहीं होती लेकिन वह अड़ गए कि या तो 8000 रूपये चार्ज भरो या पोल यही छोड़कर जाओ । मैने हाथ जोड़कर कहा कि आठ हजार रूपये मैं कहां से लाऊंगा । और अगर चार्ज भर भी दिया तो पोल जायेगा कैसे ।’’
घनश्याम ने मुंबई में रेलवे खेल अधिकारी ओलंपियन रंजीत माहेश्वरी और उनकी पत्नी सुरेखा से भी बात कराई जो खुद पोल वॉल्टर रह चुकी हैं ।
उन्होंने कहा ,‘‘ दोनों ने कहा कि खिलाड़ियों को परेशान नहीं करें क्योंकि कल को सोशल मीडिया पर चीजें आयेंगी तो बड़ी बदनामी होगी । हमने मध्यप्रदेश सरकार के खेल विभाग के लेटरहेड पर लिखा गया पत्र भी दिखाया कि यह खेल का साजो सामान है जिसे ले जाने की अनुमति दी जाये लेकिन हमारी एक नहीं सुनी गई।’’
विश्व स्तर पर कोचिंग लेवल एक का कोर्स कर चुके और शारीरिक शिक्षा में पीएचडी कर रहे घनश्याम ने कहा ,‘‘ हमारी एक ट्रेन भी छूट गई और बहुत मिन्नतें करने के बाद आखिर में 80 किलो का जुर्माना 1875 रूपये लिया जो हमने अपनी जेब से दिया । करीब चार पांच घंटे इसमें लग गए ।’’
वहीं एशियाई अंडर 20 कांस्य पदक विजेता देव ने कहा ,‘‘ मैं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हूं और मेरे साथ अभी भी भारत में ऐसी चीजें हो रही है तो जूनियर का क्या होता होगा । ये कोई नयी चीज नहीं है । हम चाहते हैं कि कोई तो इसके लिये कुछ करे ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ हम चाहते हैं कि ऐसे कोई दिशा निर्देश हो कि जैसे हम खिलाड़ी यात्रा करते हैं , वैसे ही हमारे साजो सामान की यात्रा का भी इंतजाम हो । पोल और भाला को लेकर कोई व्यवस्था होनी चाहिये।’’
कोच घनश्याम ने कहा ,‘‘हम किसी की शिकायत नहीं कर रहे हैं । सिर्फ एक ही निवेदन है कि खिलाड़ी का साजोसामान सुरक्षित स्पर्धा तक पहुंच जाये क्योंकि खिलाड़ी और कोच बहुत मेहनत करते हैं । उन्हें वैसे भी काफी कठिनाइयां रहती है और इस तरह की नयी कठिनाई से पूरा फोकस बिगड़ जाता हैं ।’’
भाषा
मोना पंत
पंत


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