पदक का दबाव नहीं होने से मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना: लवलीना

पदक का दबाव नहीं होने से मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना: लवलीना

पदक का दबाव नहीं होने से मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना: लवलीना
Modified Date: July 24, 2026 / 11:19 pm IST
Published Date: July 24, 2026 11:19 pm IST

(तस्वीरों के साथ) … अपराजिता उपाध्याय …

ग्लास्गो, 24 जुलाई (भाषा) राष्ट्रमंडल खेलों में अपना अभियान शुरू करने से पहले ही पदक पक्का कर चुकी भारत की स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने शुक्रवार को कहा कि पदक जीतने का दबाव नहीं होने के कारण उनका पूरा ध्यान देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने पर है। तोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना को महिला 75 किलोग्राम वर्ग में बाई मिलने के कारण सीधे सेमीफाइनल में प्रवेश मिला, जिससे भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में पहला पदक भी सुनिश्चित हो गया। पिछले दो राष्ट्रमंडल खेलों में पदक हासिल करने में नाकाम रही 28 साल की इस मुक्केबाज के लिए सीधा सेमीफाइनल प्रवेश किसी सुखद आश्चर्य से कम नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘यह खबर मेरे लिए भी चौंकाने वाली थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे सीधे सेमीफाइनल में जगह मिलेगी। पिछले दो राष्ट्रमंडल खेलों में मुझे चार-पांच मुकाबले खेलने पड़े थे और तब भी पदक नहीं मिला था। लवलीना ने कहा, ‘‘शायद यह मेरी वर्षों की मेहनत का फल है।’’’ पेरिस ओलंपिक और उसके बाद मुश्किल समय का सामना करने वाली लवलीना का आत्मविश्वस लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से लौट आया। उन्होंने कहा, ‘‘पेरिस ओलंपिक के बाद मेरे जीवन में काफी बदलाव आया। मैंने विश्व चैंपियनशिप सहित कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। एक समय मैं उलझन में थी कि खेल जारी रखूं या नहीं, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। लगातार अभ्यास किया और फिर दोबारा पदक जीतने लगी।’’ लवलीना ने कहा कि पदक पक्का होने के बाद उनका लक्ष्य केवल स्वर्ण पदक जीतना है। उन्होंने कहा, ‘‘अब पदक का कोई दबाव नहीं है। मुझे सिर्फ स्वर्ण पदक के लिए लड़ना है। अगर मैं अपने देश के लिए स्वर्ण जीत सकी तो इससे बड़ी खुशी कोई नहीं होगी।’ असम की इस मुक्केबाज ने ग्लास्गो रवाना होने से पहले बेलफास्ट में आयोजित प्रशिक्षण शिविर को अपनी तैयारियों के लिए बेहद उपयोगी बताया। उन्होंने कहा, ‘‘बेलफास्ट में हमारा प्रशिक्षण शिविर बहुत अच्छा रहा। वहां अभ्यास और स्पैरिंग शानदार रही, इसलिए मुझे पूरा विश्वास है कि मैं यहां स्वर्ण पदक जीत सकती हूं।’’ लवलीना ने भारतीय टीम के मुख्य कोच सैंटियागो नीवा की भी जमकर सराहना की, जिन्होंने इस वर्ष फिर से भारतीय मुक्केबाजी दल से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने उनके मार्गदर्शन में बेहतरीन स्पैरिंग (अभ्यास) सत्र किए हैं। नीवा सर शानदार कोच हैं। वह तोक्यो ओलंपिक के दौरान भी हमारे साथ थे और उनके प्रशिक्षण का तरीका काफी प्रभावी है।’’ भाषा आनन्द आनन्द


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