क्षेत्ररक्षण के लिए आसान मैदान नहीं, लेकिन खिलाड़ियों ने जी-जान लगायी: कमिंस

क्षेत्ररक्षण के लिए आसान मैदान नहीं, लेकिन खिलाड़ियों ने जी-जान लगायी: कमिंस

क्षेत्ररक्षण के लिए आसान मैदान नहीं, लेकिन खिलाड़ियों ने जी-जान लगायी: कमिंस
Modified Date: October 28, 2023 / 08:08 pm IST
Published Date: October 28, 2023 8:08 pm IST

धर्मशाला, 28 अक्टूबर (भाषा) ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस ने न्यूजीलैंड के खिलाफ आईसीसी विश्व कप के बड़े स्कोर वाले रोमांचक मैच में पांच रन की जीत का श्रेय काफी हद तक क्षेत्ररक्षकों को देते हुए कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में उनके खिलाड़ियों ने अपना सब कुछ झोंक दिया।

ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवर में 388 रन बनाने के बाद न्यूजीलैंड की पारी को नौ विकेट पर 383 रन पर रोक दिया। न्यूजीलैंड को पांच गेंद में 13 रन की जरूरत लेकिन ऑस्ट्रेलिया के क्षेत्ररक्षकों खास कर मार्नस लाबुशेन ने दो शानदार बचाव किये। उन्होंने ओवर की पांचवीं गेंद पर जेम्स नीशम को रन आउट भी किया।

कमिंस ने मैच के बाद पुरस्कार समारोह में कहा, ‘‘ इस मैच में क्षेत्ररक्षण से बड़ा अंतर आया। मार्नस ने अपना सब कुछ झोंक दिया। इस मैदान में क्षेत्ररक्षण करना आसान नहीं है लेकिन मेरे खिलाड़ियों ने जी-जान लगा दी।’’

चोट से वापसी करने वाले ट्रेविस हेड ने 67 गेंद में 109 रन की आक्रामक पारी खेली। उन्होंने सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर के साथ 175 रन की साझेदारी कर बड़े स्कोर की नींव रखी।

कमिंस ने कहा, ‘‘यह शानदार मुकाबला रहा। उनकी टीम ने मैच में कई बार वापसी की। उन्होंने कई बार हम पर दबाव बनाया।

न्यूजीलैंड के कप्तान टॉम लैथम को लक्ष्य के इतने करीब पहुंच कर जीत हासिल करने में नाकाम रहने का मलाल है।

उन्होंने कहा, ‘‘ क्रिकेट का शानदार खेल। कई बार उतार-चढ़ाव आये। इतना करीब आ कर चूक जाना जाहिर तौर पर निराशाजनक है। ऑस्ट्रेलिया ने अच्छा प्रदर्शन कर हमें शुरू से ही बैकफुट पर रखा।’’

लैथम ने बड़े स्कोर वाले मैच में 10 ओवर में महज 37 रन देकर तीन विकेट लेने वाले ग्लेन फिलिप्स की तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘‘ उन्होंने महत्वपूर्ण समय पर कमाल की गेंदबाजी करते हुए 10 ओवर में 30 (37) रन देकर तीन विकेट लिए। एक छोर से पूरे 10 गेंद फेंकना शानदार था।’’

मैन ऑफ द मैच हेड ने कहा, ‘‘ टीम में वापसी कर के अच्छा लग रहा है। टीम की जीत में योगदान देना अच्छा है। आखिर में यह काफी करीबी मुकाबला हो गया।’’

भाषा आनन्द पंत

पंत


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