शायद पहले से तय था पंत और एलएसजी जायंट्स का साथ टूटना

शायद पहले से तय था पंत और एलएसजी जायंट्स का साथ टूटना

शायद पहले से तय था पंत और एलएसजी जायंट्स का साथ टूटना
Modified Date: May 29, 2026 / 08:09 pm IST
Published Date: May 29, 2026 8:09 pm IST

नयी दिल्ली, 29 मई (भाषा) दिग्गज विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मौजूदा सत्र में बेहद खराब प्रदर्शन के बाद कप्तानी से मुक्त कर दिया है।

टीम इस सत्र में 14 मैचों में सिर्फ चार जीत के बाद सबसे नीचे 10वें पायदान पर रही।

पीटीआई ने 14 मई को खबर दी थी कि पंत कप्तानी की जिम्मेदारी से मुक्त हो सकते हैं, जिसकी पुष्टि एलएसजी के क्रिकेट निदेशक टॉम मूडी ने भी की।

एलएसजी ने एक आधिकारिक बयान में कहा, ‘‘लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) यह औपचारिक रूप से घोषित करना चाहती है कि ऋषभ पंत ने फ्रेंचाइजी से कप्तानी छोड़ने का अनुरोध किया है और फ्रेंचाइजी ने उनके अनुरोध को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।’’

इस बयान में मूडी ने कहा, ‘‘ऋषभ ने इस अनुरोध के साथ फ्रेंचाइजी से संपर्क किया और हमने सम्मानपूर्वक इसे स्वीकार कर लिया है।’’

ऑस्ट्रेलिया के इस पूर्व हरफनमौला ने कहा, ‘‘ये फैसले कभी आसान नहीं होते। कप्तान के तौर पर ऋषभ ने इस ड्रेसिंग रूम में जो कुछ भी योगदान दिया है, उसके लिए हम उनके आभारी हैं। अब हमारा ध्यान सर्वश्रेष्ठ स्तर तक पहुंचने के लिए टीम के सामूहिक पुनर्निर्माण और पुनर्गठन पर है।’’

इन घटनाक्रमों पर नजर रखने वालों से बात करने के बाद यह कुछ हद तक निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि 28 वर्षीय पंत शायद एक खिलाड़ी के तौर पर टीम में बने नहीं रहना चाहेंगे और हो सकता है कि उन्हें ‘ट्रेडिंग’ के लिए उपलब्ध कराया जाए या फिर नीलामी के लिए रिलीज कर दिया जाए।

कप्तानी के साथ-साथ बल्लेबाज के तौर पर भी पंत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। उन्होंने इस सत्र में 14 पारियों में सिर्फ 312 रन बनाए।

जैसा कि चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर ने बताया कि पंत को अब टेस्ट क्रिकेट में एक बेहतरीन बल्लेबाज बनने पर ध्यान देना चाहिए और उसके बाद ही उन्हें सफेद गेंद के क्रिकेट में अपनी जगह दोबारा बनाने की कोशिश करनी चाहिए। अब उनके लिए समय आ गया है कि वह कप्तानी से आगे बढ़कर सोचें और अपने अंदर के उस बल्लेबाज़ पर ध्यान दें जो भारत के लिए मैच जीतने की काबिलियत रखता है।

लखनऊ सुपर जायंट्स ने अपने पहले दो साल में काफी अच्छा किया था जिसमें केएल राहुल की कप्तानी और मेंटोर गौतम गंभीर के साथ टीम प्ले-ऑफ तक पहुंची। लेकिन गंभीर के जाने के बाद 2024 सत्र से हालात बिगड़ने लगे।

टीम के मालिक संजीव गोयनका का एक शर्मनाक हार के बाद राहुल पर सार्वजनिक रूप से भड़कना एक खतरे की घंटी जैसा था। आम तौर पर यह आशंका जताई जाने लगी कि यह फ्रेंचाइजी अपने खिलाड़ियों को ज्यादा आजादी या राहत नहीं देती।

2025 सत्र के लिए 2024 की नीलामी से पहले ही यह तय था कि पंत 25 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर जाएंगे और गोयनका ने उन्हें 27 करोड़ रुपये में खरीदा।

गोयनका ने कोलकाता में एक भव्य समारोह में घोषणा की कि पंत उनके लिए 15 साल का निवेश हैं, एक ऐसा खिलाड़ी जिसमें उन्हें आईपीएल का सर्वश्रेष्ठ कप्तान नजर आया।

लेकिन जस्टिन लैंगर और पंत की जोड़ी कभी एक सोच पर नहीं दिखी। उनका तालमेल खराब था या कहें कि बेहद कमजोर।

कोचिंग सेटअप में किसी मजबूत भारतीय नाम की कमी का भी नकारात्मक असर पड़ा। हालांकि भरत अरुण उस भूमिका में नहीं थे।

इसके अलावा पंत पर 27 करोड़ रुपये खर्च करने और चोटिल मयंक यादव को 11 करोड़ रुपये में रिटेन करने के कारण संजीव गोयनका और उनकी टीम ने अपने कुल बजट का लगभग एक-तिहाई हिस्सा पहले ही खर्च कर दिया था।

स्थिति तब और मुश्किल हो गई जब पंत को शुरुआत में अलग-अलग बल्लेबाजी क्रम पर भेजा गया। लगातार असफलताओं के बाद उन्हें नीचे बल्लेबाजी के लिए आना पड़ा।

मूडी के आने से हालात को और उलझा दिया। लखनऊ सुपर जायंट्स के मालिकों के काम करने के तरीके को करीब से देखने वाले लोग कहते हैं कि उनका भरोसा हमेशा विदेशी कोचों, खासकर ऑस्ट्रेलियाई कोचों पर ज्यादा रहता है।

योजना और तैयारी की साफ कमी दिखी जिसका असर मैदान पर प्रदर्शन में भी नजर आया। इससे यह भी साफ हुआ कि पंत और लैंगर के बीच तालमेल कितना कमजोर था।

सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला दृश्य उस मैच के बाद दिखा जिसमें टीम 220 रन का स्कोर भी बचा नहीं सकी। एक तरफ डेथ ओवरों में पंत की धीमी बल्लेबाजी के कारण टीम कम से कम 20 रन पीछे रह गई, वहीं दूसरी तरफ वैभव सूर्यवंशी ने तूफानी अंदाज में 38 गेंदों पर 93 रन ठोक दिए।

मैच खत्म होने के बाद टीम के मालिक और उनके परिवार के सदस्य अपने बच्चों के साथ मैदान पर थे, लेकिन पंत के साथ नहीं। बच्चे 15 वर्षीय युवा सितारे वैभव सूर्यवंशी से मिलना चाहते थे। उसी पल यह साफ हो गया था कि टीम भावनात्मक रूप से पंत से आगे बढ़ चुकी है। पेशेवर तौर पर बस औपचारिक घोषणा बाकी थी।

भाषा आनन्द नमिता मोना

मोना


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