प्राचिती एशियाई खेलों में एमएमए रेफरी बनने वाली पहली भारतीय

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प्राचिती एशियाई खेलों में एमएमए रेफरी बनने वाली पहली भारतीय

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  • Publish Date - September 22, 2026 / 02:49 PM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 02:49 PM IST

नागोया, 22 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र की प्राचिती नागपुरकर ने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) का रेफरी बनने के अपने सपने को साकार करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई छोड़ दी और एशियाई खेलों में यह भूमिका निभाने वाली पहली भारतीय बनने के बाद उन्हें इस आकर्षक पेशे को छोड़ने का कोई पछतावा नहीं है।

प्राचिती ने नागोया शहर के इनाए स्पोर्ट्स सेंटर में आयोजित एशियाई खेलों के सेमीफाइनल मुकाबलों में से एक में रेफरी की भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि वह इस वर्ष उज्बेकिस्तान और चीन में एशियाई खेलों के क्वालीफायर्स और एशियाई चैंपियनशिप के अलावा दक्षिण पूर्व एशियाई खेलों में भी रेफरी रह चुकी हैं।

प्राचिती ने पीटीआई से कहा, ‘‘हम यहां इतिहास का हिस्सा हैं। एमएमए मेरा पसंदीदा खेल है और एशियाई खेलों में अपने खेल को देखना और रेफरी के रूप में अपने देश का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए अविश्वसनीय अनुभव रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने हमेशा अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखा था। मैं एमएमए में मैच रेफरी बनने वाली पहली भारतीय हूं।’’

चार्टर्ड अकाउंटेंसी छोड़कर एमएमए रेफरी बनने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि मैं एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हूं, लेकिन मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स मेरा प्यार है, मेरा जुनून है। मैंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी छोड़ दी है और अब मैं एमएमए मैचों में रेफरी का काम कर रही हूं।’’

एशियाई खेलों के सोमवार को समाप्त हुए एमएमए मुकाबले में दो अन्य भारतीय अधिकारी भी शामिल थे लेकिन वे रेफरी नहीं बल्कि जज थे।

भाषा

पंत सुधीर

सुधीर