नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने मंगलवार को कहा कि उसने जापान में एशियाई खेलों में हिस्सा ले रहे भारतीय खिलाड़ियों के लिए जमीनी स्तर पर सहायता बढ़ा दी है। इसके तहत निशानेबाजों के लिए परिवहन की व्यवस्था करने के साथ-साथ उन कोच और सहयोगी स्टाफ के लिए कमरों का इंतजाम किया गया है जिन्हें आयोजन समिति की ओर से आवास नहीं मिल सका था।
साइ ने कहा कि अन्य उपायों के तहत चिकित्सा दलों के लिए कारों की भी व्यवस्था की गई है जिससे कि वे प्रतियोगिता स्थलों के बीच आसानी से आवाजाही कर सकें और खिलाड़ियों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध करा सकें।
साइ ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए), साइ और जापान स्थित भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों वाली एक समर्पित स्वागत एवं सहायता टीम को हवाई अड्डे पर तैनात किया गया है जो पहुंचने वाले खिलाड़ियों, कोच और सहयोगी स्टाफ का स्वागत कर रही है।’’
इस डेस्क की जिम्मेदारी खिलाड़ियों को आगमन संबंधी औपचारिकताओं में मदद करने के साथ-साथ जलपान उपलब्ध कराने और खेल स्थलों तथा आवास तक आगे की यात्रा के लिए मार्गदर्शन देने की है।
आइची प्रांत के टोयोटा शहर में स्थित निशानेबाजी स्थल नागोया से 75 किलोमीटर से अधिक दूर है।
ऐसी खबरें सामने आई थीं कि निशानेबाजों को स्थानीय आयोजन समिति की ओर से समय पर परिवहन सुविधा नहीं मिल रही थी जिससे उनके अभ्यास और प्रतियोगिता कार्यक्रम प्रभावित हो रहे थे।
साइ ने कहा, ‘‘भारतीय निशानेबाजों की सहायता के लिए प्रतियोगिता स्थलों तक आने-जाने के लिए परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।’’
साइ ने कहा, ‘‘सीमित उपलब्धता के कारण आयोजन समिति की ओर से जिन कोच और सहयोगी स्टाफ के लिए आवास की व्यवस्था नहीं हो सकी उनके लिए कमरे उपलब्ध कराए गए हैं।’’
उद्घाटन समारोह से पहले खेलों में व्याप्त अव्यवस्था को लेकर आयोजकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ा है। भारत सहित कई देशों के खिलाड़ियों ने आवास मिलने में लंबी देरी की शिकायत की थी।
इसके अलावा खिलाड़ियों को समय पर जलपान नहीं मिलने की भी शिकायतें सामने आई थीं। लंबी यात्रा से थके कुछ खिलाड़ियों को फर्श पर सोने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
साइ ने कहा कि 501 सदस्यीय भारतीय खिलाड़ी दल को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पहले खेल मंत्रालय ने कहा था कि आवास संकट से निपटने में प्रवासी भारतीय समुदाय की मदद भी मांगी गई है और बड़ी संख्या में लोगों ने सहायता की पेशकश की है।
भारत ने पिछले एशियाई खेलों में 106 पदक जीते थे।
भाषा सुधीर पंत
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