आईआईटी-मुंबई के छात्रों ने संस्थागत सुधार और जवाबदेही की मांग की

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आईआईटी-मुंबई के छात्रों ने संस्थागत सुधार और जवाबदेही की मांग की

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  • Publish Date - September 22, 2026 / 11:47 AM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 11:47 AM IST

मुंबई, 22 सितंबर (भाषा) आईआईटी-मुंबई के एक छात्र द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना के मद्देनजर संस्थान के छात्रों ने “सार्थक संस्थागत सुधार” और अधिक जवाबदेही की मांग करते हुए कहा है कि उन्होंने संस्थान में व्याप्त व्यवस्थागत समस्याओं को लेकर चिंता जताने के उद्देश्य से प्रदर्शन किया, न कि शैक्षणिक कदाचार को सही ठहराने के लिए।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई के कुछ छात्रों ने एक बयान जारी कर कहा कि वे नकल या किसी भी तरह के शैक्षणिक कदाचार का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन बीटेक के दूसरे वर्ष के 22 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की मौत ने उन्हें संस्थान की व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया है।

बयान में कहा गया, “छात्रों द्वारा शुरू किया गया प्रदर्शन शैक्षणिक कदाचार को सही ठहराने के लिए नहीं था। यह कुछ समय से चली आ रही व्यवस्थागत समस्याओं को लेकर चिंता जताने और सार्थक एवं मजबूत संस्थागत सुधार की मांग करने का सामूहिक प्रयास था।”

छात्रों ने कहा कि उन्होंने पिछले कुछ दिनों में मांगों का एक व्यापक खाका तैयार किया है और उसे औपचारिक रूप से आईआईटी-मुंबई के निदेशक को सौंप दिया है। निदेशक ने निर्धारित समयसीमा के भीतर इन मांगों को लागू करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई है।

उन्होंने संस्थान के निदेशक और प्रशासन के अन्य सदस्यों के साथ आयोजित खुले संवाद कार्यक्रम का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों को अपनी चिंताओं और सवालों को सीधे रखने का अवसर मिला।

बयान में कहा गया कि निदेशक ने छात्रों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर बात की और उनके सवालों के जवाब दिए। इसमें कहा गया कि छात्रों ने छात्र समुदाय के साथ उनके संवाद और संस्थागत मुद्दों की पहचान कर उन्हें दूर करने के उनके दृष्टिकोण की सराहना की।

सूर्यनारायण डूला को प्रशासनिक मामलों के डीन पद से हटाए जाने के संबंध में छात्रों ने कहा कि उनका उद्देश्य न तो उन्हें पहले से दोषी मानना था और न ही जारी जांच के नतीजे के बारे में पहले से कोई निष्कर्ष निकालना।

उन्होंने कहा, “हम अपने संकाय समुदाय के सदस्य के रूप में प्रोफेसर डूला के साथ खड़े हैं और हमारा मानना है कि जांच को निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए।”

छात्रों ने कहा कि उनकी मांग है कि जांच के दौरान डूला को प्रशासनिक मामलों के डीन के दायित्वों से एहतियातन मुक्त किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जांच स्वतंत्र रहे और उसे प्रभावित न किया जा सके।

उन्होंने कहा, “जांच की स्थापित प्रक्रिया के आधार पर निष्कर्ष सामने आने चाहिए और उसी के अनुरूप उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।”

छात्र प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि घटना से उत्पन्न चिंताओं को छात्रों के नेतृत्व में ही उठाया जाना चाहिए और उनका समाधान संस्थान के भीतर ही किया जाना चाहिए।

भाषा तान्या सिम्मी

सिम्मी