फ्रांस की विश्व कप टीम पर टिप्पणी को लेकर स्पेन के पूर्व प्रधानमंत्री की आलोचना
फ्रांस की विश्व कप टीम पर टिप्पणी को लेकर स्पेन के पूर्व प्रधानमंत्री की आलोचना
मैड्रिड, 13 जुलाई (एपी) स्पेन के पूर्व प्रधानमंत्री मारियानो रेजॉय को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उन्होंने कहा है कि फ्रांस की फुटबॉल विश्व कप टीम में ‘कोई भी फ्रांसीसी खिलाड़ी नहीं है’ जिसे फ्रांस और स्पेन के नेताओं ने नस्लवादी बताया है।
स्पेन की ‘कंजर्वेटिव पॉपुलर पार्टी’ के सदस्य रेजॉय ने मंगलवार को यूरोप के इन पड़ोसी देशों के बीच होने वाले विश्व कप सेमीफाइनल से पहले स्पेनिश मीडिया ‘एल डिबेट’ के लिए लिखे एक लेख में यह टिप्पणी की।
रेजॉय ने 10 जुलाई को लिखा, ‘‘उन्होंने इस विश्व कप में खेले सभी मैच जीते हैं और अभी वे फीफा रैंकिंग में सबसे ऊपर हैं। उनकी टीम भी बहुत मजबूत है लेकिन एक चीज जो उनके पास नहीं है वह है कोई फ्रांसीसी खिलाड़ी।’’
सोमवार को फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बैरोट ने फ्रांसीसी प्रसारणकर्ता बीएफएम टीवी से कहा, ‘‘फ्रांस की त्वचा का कोई रंग नहीं है। इसके उलट कोई भी दावा बेवकूफी, नस्लवाद या दोनों का मिला-जुला नतीजा है।’’
इससे एक दिन पहले फ्रेंच फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष फिलिप डायलो ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘फ्रांसीसी टीम के बारे में मारियानो रेजॉय की टिप्पणियों में नस्लवाद की असहनीय बू आती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे खिलाड़ियों को स्पेन के पूर्व प्रधानमंत्री से राष्ट्रीयता के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है।’’
स्पेन की सत्ताधारी सरकार ने रेजॉय की टिप्पणियों की तुरंत निंदा की। रेजॉय 2011 से 2018 तक प्रधानमंत्री थे।
रविवार को प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने अपने पूर्ववर्ती का नाम लिए बिना इन टिप्पणियों का जिक्र करते हुए ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘कुछ लोग अब भी किसी के अपने होने का पैमाना सरनेम, जन्मस्थान या त्वचा के रंग को मानते हैं। दूसरे लोग इसे किसी देश में हमारी जड़ों और उसमें योगदान देने की हमारी इच्छा से मापते हैं। जैसे फुटबॉल खेलना। बुजुर्गों की देखभाल करना। या व्यवसाय शुरू करना। फ्रांस, सेमीफाइनल में मिलते हैं। जो सबसे अच्छा खेले वह जीते और नस्लवाद हारे।’’
फ्रांस का मुकाबला मंगलवार को डलास में स्पेन से होगा।
स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस ने भी सोमवार को कहा कि पॉपुलर पार्टी के नेता अल्बर्टो नुनेज फीजो को इन टिप्पणियों से किनारा कर लेना चाहिए।
यह पहली बार नहीं है जब इस विश्व कप के दौरान फ्रांस की टीम को नस्लवाद का सामना करना पड़ा है। इस महीने की शुरुआत में फ्रांस के कप्तान और स्टार खिलाड़ी किलियन एमबाप्पे ने पैराग्वे की एक सीनेटर की आलोचना की। यह आलोचना उन्होंने फ्रांस से राउंड ऑफ 16 में पैराग्वे की हार के बाद सीनेटर द्वारा की गई टिप्पणियों के जवाब में की थी।
पैराग्वे की लिबरल रेडिकल पार्टी की सीनेटर सेलेस्टे अमारिला ने चार जुलाई को एमबाप्पे के पेनल्टी पर दागे गोल से फ्रांस की जीत के बाद ‘एक्स’ पर कई टिप्पणियां कीं। इन टिप्पणियों में उन्होंने फ्रांसीसी खिलाड़ी की मूल पृष्ठभूमि, परवरिश, शिक्षा और रूप-रंग का मजाक उड़ाया था।
एपी सुधीर आनन्द
आनन्द

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