कहानी सिनेमा की रीढ़ होती है: रंजनी राघवन
कहानी सिनेमा की रीढ़ होती है: रंजनी राघवन
मंगलुरु (कर्नाटक), 10 जनवरी (भाषा) अभिनेत्री, लेखक और फिल्म निर्माता रंजनी राघवन ने सिनेमा में किस्सागोई की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए शनिवार को कहा कि कोई भी फिल्म अपनी कहानी से ऊपर नहीं जा सकती, भले ही फिल्म की तकनीक कितनी ही व्यापक क्यों ना हो।
यहां मंगलुरु साहित्य उत्सव में राघवन ने कहा, ‘‘सिनेमा अक्सर सतही सौंदर्य में फंस जाता है। जब तक किस्सागोई में मूल्य और ईमानदारी होती है, भावनात्मक जुड़ाव संभव होता है। विकास तभी होता है जब व्यक्ति खुद से सवाल करने का इच्छुक हो और सतत प्रयास करे।’’
उन्होंने ‘कल्पनाशीलता, किस्सागोई और कैमरा’ शीर्षक से आयोजित एक सत्र को संबोधित करते हुए एक अभिनेत्री, लेखिका और निर्देशक के तौर पर अपनी यात्रा का जिक्र किया और फिल्म निर्माण की रचनात्मक एवं वाणिज्यिक चुनौतियों के बारे में खुलकर बात की।
राघवन ने फिल्म निर्माण प्रक्रिया के बारे में कहा कि कल्पनाशीलता की कीमत बहुत कम होती है, लेकिन लेखन अनुशासन की मांग करता है।
उन्होंने कहाा, ‘‘एक कहानी को लिखा जाना, दोबारा लिखा जाना और दूसरों से साझा कर उसे परिष्कृत करना आवश्यक है। इस चरण में समय और मानसिक निवेश की जरूरत पड़ती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘शुरुआत में निर्देशन में मेरी बहुत कम रुचि थी। एक अभिनेत्री के तौर पर मैंने निर्देशक के नजरिए पर सवाल खड़ा नहीं किया। बाद में जब मैंने लिखना शुरू किया और लेखक के तौर पर काम करना शुरू किया, निर्देशन की चाहत खुद पैदा हुई।’’
राघवन ने कहा, ‘‘किसी भी फिल्म के लिए उसकी कहानी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। आप इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते।’’
भाषा सं राजेंद्र सिम्मी
सिम्मी

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