सिंधू ने चोट, आत्म संदेह और वापसी पर बात करते हुए कहा, पैर की चोट ठीक करने से कहीं अधिक
सिंधू ने चोट, आत्म संदेह और वापसी पर बात करते हुए कहा, पैर की चोट ठीक करने से कहीं अधिक
नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) पीवी सिंधू के लिए प्रतियोगिता से दूर बिताया गया समय सिर्फ पैर की चोट से उबरने के बारे में नहीं था। वे उन शांत, मुश्किल सवालों का सामना करने के बारे में था जो तब सामने आते हैं जब किसी खिलाड़ी को रुकने के लिए मजबूर किया जाता है।
दो बार की ओलंपिक पदक विजेता सिंधू को पैर की चोट के कारण अक्टूबर के बाद बीडब्ल्यूएफ टूर्नामेंट से हटना पड़ा था।
मंगलवार को यहां शुरू हो रहे योनेक्स सनराइज इंडिया ओपन सुपर 750 टूर्नामेंट से पहले सिंधू ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मानसिक रूप से भी मुझे ब्रेक मिला क्योंकि यह बहुत ज़रूरी था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब आप चोटिल होते हैं तो यह इस बात पर भी असर डालता है कि आप कहां हैं और क्या होने वाला है। क्या आप शत प्रतिशत ठीक होकर वापस आएंगे?’’
सिंधू ने कहा, ‘‘आपके मन में बहुत सारे सवाल होते हैं जिनके जवाब आपको खुद देने होते हैं जैसे कि आप खुद ही इसके लिए ज़िम्मेदार हैं। इसने मुझे बहुत अधिक मजबूत और बेहतर होकर वापस आने में मदद की।’’
चोट तब लगी जब सिंधू गिरीं और उनका पैर मुड़ गया जिससे उनके पैर के अंगूठे में चोट लग गई।
सिंधू ने कहा, ‘‘मैं यह पक्का करना चाहती थी कि मैं पूरी तरह से चोट मुक्त हो जाऊं और प्रतियोगिता में लौटने से पहले शत प्रतिशत ठीक हो जाऊं। मुझे लगा कि यह 50 प्रतिशत पर खेलने, बिना आत्मविश्वास के कोर्ट पर उतरने और चीजों को और जोखिम में डालने से अधिक समझदारी वाला फैसला था।’’
ऑफ सत्र के दौरान सिंधू ने स्ट्रेंथ और अनुकूलन कोच वेन लोम्बार्ड के साथ फिर से काम शुरू किया जिन पर उन्होंने पहले भी ओलंपिक चक्र के दौरान भरोसा किया था।
सिंधू ने कहा, ‘‘मैंने उनके साथ पहले भी ओलंपिक से पूर्व और उसके दौरान काम किया था और हमने लगभग दो महीने पहले चोट के तुरंत बाद एक साथ ट्रेनिंग फिर से शुरू की। अब तक सब कुछ ठीक चल रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा ध्यान किसी खास क्षेत्र पर नहीं बल्कि पूरे शरीर के प्रबंधन और उबरने की प्रक्रिया पर है। जो चीजें पांच या 10 साल पहले काम करती थीं जरूरी नहीं कि वे अब भी काम करें।’’
सिंधू ने कहा कि उन्होंने रिहैबिलिटेशन के दौरान अटलांटा में भी कुछ समय बिताया।
उन्होंने कहा, ‘‘ब्रेक के दौरान मैं अमेरिका गई थी। यह उबरने की प्रक्रिया और परिवार के साथ समय बिताने का मिश्रण था। मैंने अटलांटा की एक सुविधा में अपना रिहैबिलिटेशन किया। मैं खुशकिस्मत थी कि मुझे बेहतरीन ट्रेनर्स और फिजियो के साथ काम करने का मौका मिला।’’
सिंधू ने दिसंबर के बीच में ही पूर्ण ट्रेनिंग शुरू की। सैयद मोदी अंतरराष्ट्रीय में वापसी की शुरुआती योजना को रद्द करना पड़ा क्योंकि वह जल्दबाजी नहीं करना चाहती थीं। उन्होंने मलेशिया ओपन सुपर 1000 में वापसी की जहां वह सेमीफाइनल तक पहुंचीं।
मौजूदा साल काफी मुश्किल है। अगस्त में घरेलू सरजमीं पर विश्व चैंपियनशिप और साथ ही एशियाई खेल भी होने हैं जो जो मौके और दबाव दोनों लाएंगे।
सिंधू ने कहा, ‘‘स्वदेश में विश्व चैंपियनशिप में खेलना खास होगा। दबाव होगा लेकिन घरेलू कोर्ट पर मुकाबला करना भी एक शानदार एहसास है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस साल का कार्यक्रम काफी व्यस्त है इसलिए टूर्नामेंट को समझदारी से चुनना और शरीर का ख्याल रखना जरूरी है।’’
सिंधू ने कहा कि बीडब्ल्यूएफ खिलाड़ी आयोग के अध्यक्ष के रूप में चुने जाने से उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली है जो निजी प्रदर्शन से कहीं अधिक है।
उन्होंने कहा, ‘‘खिलाड़ी आयोग के अध्यक्ष के रूप में चुने जाने से अतिरिक्त जिम्मेदारी आती है। इसमें यह समझना शामिल है कि खिलाड़ी क्या सोच रहे हैं और क्या महसूस कर रहे हैं, चाहे वह अभ्यास की परिस्थितियां हों या मैच की परिस्थितियां या शटल ड्रिफ्ट जैसे मुद्दों के बारे में हों।’’
सिंधू ने कहा, ‘‘टूर्नामेंट का बोझ खिलाड़ियों द्वारा उठाई गई सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है। खिलाड़ियों के लिए काम का बोझ कई वर्षों से चिंता का विषय रहा है और यह निश्चित रूप से ऐसी चीज है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। उन चिंताओं को सामने रखने से पहले आपको सबकी बात सुननी होगी।’’
भाषा सुधीर मोना
मोना

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