Ali Khamenei Biography: 36 साल का शासन खत्म! क्रांति से कुर्सी तक… कैसे खामेनेई ने तीन दशक तक थामी सत्ता? जानें सुप्रीम लीडर का पूरा राजनीतिक सफर

Ali Khamenei Biography: 36 साल का शासन खत्म! क्रांति से कुर्सी तक… कैसे खामेनेई ने तीन दशक तक थामी सत्ता? जानें सुप्रीम लीडर का पूरा राजनीतिक सफर

Ali Khamenei Biography: 36 साल का शासन खत्म! क्रांति से कुर्सी तक… कैसे खामेनेई ने तीन दशक तक थामी सत्ता? जानें सुप्रीम लीडर का पूरा राजनीतिक सफर

Ali Khamenei Biography /Image Source: ANI

Modified Date: March 1, 2026 / 02:20 pm IST
Published Date: March 1, 2026 2:17 am IST
HIGHLIGHTS
  • ईरान का सबसे ताकतवर नेता इतिहास बना
  • खामेनेई की मौत से मिडिल ईस्ट में भूचाल
  • विरासत पर उठे बड़े सवाल

 Ali Khamenei Biography: तीन दशक से अधिक समय से ईरान की सत्ता और राजनीति पर मजबूत पकड़ बनाए रखने वाले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अब इतिहास बन चुके हैं। अमेरिकी और इजराइली हवाई हमलों में उनकी मौत की खबर ने न केवल पश्चिम एशिया की राजनीति में भूचाल ला दिया है, बल्कि उस नेता के विवादित शासन पर भी नयी बहस छेड़ दी है जिसने 36 वर्षों तक ईरान पर कठोर नियंत्रण बनाए रखा।

ईरान के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेताओं में शामिल खामेनेई ईरानी समाज में लगभग उतने ही प्रभावशाली थे जितने उनके पूर्ववर्ती अयातुल्ला रूहोल्ला खोमैनी थे, जिन्होंने 1979 में इस्लामी गणराज्य ईरान की स्थापना की थी। हालांकि, ईरानी क्रांति के जनक खोमैनी थे, फिर भी कई लोगों का मानना है कि आधुनिक ईरान में खामेनेई सबसे शक्तिशाली नेता साबित हुए। तीन दशक से अधिक समय तक सर्वोच्च नेता रहते हुए खामेनेई ने घरेलू राजनीति पर अभूतपूर्व नियंत्रण स्थापित किया और आंतरिक विरोध को सख्ती से कुचला। हाल के वर्षों में उन्होंने अपनी और अपने शासन की सत्ता बनाए रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच हुए जनआंदोलन को उनकी सरकार ने बेहद कठोरता से दबाया, जिसमें हजारों लोग मारे गए। हालांकि, अधिकांश ईरानी उन्हें एक मजबूत या सम्मानित नेता के रूप में याद नहीं करेंगे। उनके शासन की विरासत इस्लामी गणराज्य के लिए सभी मोर्चों पर कमजोरी और व्यापक असंतोष के रूप में देखी जाएगी।

सत्ता के शीर्ष तक खामेनेई का उदय (Ali Khamenei News)

Ali Khamenei Biography: खामेनेई का जन्म 1939 में ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मरशद में हुआ था। बचपन में उन्होंने नजफ और क़ुम के इस्लामी मदरसों में पढ़ाई की, जहां से उनकी धार्मिक और राजनीतिक सोच विकसित हुई। 13 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने क्रांतिकारी इस्लाम के विचारों को अपनाना शुरू कर दिया। इनमें धर्मगुरु नवाब सफावी की शिक्षाएं शामिल थीं, जो अक्सर ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासन के खिलाफ राजनीतिक हिंसा का आह्वान करते थे। वर्ष 1958 में उनकी मुलाकात अयातुल्ला रूहोल्ला खोमैनी से हुई और उन्होंने तुरंत उनकी विचारधारा को स्वीकार कर लिया, जिसे ‘‘खोमैनीवाद’’ कहा जाता है।

इस विचारधारा में उपनिवेशवाद विरोध, शिया इस्लाम और एक ‘‘न्यायपूर्ण’’ इस्लामी समाज के निर्माण के लिए देश की भूमिका पर जोर दिया गया था। खोमैनीवाद का मूल सिद्धांत ‘विलायत-ए-फकीह’ यानी धर्मगुरु की संरक्षकता है। इसके अनुसार सर्वोच्च नेता के पास वही अधिकार होते हैं जो पैगंबर और शिया इमामों को प्राप्त थे। इसका अर्थ यह था कि ईरान पर शिया इस्लाम के एक विद्वान का शासन होगा। यहीं से खोमैनी और बाद में खामेनेई को अपनी व्यापक शक्ति और नियंत्रण प्राप्त हुआ। खामेनेई ने खोमैनी के इशारे पर 1962 से शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के खिलाफ लगभग दो दशक तक क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया। खोमैनी को 1964 में निर्वासित कर दिया गया था। 1971 में शाह की गुप्त पुलिस ने खामेनेई को गिरफ्तार कर यातनाएं दीं। उनके संस्मरणों में यह जानकारी दी गयी है।

Ali Khamenei Biography: वर्ष 1979 में इस्लामी क्रांति के बाद शाह का शासन समाप्त हुआ और खोमैनी निर्वासन से लौटकर ईरान के सर्वोच्च नेता बने। खामेनेई क्रांतिकारी परिषद के सदस्य बनाए गए और बाद में उप रक्षा मंत्री बने। उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के संगठन में भी अहम भूमिका निभाई। शुरू में क्रांति और सर्वोच्च नेता की रक्षा के लिए बनाया गया यह सैन्य प्रतिष्ठान ईरान में सबसे शक्तिशाली राजनीतिक ताकतों में से एक बन गया। वर्ष 1981 में हत्या के एक प्रयास से बचने के बाद खामेनेई 1982 में ईरान के राष्ट्रपति चुने गए और 1985 में दोबारा निर्वाचित हुए। उनके राष्ट्रपति कार्यकाल का अधिकांश समय ईरान-इराक युद्ध के दौरान बीता।

सर्वोच्च नेता के अधीन होते हुए भी, खामेनेई के पास बाद के राष्ट्रपतियों की तुलना में कहीं अधिक शक्ति थी, क्योंकि क्रांति अभी ताजा-ताजा हुई थी और इराक युद्ध शासन के लिए एक बड़ा खतरा था। फिर भी वह खोमैनी की इच्छाओं का पूर्णतया पालन करते रहे। उन्होंने आईआरजीसी के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित करने में भी कामयाबी हासिल की, जो उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के बाद भी कायम रहा।

सर्वोच्च नेता बनने का अप्रत्याशित फैसला (Iran Supreme Leader Death)

Ali Khamenei Biography: जून 1989 में खराब सेहत के बाद खोमैनी की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी को लेकर स्पष्ट स्थिति नहीं थी। खोमैनी ने शुरू में ग्रैंड अयातुल्ला हुसैन अली मोंतज़ेरी को उत्तराधिकारी माना था, लेकिन बाद में उन्होंने सत्ता की आलोचना की और उन्हें नजरबंद कर दिया गया। खामेनेई के पास नेतृत्व करने की राजनीतिक योग्यता थी। वह खोमैनीवाद के भी प्रबल समर्थक थे। हालांकि, इस्लामी धर्मगुरुओं के समूह विशेषज्ञों की सभा द्वारा सर्वोच्च नेता के रूप में उनका चयन एक आश्चर्यजनक निर्णय के रूप में देखा गया। दरअसल, उनकी नियुक्ति ने काफी विवाद और आलोचना को जन्म दिया। कुछ धर्मगुरुओं ने कहा कि उनके पास ‘‘ग्रैंड अयातुल्ला’’ का दर्जा नहीं है, जो संविधान के अनुसार आवश्यक था। इन आलोचकों का मानना ​​था कि अल्लाह से उचित संबंध के बिना ईरानी लोग ‘‘केवल एक इंसान’’ के वचन का सम्मान नहीं करेंगे।

जुलाई 1989 में संविधान संशोधन के लिए जनमत संग्रह कराया गया, जिसमें सर्वोच्च नेता बनने की शर्तों को बदला गया और खामेनेई को अयातुल्ला का दर्जा दिया गया। इसके बाद वह सर्वोच्च नेता बन गए। खामेनेई की स्थिति कागजों पर तो मजबूत हो गई थी, लेकिन 1982 से राष्ट्रपति होने के बावजूद उन्हें धार्मिक अभिजात वर्ग और आम जनता दोनों के बीच खोमैनी जैसी लोकप्रियता प्राप्त नहीं थी। संविधान संशोधन के बाद उन्हें व्यापक अधिकार मिल गए, वे नीतियां तय कर सकते थे, संरक्षक परिषद के सदस्यों की नियुक्ति कर सकते थे और जनमत संग्रह कराने का आदेश दे सकते थे।

दशकों में सत्ता का केंद्रीकरण (Iran Political History)

Ali Khamenei Biography: खामेनेई ने अलग-अलग राष्ट्रपतियों के साथ अलग-अलग स्तर पर काम किया, लेकिन जब भी वह असहमत होते, तो विधायी फैसलों को रोक देते थे। उदाहरण के लिए, उन्होंने राष्ट्रपति हाशमी रफसंजानी (जो 1989 से 1997 तक पद पर रहे) की आर्थिक नीतियों का समर्थन किया, लेकिन मोहम्मद खातमी (1997-2005) और हसन रूहानी (2013-21) जैसे सुधारवादी नेताओं के प्रयासों का अक्सर विरोध किया। दोनों ने ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सुधार लाने और पश्चिमी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाने का प्रयास किया था। घरेलू राजनीति में खामेनेई की सबसे बड़ी दखलअंदाजी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के पहले कार्यकाल (2005-13) के बाद हुई। 2009 के विवादित राष्ट्रपति चुनाव के बाद हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों में खामेनेई ने चुनाव परिणाम का समर्थन किया और प्रदर्शनकारियों पर कड़ा दमन किया, जिसमें कई लोग मारे गए और हजारों गिरफ्तार हुए।

बाद में खामेनेई का अहमदीनेजाद से टकराव हुआ और उन्होंने उन्हें 2017 में फिर से राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने के खिलाफ चेतावनी दी। अहमदीनेजाद ने उनकी बात नहीं मानी, लेकिन बाद में उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया गया। 2024 में कट्टरपंथी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद भी खामेनेई पर्दे के पीछे राजनीतिक संतुलन साधते रहे। सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के सत्ता में आने के बाद उन्होंने अमेरिका के साथ वार्ता और आर्थिक सुधारों को रोक दिया। 2025 के अंत में आर्थिक संकट को लेकर जब फिर प्रदर्शन शुरू हुए, तो खामेनेई ने उन्हें भी कठोरता से दबाने का आदेश दिया।

विवादों से घिरी विरासत (Khamenei Controversial Legacy)

Ali Khamenei Biography: संविधान के तहत खामेनेई को विदेश नीति पर भी असाधारण नियंत्रण मिला हुआ था। अपने गुरु खोमैनी की तरह उन्होंने ‘‘पश्चिमी साम्राज्यवाद’’ के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने क्षेत्रीय रणनीति के तहत हिजबुल्ला, हमास और हूती जैसे समूहों को समर्थन देकर ईरान के प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश की। हालांकि कुछ समय के लिए उन्होंने पश्चिम के साथ सहयोग की कोशिश भी की, विशेषकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका के साथ वार्ता के दौरान। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान 2015 के परमाणु समझौते के टूटने, नए प्रतिबंधों और कुद्स फोर्स के प्रमुख कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद उनका रुख और अधिक पश्चिम विरोधी हो गया।

साल 2025 में ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद ईरान और भी कमजोर हो गया। 2025 में इजराइल के साथ 12 दिन के युद्ध में ईरान की हार के बाद खामेनेई के शासन की वैधता और कमजोर हो गई। इसके बाद देश में बढ़ते असंतोष और 2025-26 के प्रदर्शनों में कई लोगों ने खुले तौर पर उनकी मौत के नारे लगाए। वर्ष 1989 में खोमैनी की मृत्यु पर उनके अंतिम संस्कार में लाखों लोग शामिल हुए थे। शोक मनाने वालों ने उनके पार्थिव शरीर को ताबूत से बाहर निकाल लिया था और पवित्र स्मृति चिह्नों को पाने के लिए धक्का-मुक्की की नौबत आ गयी थी। लेकिन खामेनेई के लंबे शासन के बावजूद संभव है कि ईरानियों में उनके प्रति वैसा ही सम्मान देखने को न मिले।

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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

टिकेश वर्मा- जमीनी पत्रकारिता का भरोसेमंद चेहरा... टिकेश वर्मा यानी अनुभवी और समर्पित पत्रकार.. जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव हैं। राजनीति, जनसरोकार और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से सरकार से सवाल पूछता हूं। पेशेवर पत्रकारिता के अलावा फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना और किताबें पढ़ना मुझे बेहद पसंद है। सादा जीवन, उच्च विचार के मानकों पर खरा उतरते हुए अब आपकी बात प्राथिकता के साथ रखेंगे.. क्योंकि सवाल आपका है।