एशियाई खेल सामान्य प्रतियोगिता जैसे लगे, विदरसा ने बड़े मंच पर शानदार आगाज के बाद कहा

एशियाई खेल सामान्य प्रतियोगिता जैसे लगे, विदरसा ने बड़े मंच पर शानदार आगाज के बाद कहा

एशियाई खेल सामान्य प्रतियोगिता जैसे लगे, विदरसा ने बड़े मंच पर शानदार आगाज के बाद कहा
Modified Date: September 20, 2026 / 12:56 pm IST
Published Date: September 20, 2026 12:56 pm IST

(अजय मसंद)

नागोया, 20 सितंबर (भाषा) कुछ खिलाड़ियों के लिए एशियाई खेल पूरी तरह अलग दुनिया जैसे हो सकते हैं- बड़ी भीड़, बड़े नाम, अधिक उम्मीदें और महाद्वीपीय स्तर की प्रतियोगिता का दबाव लेकिन विदरसा विनोद के लिए यह महज एक और निशानेबाजी प्रतियोगिता थी।

केरलम की इस निशानेबाज ने भले ही भारत की कुछ अन्य स्टार निशानेबाजों की तुलना में देर से एशियाई खेलों में कदम रखा और 27 साल की उम्र में महाद्वीपीय खेलों में पदार्पण किया लेकिन रविवार को उन्होंने दिखाया कि बड़े मंच की चमक में भी वह सहज रह सकती हैं।

विदरसा ने इलावेनिल वलारिवन और सोनम उत्तम मस्कर के साथ मिलकर महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता। इसके साथ ही भारत ने आइची-नागोया एशियाई खेलों में निशानेबाजी अभियान की शुरुआत पदक के साथ की।

खेलों में पहली बार हिस्सा ले रही विदरसा के लिए यह प्रभावशाली आगाज था। हालांकि, क्वालीफिकेशन में 12वें स्थान पर रहने के कारण वह व्यक्तिगत फाइनल में जगह बनाने से चूक गईं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि उन्हें इस बड़ी प्रतियोगिता का कोई अतिरिक्त दबाव महसूस नहीं हुआ।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा नहीं था कि मुझ पर बहुत उम्मीदें थीं या मैं सोच रही थी कि एशियाई खेल बहुत बड़ी प्रतियोगिता है। मुझे कुछ अलग महसूस नहीं हुआ। यह सामान्य प्रतियोगिता जैसी ही लगी, बस लोग अलग थे।’’

विदरसा ने कहा, ‘‘सिर्फ नाम एशियाई खेल है, बाकी सब कुछ वैसा ही लगा।’’

शायद यही सहजता उन्हें व्यक्तिगत फाइनल में जगह नहीं बना पाने की निराशा से उबरने में मदद कर पाई। विदरसा ने माना कि क्वालीफिकेशन के दौरान कुछ समय के लिए उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं कह सकती हूं कि मैं थोड़ी निराश थी। दो सीरीज में मेरा प्रदर्शन थोड़ा खराब रहा। उन दोनों सीरीज में स्कोर काफी नीचे चला गया और मैं निराश थी।’’

लेकिन हार मानना उनके लिए विकल्प नहीं था।

विदरसा ने कहा, ‘‘मैं खुश हूं क्योंकि मैं हार मानने के लिए तैयार नहीं थी।’’

निशानेबाजी में विदरसा का सफर भी संयोग से शुरू हुआ था। केरल के सेंट मैरी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वह एनसीसी कैडेट थीं और 2018 में उन्हें पहली बार निशानेबाजी आजमाने का मौका मिला।

उन्होंने याद करते हुए कहा, ‘‘यहीं से मैंने निशानेबाजी शुरू की।’’

एक साल बाद उन्हें विश्वास होने लगा कि यह खेल उन्हें आगे ले जा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘फिर 2019 में मुझे महसूस हुआ कि निशानेबाजी के लिए मेरे अंदर प्रतिभा है। मैंने पेशेवर तौर पर निशानेबाजी शुरू की।’’

हालांकि उनका आगे बढ़ना रातोंरात नहीं हुआ। वह प्रशिक्षण के लिए 2022 में दिल्ली गईं और 2025 में कजाखस्तान में एशियाई चैंपियनशिप में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया जहां उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता।

इसके बाद उन्होंने लगातार खुद को स्थापित किया और केवल रैंकिंग अंक (आरपीओ) के लिए खेलने वाली निशानेबाज के तौर पर क्वालीफिकेशन में सर्वाधिक स्कोर भी बनाया।

अंतरराष्ट्रीय करियर के बमुश्किल एक साल बाद विदरसा ने अब अपने पदकों की सूची में एशियाई खेलों का पदक भी जोड़ लिया है।

उनकी उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि 10 मीटर एयर राइफल उनके लिए अभी अपेक्षाकृत नई स्पर्धा है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने 10 मीटर एयर राइफल का प्रशिक्षण केवल दो महीने पहले शुरू किया। इस 10 मीटर राइफल के साथ मेरी पहली प्रतियोगिता हाल में चीन में विश्व कप थी।’’

हालांकि उनकी मुख्य स्पर्धा 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन है जिसमें उन्हें कहीं अधिक अनुभव है।

उन्होंने कहा, ‘‘थ्री पोजीशन मेरी मुख्य स्पर्धा है। इसलिए मुझे प्रतियोगिता को लेकर कोई संदेह नहीं है। मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार हूं।’’

विदरसा ने एशियाई खेलों से पहले 10 मीटर की ट्रेनिंग को प्राथमिकता दी थी और 50 मीटर राइफल के साथ ज्यादा अभ्यास नहीं किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं कल से प्रशिक्षण शुरू करूंगी। कोई घबराहट नहीं है, कुछ नहीं। मेरे लिए 50 मीटर करना ज्यादा आसान है। सभी पोजीशन और बाकी चीजें व्यवस्थित हैं क्योंकि इस नई राइफल का इस्तेमाल करते हुए मुझे लगभग एक साल हो गया है।’’

विदरसा के लिए एशियाई खेलों का अनुभव बड़े लक्ष्य की की दिशा में एक और कदम है जो ओलंपिक क्वालीफिकेशन चक्र है।

विश्व चैंपियनशिप में दुनिया के शीर्ष निशानेबाजों के खिलाफ खुद को परखने का एक और मौका मिलेगा और वह नागोया से मिली सीख को आगे ले जाने की योजना बना रही हैं।

भाषा सुधीर पंत

पंत


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