विश्व कप का फाइनल ऐसे टर्फ पर खेला जाएगा जिसे लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया, बारिश बन सकती है मददगार

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विश्व कप का फाइनल ऐसे टर्फ पर खेला जाएगा जिसे लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया, बारिश बन सकती है मददगार

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  • Publish Date - July 18, 2026 / 05:36 PM IST,
    Updated On - July 18, 2026 / 05:36 PM IST

ईस्ट रदरफोर्ड (अमेरिका), 18 जुलाई (एपी) न्यू जर्सी के ईस्ट रदरफोर्ड स्थित मैदान की पिच विश्व कप के दौरान चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां खेले गए मुकाबलों से पहले और बाद में खिलाड़ियों तथा कोचों से इस सतह को लेकर कई सवाल पूछे गए और उनकी प्रतिक्रियाएं अलग-अलग रहीं।

ब्राजील के विनीसियस जूनियर को यह पिच पसंद नहीं आई, जबकि फ्रांस के कोच डिडियर डेशचैम्प्स ने इसे ‘विशेष’ बताया लेकिन सकारात्मक अर्थ में नहीं।

वहीं नॉर्वे के कोच स्टोले सोलबक्केन ने इस मैदान पर अपना पहला मैच खेलने से पहले पिच को लेकर कई सवालों का सामना किया और मैच के बाद कहा कि उन्हें यह उम्मीद से बेहतर लगी।

यह टर्फ एनएफएल खिलाड़ियों द्वारा आलोचना झेल चुके स्टेडियम के कृत्रिम टर्फ से अलग है। यहां प्राकृतिक घास में कृत्रिम रेशे (फाइबर) मिलाए गए हैं ताकि मैदान पर गड्ढे बनने और घास उखड़ने का जोखिम कम किया जा सके। इसके बावजूद टूर्नामेंट के दौरान यहां खेले गए शुरुआती सात मैच के बाद इस पिच को लेकर खिलाड़ियों और विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है।

मैदान को बेहतर स्थिति में लाने के लिए मैदानकर्मियों को लगभग दो सप्ताह का समय मिला। अब रविवार को इसी मैदान पर टूर्नामेंट का सबसे अहम मुकाबला खेला जाएगा, जब अर्जेंटीना और स्पेन की टीमें विश्व कप फाइनल में आमने-सामने होंगी।

दिलचस्प बात यह है कि फाइनल खेलने वाली दोनों टीम ने अभी तक इस टूर्नामेंट में मिडोलैंड्स स्टेडियम पर कोई मैच नहीं खेला है जिससे इस मुकाबले में अनिश्चितता का एक और पहलू जुड़ गया है।

खिलाड़ियों और कोच की राय है कि बारिश से गीली टर्फ पर खेल तेज होता है। नॉर्वे के कोच स्टोले सोलबक्केन ने न्यू जर्सी में सेनेगल के खिलाफ मुकाबले से पहले मिडोलैंड्स की पिच की तुलना एस्ट्रोटर्फ से की थी। उनका कहना था कि छोटी और सख्त घास वाली यह सतह उन टीमों के लिए अच्छी हो सकती है जो गेंद पर नियंत्रण रखते हुए खेलना पसंद करती हैं।

22 जून को खेले गए उस मुकाबले से पहले और दौरान हुई मूसलाधार बारिश ने मैदान के व्यवहार को काफी बदल दिया।

सोलबक्केन ने कहा, ‘‘बारिश की वजह से पिच काफी बेहतर हो गई थी क्योंकि गेंद पैर से चिपक नहीं रही थी। गेंद तेज और आसानी से आगे बढ़ रही थी। इससे दोनों अच्छी टीमें अपनी क्षमता के अनुसार खेल सकीं। बारिश के कारण पिच बेहतर हो गई। अगर बारिश नहीं होती तो मुझे अधिक चिंता होती क्योंकि तब सतह सूखी और छोटी घास वाली होती और खेलना मुश्किल हो सकता था। ’’

जब इंग्लैंड ने अपने अंतिम ग्रुप मैच में पनामा का सामना किया, तब मैदान सूखा हुआ था। इंग्लैंड के कोच थॉमस ट्यूशेल ने कहा, ‘‘यह बहुत तेज पिच है। घास बहुत छोटी है और सतह थोड़ी असमान भी है। यह काफी सक्रिय और उछाल वाली है। यह बहुत सख्त और तेज थी, लेकिन खेलने योग्य थी और किसी ने शिकायत नहीं की। ’’

ब्राजील ने जब 13 जून को मोरक्को के खिलाफ यहां अपना पहला मैच खेला और विनीसियस जूनियर ने गोल किया, तब उन्होंने कहा था, ‘‘यह मैदान हमारी मदद नहीं कर रहा है। ’’

तीन दिन बाद सेनेगल के खिलाफ खेलने वाले फ्रांस के मिडफील्डर एड्रियन रैबियो ने इसे सख्त और कठोर बताया। रैबियो ने कहा, ‘‘यूरोप में हम इससे बेहतर स्थिति वाली पिचों पर खेलते हैं। मेरे हिसाब से यह मैदान अच्छी स्थिति में नहीं था। मैंने देखा है कि इसकी काफी आलोचना हुई है, इसलिए ऐसा कहने वाला मैं अकेला नहीं हूं। ’’

फीफा ने टर्फ तैयार करने में पांच साल से अधिक समय लगाया, विश्व कप के दौरान भी किए बदलाव किए। फीफा के अनुसार, इस मैदान की तैयारी में टर्फ विशेषज्ञों और स्टेडियम संचालकों के साथ लगातार परीक्षण और सहयोग किया गया। कैरोलिना ग्रीन सॉड फार्म से लाई गई घास को मई की शुरुआत में मैदान पर लगाया गया था।

फीफा ने एपी को एक बयान में कहा, ‘‘पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसी सतह तैयार करना था जो प्रदर्शन, स्थिरता और खिलाड़ियों की सुरक्षा के सर्वोच्च मानकों पर खरी उतरे। ’’

विश्व कप फाइनल में पिच कैसा व्यवहार करेगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। हालांकि शनिवार को भारी बारिश की संभावना है जिससे मैदान की स्थिति बदल सकती है।

कनाडा के जंगलों की आग से उठने वाले धुएं के कारण हवा की गुणवत्ता को लेकर कुछ चिंता जरूर है, लेकिन मौसम साफ रहने की उम्मीद है। तापमान करीब 82 डिग्री फारेनहाइट (लगभग 28 डिग्री सेल्सियस) रहने का अनुमान है।

एपी नमिता आनन्द

आनन्द