तिलक के नाबाद शतक से उत्तर क्षेत्र के खिलाफ दक्षिण क्षेत्र ने बनाया दबदबा

तिलक के नाबाद शतक से उत्तर क्षेत्र के खिलाफ दक्षिण क्षेत्र ने बनाया दबदबा

तिलक के नाबाद शतक से उत्तर क्षेत्र के खिलाफ दक्षिण क्षेत्र ने बनाया दबदबा
Modified Date: August 31, 2026 / 07:02 pm IST
Published Date: August 31, 2026 7:02 pm IST

बेंगलुरु, 31 अगस्त (भाषा) कप्तान तिलक वर्मा की धैर्य और संयम से भरी नाबाद 106 रन की पारी के बूते दक्षिण क्षेत्र ने सोमवार को यहां दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में उत्तर क्षेत्र के खिलाफ पहली पारी में 90 रन की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर ली।

तिलक को इस दौरान श्रेयस गोपाल (87) का अच्छा साथ मिला और दोनों ने छठे विकेट के लिए 175 रन की साझेदारी की जिससे टीम ने दिन का खेल खत्म होने तक नौ विकेट पर 285 रन बना लिये।

उत्तर क्षेत्र की टीम पहली पारी में 195 रन पर आउट हो गयी थी।

तिलक की संयमित बल्लेबाजी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी पारी का पहला चौका 154वीं गेंद पर लगाया। वह दिन का खेल खत्म होने तक 225 गेंदों पर सात चौकों की मदद से 106 रन बनाकर नाबाद रहे।

दक्षिण क्षेत्र ने दिन की शुरुआत 40 रन पर दो विकेट से आगे से की लेकिन गुरनूर बराड़ (70 रन पर चार विकेट) ने पहले सत्र में तीन विकेट झटककर टीम का स्कोर पांच विकेट पर 80 रन कर दिया।

बराड़ ने बीते दिन के नाबाद बल्लेबाज एन जगदीशन (36) को बोल्ड करने के बाद आर स्मरण (27) और कोडिमेला हिमतेजा (शून्य) को पवेलियन की राह दिखाई।

तिलक और गोपाल ने इसके बाद मोर्चा संभाला और उत्तर क्षेत्र के गेंदबाजों को ज्यादा मौके नहीं दिये। गोपाल ने आक्रामक अंदाज अपनाते हुए नियमित अंतराल पर चौके लगाए, जबकि तिलक ने संयम के साथ बल्लेबाजी की और अपना अर्धशतक पूरा किया।

अंशुल कंबोज (53 पर दो विकेट) की गेंद पर तिलक के खिलाफ पगबाधा की करीबी अपील को मैदानी अंपायर ने खारिज कर दिया लेकिन दिन के अंतिम सत्र में अर्शदीप (59 रन पर दो विकेट) ने गोपाल को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ दिया। गोपाल ने 169 गेंदों की पारी में 11 चौके लगाये।

इसके बाद दक्षिण क्षेत्र ने जल्दी-जल्दी तीन और विकेट गंवा दिये। कंबोज ने तनय त्यागराजन को छह रन पर आउट किया। वहीं अर्शदीप ने विद्वथ कावेरप्पा का विकेट चटकाया।

एक छोर से विकेटों के पतन के बीच तिलक के हौसले नहीं डिगे। दिन का खेल खत्म होने पर वह कावुरी साईतेजा के साथ क्रीज पर थे।

भाषा आनन्द सुधीर

सुधीर


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