(पूनम मेहरा)
नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) राष्ट्रमंडल खेल 2030 और ओलंपिक 2036 के लिए भारत की बेंच स्ट्रेंथ (बैकअप खिलाड़ियों की क्षमता) को मजबूत करने के मकसद से खेल मंत्रालय की ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना’ (टॉप्स) में टेबल टेनिस खिलाड़ियों के शामिल होने की उम्र सीमा 17 साल से घटाकर 13 साल कर दी गई है।
इस फैसले के बाद 13 साल के दो खिलाड़ियों ऋशान चट्टोपाध्याय और तनिष्का कालभैरव को टॉप्स डेवलपमेंटल समूह में शामिल किया गया है।
ऋशान ने इस साल की शुरुआत में दोहा में डब्ल्यूटीटी यूथ स्टार कंटेंडर में अंडर-15 लड़कों की युगल स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता था जबकि तनिष्का ने 2023 में विश्व टेबल टेनिस यूथ कंटेंडर टूर्नामेंट की अंडर-11 प्रतियोगिता जीतकर सुर्खियां बटोरी थीं।
नीति में बदलाव के बाद शामिल किए गए अन्य आठ खिलाड़ी आकाश राजावेलु (15), आदित्य दास (15), अंकोलिका चक्रवर्ती (14), नैशा रेवास्कर (15), अनन्या मुरलीधरन (17), दिव्यांशी भौमिक (15), पृषा गोयल (17) और सिंड्रेला दास (16) हैं।
खिलाड़ियों को शामिल करने के लिए पात्रता के नियमों में आईटीटीएफ युवा रैंकिंग भी शामिल है।
अंडर-15 तथा अंडर-17 एकल में शीर्ष 32 और अंडर-15 तथा अंडर-17 युगल वर्ग में शीर्ष 16 खिलाड़ी भविष्य में शामिल होने के पात्र होंगे।
भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘इसका मकसद जूनियर विकास से लेकर ओलंपिक की तैयारी तक एक लगातार चलने वाला रास्ता बनाना है।’’
राष्ट्रमंडल खेल 2030 अहमदाबाद में आयोजित किए जाएंगे। यह शहर 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की दौड़ में भी शामिल है।
टॉप्स डेवलपमेंट समूह के खिलाड़ी मासिक भत्ता, अंतरराष्ट्रीय ट्रेनिंग और खान-पान जैसी सुविधाओं के हकदार हैं।
भारतीय खेलों में ट्रेनिंग और सहयोगी स्टाफ को शामिल करने का काम करने वाली मुख्य संस्था साइ ने टेबल टेनिस में कम उम्र के खिलाड़ियों को शामिल करने के फायदों पर शोध किया। भविष्य में अच्छी तरह सोच-विचार के बाद दूसरे खेलों में भी उम्र सीमा कम करने पर विचार किया जा सकता है।
संस्था को जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों से प्रेरणा मिली जहां 12 साल से कम उम्र के बच्चे भी इस खेल में शानदार प्रदर्शन करते हैं।
साइ की शोध टीम के नतीजों में कहा गया, ‘‘निष्कर्ष यह निकला है कि 12 से 16 साल की उम्र के बीच सीखने का दौर किसी खिलाड़ी के विकास का सबसे अहम हिस्सा होता है।’’
इसमें कहा गया, ‘‘कई ओलंपिक खेलों में जहां खिलाड़ी 20-25 साल की उम्र के बाद अपने खेल के चरम पर पहुंचते हैं इसके उलट टेबल टेनिस में कम उम्र में ही तकनीक में महारत हासिल करने, तेजी से फैसले लेने, प्रतिक्रिया की गति और किशोरावस्था में अधिक अनुभव मिलने का फायदा मिलता है।’’
जिनका अध्ययन किया गया उनमें जापान के टोमोकाजू हारिमोटो भी शामिल है जो 2016 में सिर्फ 12 साल की उम्र में आईटीटीएफ विश्व टूर अंडर-21 पुरुष एकल चैंपियनशिप जीतकर सबसे कम उम्र में यह खिताब जीतने वाले खिलाड़ी बने। एक साल बाद 13 साल की उम्र में वह सबसे कम उम्र के पुरुष जूनियर विश्व चैंपियन बने।
दो साल की उम्र में ही खेलना शुरू करने वाले हारिमोटो अब 22 साल के हैं और दुनिया में दूसरे नंबर के खिलाड़ी हैं।
असाधारण प्रतिभा को संभालने के लिए साइ की नजरें खेल के ‘हाई परफोर्मेंस निदेशक ’ पर टिकी हैं।
भारत के अब तक के सबसे बेहतरीन टेबल टेनिस खिलाड़ियों में से एक और भारतीय ओलंपिक संघ के खिलाड़ी आयोग के सदस्य अचंत शरत कमल ने कहा कि नीति में इस बदलाव से बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा, ‘‘एशियाई खिलाड़ी 19 से 20 साल की उम्र तक दुनिया में सबसे अच्छे हो जाते हैं। अगर हम कम उम्र में ही अपने युवाओं पर ध्यान दे पाएं तो हम आसानी से बदलाव की प्रक्रिया पूरी कर पाएंगे। कई बार ऐसा होता है कि जब वे 17 साल के होते हैं तो वे थोड़े भटके हुए महसूस करते हैं।’’
शरत कमल ने कहा, ‘‘अगर हम उन्हें कम उम्र में ही सही दिशा दे पाएं तो उनके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ना आसान होगा। 18 साल की उम्र में प्रतिभावान खिलाड़ियों की संख्या बहुत अधिक नहीं होती लेकिन 13 साल की उम्र में आपके पास ऐसे युवाओं का बड़ा समूह होता है जिनमें काबिलियत होती है।’’
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