Meenakshi Natarajan Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट से भी आज नहीं मिली मिनाक्षी नटराजन को राहत, पलट जाएगा पूरा खेल? नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल

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Meenakshi Natarajan Supreme Court: मीनाक्षी नटराजन मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस, क्या पलट जाएगा पूरा खेल? कल आएगा फैसला

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  • Publish Date - June 11, 2026 / 12:51 PM IST,
    Updated On - June 11, 2026 / 12:55 PM IST

Meenakshi Natarajan Supreme Court /Photo Credit: Social Media

HIGHLIGHTS
  • मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के खिलाफ कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंची
  • विवेक तंखा और अभिषेक मनु सिंघवी ने तत्काल सुनवाई की मांग की
  • सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को करेगा

Meenakshi Natarajan Supreme Court: मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट के लिए नामांकन रद्द मामले में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। रिटर्निंग अफसर द्वारा नामांकन खारिज किए जाने के बाद कांग्रेस ने आज गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पार्टी के राज्यसभा सांसद विवेक तंखा, अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर कर जल्द सुनवाई की मांग की है, लेकिन अब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट कल करेगा।

वही, नटराजन के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि आज नाम वापसी की आखिरी तारीख है, अभी राज्यसभा का रिजल्ट कल तक रोका जाए। उन्होंने कहा कि अगर जल्द सुनवाई नहीं किया गया तो 6 साल इंतजार करना पडे़गा।

न्याय में इतनी देरी क्यों ? नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल

Meenakshi Natarajan Supreme Court इस बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने मामले पर समय रहते निर्णय नहीं लिया और रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों की अनदेखी करते हुए नामांकन रद्द किया। उमंग सिंघार ने कहा कि हमने तत्काल सुनवाई की मांग की थी, लेकिन शुक्रवार का समय दिया गया। उन्होंने कहा कि न्याय में इतनी देरी क्यों हो रही है? कई बार तो कोर्ट में रात-रात भर सुनवाई चली है। उन्होंने चुनाव आयोग को बीजेपी की कठपुतली बताया है, संवैधानिक संस्थाओं से बीजेपी रबर स्टाम्प की तरह काम करवा रही है। यह भी आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है और यदि चुनाव परिणाम जल्दबाजी में घोषित किए जाते हैं तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। कांग्रेस को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में जल्द फैसला सुनाएगा।

जानें पूरा मामला

Meenakshi Natarajan Supreme Court बता दें मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया। राज्यसभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के दौरान पाया गया कि नटराजन ने नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए फॉर्म-26 में अदालत में लंबित एक शिकायत का उल्लेख नहीं किया था। इस कारण उनका हलफनामा अधूरा माना गया।

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने पर कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए आरोप लगाया कि यह अब ‘वोट चोरी’ का मामला नहीं रहा, बल्कि ‘सीट चोरी’ का मामला बन गया है। साथ ही पार्टी ने इस प्रकरण को अदालत में चुनौती दी है। कांग्रेस नेताओं और विधायकों ने बुधवार को प्रदेशभर में भूख हड़ताल की और प्रदर्शन किया था।

जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस ने दिया था धरना

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मामले में कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में राज्य की राजधानी भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर वरिष्ठ नेताओं और विधायकों ने धरना दिया।पटवारी ने कहा, इसी कारण भाजपा को आखिरकार संविधान को ताक पर रखकर हमारा नामांकन निरस्त करवाना पड़ा।

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की यही एकजुटता भविष्य में मध्यप्रदेश से भाजपा की विदाई का कारण बनेगी। पटवारी ने कहा, ‘‘मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में लोकतंत्र के साथ जो कुकृत्य किया है, उसे पूरा प्रदेश देख चुका है।’ उन्होंने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘मोहन यादव जी, अगली बार उज्जैन से चुनाव मत लड़िए, वरना जनता आपको विपक्ष में बैठाने के लिए भोपाल तक भी नहीं आने देगी।’’ पटवारी ने कहा कि भाजपा इस ‘‘कृत्य’’ के खिलाफ कांग्रेस अगले एक महीने तक सभी जिलों में भाजपा कार्यालयों का घेराव करेगी, भोपाल में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेगी और दिल्ली में सभी विधायकों के साथ राष्ट्रपति भवन तक मार्च भी निकाला जाएगा। उन्होंने कहा, यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है।

राज्यसभा की तीन सीट के लिए हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छिपाने के आरोप में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया गया। राज्यसभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के दौरान पाया गया कि नटराजन ने नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए फॉर्म-26 में अदालत में लंबित एक शिकायत का उल्लेख नहीं किया था। इस कारण उनका हलफनामा अधूरा माना गया।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का बड़ा आरोप

Meenakshi Natarajan Supreme Court पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने धनबल और अन्य माध्यमों से विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश की, लेकिन जब उसे सफलता नहीं मिली तो नामांकन निरस्त कराने का रास्ता अपनाया गया। उन्होंने कहा, ‘‘कल मध्यप्रदेश में लोकतंत्र की हत्या हुई।’’ अपने लंबे संसदीय अनुभव का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि उन्होंने विपक्ष में रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार भी देखी है।

उन्होंने कहा, ‘‘उस समय नियम-कानून का सम्मान था। लोगों को डर रहता था कि नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई होगी। आज स्थिति यह है कि किसी को नियम, कानून और संविधान की परवाह नहीं है। देश और लोकतंत्र दोनों संकट के दौर से गुजर रहे हैं।’’

कांग्रेस के मध्यप्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने भाजपा सरकार के दबाव में काम करते हुए एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत नटराजन का नामांकन खारिज किया है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं पर गंभीर प्रहार है।

वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा सरकार के दबाव में झूठ और संगठित षड्यंत्र के जरिए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर लोकतंत्र की हत्या की गई है। उन्होंने कहा कि यह घटना लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों रद्द किया गया?

निर्वाचन अधिकारी के अनुसार फॉर्म-26 में अदालत में लंबित एक शिकायत का उल्लेख नहीं किया गया था, जिसके कारण नामांकन निरस्त किया गया।

कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की है?

कांग्रेस ने नामांकन रद्द करने के फैसले को चुनौती देते हुए जल्द सुनवाई और राहत की मांग की है।

अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में क्या कहा?

उन्होंने कहा कि नाम वापसी की आखिरी तारीख होने के कारण तत्काल सुनवाई जरूरी है, अन्यथा उम्मीदवार को छह साल तक इंतजार करना पड़ सकता है।

इस मामले की सुनवाई कब होगी?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुक्रवार के लिए निर्धारित की है।

मामले का राज्यसभा चुनाव पर क्या असर पड़ सकता है?

यदि अदालत कोई अंतरिम राहत देती है तो चुनावी प्रक्रिया और परिणामों पर असर पड़ सकता है।