(सुमन रे)
नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज सैयद किरमानी ने बताया कि 1983 विश्व कप से पहले वह और दिलीप वेंगसरकर भारत की कप्तानी की दौड़ में शामिल थे लेकिन उस समय की चयन समिति ने इंग्लैंड में हुए टूर्नामेंट के तीसरे सत्र में देश की कमान संभालने के लिए दिग्गज कपिल देव को चुना।
उस समय टीम को चुनने वाली समिति के प्रमुख पूर्व भारतीय बल्लेबाज गुलाम अहमद थे जबकि बिशन सिंह बेदी, पंकज रॉय, चंदू बोर्डे और चंदू सरवटे उनके साथी सदस्य थे।
किरमानी ने पीटीआई से कहा, ‘‘विश्व कप से पहले 1983 के वेस्टइंडीज दौरे के दौरान एक सवाल उठा था। उस समय कपिल देव को कप्तान बनाने से पहले एक चर्चा हुई थी। मुझे और वेंगसरकर को लेकर चर्चा हुई थी।’’
पूर्व भारतीय विकेटकीपर ने कहा, ‘‘यह अंदर की बात थी जो मैंने सुनी थी। क्या वेंगसरकर को कप्तान बनाया जाए या सैयद किरमानी को? तो इस खींचतान में शायद उन्होंने कहा कि विकेटकीपर पर क्यों बोझ डाला जाए?’’
लेकिन कपिल को चुनना गलत साबित नहीं हुआ क्योंकि उनकी कप्तानी में भारत ने अपना पहला 50 ओवर का विश्व कप खिताब जीता। ‘कपिल डेविल्स’ ने 43 साल पहले 25 जून 1983 को लॉर्ड्स में वेस्टइंडीज की मजबूत टीम को 43 रन से हराकर विश्व कप (जिसे तब प्रूडेंशियल कप कहा जाता था) जीता था।
अब उस ऐतिहासिक जीत का जश्न 25 जून को मुंबई में टीम के सदस्य मनाएंगे लेकिन किरमानी ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) से आग्रह किया कि वह इन दिग्गजों को उचित सम्मान दे।
किरमानी ने कहा, ‘‘बीसीसीआई को आगे आकर 1983 विश्व कप के खिलाड़ियों को पहचान देनी चाहिए और हर साल 25 जून को जश्न मनाना चाहिए क्योंकि उन्होंने बोर्ड और उन क्रिकेटरों के लिए एक मजबूत नींव रखी थी जो अब 1983 विश्व कप के बाद मिले फायदों का आनंद ले रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसे याद किया जाना चाहिए। हर किसी को 1983 याद है और हमेशा याद रहेगा। यह किसी की जिंदगी में पहले प्यार जैसा है। पहला प्यार कभी भुलाया नहीं जा सकता।’’
किरमानी ने कहा, ‘‘इसलिए हम 25 जून का जश्न मना रहे हैं। हम सब इकट्ठा हो रहे हैं। लेकिन मुझे लगता है कि बीसीसीआई को 25 जून को उस जीत का जश्न मनाने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए जो हमने 1983 में हासिल की थी। यह एक शानदार जश्न होगा।’’
इस 76 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में 2007 में भारत के टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद बीसीसीआई द्वारा भव्य जश्न का जिक्र किया।
किरमानी ने कहा, ‘‘जब 28 साल बाद धोनी की टीम जीती तो बीसीसीआई ने जो जश्न मनाया उसमें 1983 विश्व कप के किसी भी खिलाड़ी को नहीं बुलाया गया। यह कोई शिकायत नहीं है लेकिन यह सबकी भावना है कि हमें भुला दिया गया। हमने आज के दौर के क्रिकेटरों के लिए नींव रखी थी। हमने जीत हासिल की और टेलीविजन को लोकप्रिय बनाया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम पैसा लेकर आए। अब इस 25 जून को कोई प्रायोजक नहीं है। हमारे में से हर कोई अपने-अपने तरीके से एक-दूसरे से मिलने और मुंबई में जश्न मनाने जा रहा है।’’
किरमानी ने आधुनिक क्रिकेट में विकेटकीपर के बदलते रुतबे को समझाने के लिए धोनी का उदाहरण दिया। स्टंप के पीछे सिर्फ गेंद पकड़ने वाले से लेकर एक अहम ऑलराउंड क्रिकेटर बनने तक का सफर।
उन्होंने कहा, ‘‘विकेटकीपर को ऑलराउंडर माना जाना चाहिए। मेरे समय में मुझे कभी ऑलराउंडर नहीं माना गया। उन्हें यह एहसास नहीं था कि विकेटकीपर क्रिकेट का सबसे अहम हिस्सा होता है।’’
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