महिला एशियाई कप : ग्रुप चरण से बाहर होने के बाद भारत की तैयारियों का बचाव किया एआईएफएफ ने
महिला एशियाई कप : ग्रुप चरण से बाहर होने के बाद भारत की तैयारियों का बचाव किया एआईएफएफ ने
नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) की राष्ट्रीय टीमों के निदेशक सुब्रत पॉल ने बृहस्पतिवार को एएफसी महिला एशियाई कप के लिए राष्ट्रीय टीम की तैयारियों का बचाव करते हुए उनकी ट्रेनिंग को ‘काफी व्यापक’ करार दिया।
लेकिन भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया में एएफसी महिला एशियाई कप के ग्रुप चरण से बाहर हो गई थी।
भारत ग्रुप सी के तीनों मैच हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गया। टीम ने अपना अभियान मंगलवार को सिडनी में चीनी ताइपे से 1-3 से हार से समाप्त किया।
हालांकि निराशाजनक नतीजों के बावजूद टीम ने अपने आखिरी मैच और वियतनाम के खिलाफ शुरूआती मैच में चुनौतीपूर्ण जज्बा दिखाया।
पॉल ने पीटीआई से कहा, ‘‘मेरा मानना है कि तैयारी असल में काफी व्यापक थी। भारतीय टीम ने तैयारी के लिए लगभग 48 दिन विदेश में बिताए। टीम ने तुर्की में छह और ऑस्ट्रेलिया में दो मैच खेले। उससे पहले उन्होंने दुबई में छह दिन बिताए और दो मैच खेले। इससे पहले शिलांग में 13 दिन का शिविर किया था, जहां उन्होंने दो मैच भी खेले थे। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा राष्ट्रीय टीम की सात खिलाड़ियों ने ईस्ट बंगाल का प्रतिनिधित्व किया जिसमें उन्होंने सैफ और एएफसी के मैच खेले और ‘इंडियन वुमेंस लीग’ में भी हिस्सा लिया, जहां उन्होंने छह से सात मैच खेले। ’’
भारत के पूर्व गोलकीपर पॉल ने कहा, ‘‘इस तरह खिलाड़ियों ने करीब 67 दिन के लिए तैयारी की और 13 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और करीब 17 मैच अपने क्लब की टीम के लिए खेले। ’’
टूर्नामेंट में पहली बार खेलते हुए भारत ने अगले दौर में बढ़ने की उम्मीद के साथ प्रवेश किया लेकिन टीम वियतनाम (1-2), जापान (0-11) और चीनी ताइपे से हारने के बाद ग्रुप में सबसे निचले स्थान पर समापन किया।
पॉल से जब पूछा गया कि क्या ऑस्ट्रेलिया में टूर्नामेंट से पहले क्लब टीमों के खिलाफ मैच के बजाय राष्ट्रीय टीमों के खिलाफ ज्यादा मैच खेले जाते तो बेहतर होता तो इस पर उन्होंने कहा, ‘‘यह समझना होगा कि दूसरी राष्ट्रीय टीमों के खिलाफ खेलने के लिए फीफा विंडो की जरूरत होती है। और हर विंडो में एक टीम आमतौर पर सिर्फ दो मैच ही खेल सकती है। हमने उज्बेकिस्तान, ईरान और नेपाल के खिलाफ खेलने के लिए उपलब्ध विंडो का इस्तेमाल किया है। ’’
एआईएफएफ के तकनीकी निदेशक साबिर पाशा ने एशियाई कप से दो महीने से भी कम समय पहले कोस्टा रिका की अमेलिया वाल्वरडे को महिला टीम को मुख्य कोच नियुक्त करने के अपने कदम का बचाव करते हुए कहा कि टीम को सही दिशा में ले जाने के लिए उन्हें उनकी जैसी किसी काबिल कोच की जरूरत थी।
उन्होंने कहा, ‘‘आप सभी जानते हैं कि अमेलिया काफी अनुभवी है, उन्होंने 2015 और 2023 में कोस्टा रिका को विश्व कप में कोचिंग दी है। ड्रेसिंग रूम को किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो पहले उस स्तर पर काम कर चुका हो। और मेरा मानना है कि उनके अनुभव ने लड़कियों की बहुत मदद की है। ’’
एआईएफएफ के उप महासचिव एम सत्यनारायण ने कहा कि महासंघ ने पहले ही अपने नैतिक अधिकारी से खिलाड़ियों की किट को लेकर हुए विवाद की पूरी जांच करने के लिए कहा है जो ऑस्ट्रेलिया में भारतीय टीम के शुरुआती मैच से सिर्फ 48 घंटे पहले हुआ था।
उन्होंने कहा, ‘‘जैसे ही यह मामला मेरे ध्यान में आया, हमने तुरंत कार्रवाई की। छह घंटे के अंदर हमने नई किट का इंतजाम किया। हमारी प्राथमिकता इस चिंता को जल्दी से दूर करना था ताकि टीम टूर्नामेंट पर पूरा ध्यान दे सके। ’’
खिलाड़ियों को खराब फिटिंग वाली जर्सी मिलने के बाद एआईएफएफ की कड़ी आलोचना हुई जिससे टीम की सीनियर सदस्यों को महासंघ को एक पत्र लिखकर सही साइज की किट देने के लिए कहना पड़ा।
यह पूछे जाने पर कि क्या टीम बेहतर कर सकती थी तो पॉल ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद थी कि वे इस बार वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई करेंगी। खिलाड़ियों ने ओवरऑल अच्छा प्रदर्शन किया, वे चीनी ताइपे के खिलाफ जीत सकती थीं और वियतनाम से ड्रॉ खेल सकती थीं। इस टीम में निश्चित रूप से अगले दौर में पहुंचने की काबिलियत थी। ’’
भाषा नमिता मोना
मोना

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