विश्व टेबल टेनिस चैंपियनशिप: ग्रुप में दबदबा बनाने के लक्ष्य के साथ उतरेगी भारतीय टीम

विश्व टेबल टेनिस चैंपियनशिप: ग्रुप में दबदबा बनाने के लक्ष्य के साथ उतरेगी भारतीय टीम

विश्व टेबल टेनिस चैंपियनशिप: ग्रुप में दबदबा बनाने के लक्ष्य के साथ उतरेगी भारतीय टीम
Modified Date: April 27, 2026 / 05:01 pm IST
Published Date: April 27, 2026 5:01 pm IST

लंदन, 27 अप्रैल (भाषा) भारत की पुरुष और महिला टीम मंगलवार से यहां शुरू हो रही 2026 विश्व टीम टेबल टेनिस चैंपियनशिप में उम्मीद और दबाव के जाने-पहचाने मेल के साथ उतरेंगी।

मानव ठक्कर (विश्व रैंकिंग 38), जी साथियान (42), मानुष शाह (51), हरमीत देसाई (80) और पायस जैन (127) की मौजूदगी वाली भारतीय पुरुष टीम ग्रुप सात में स्लोवाकिया, ट्यूनीशिया और ग्वाटेमाला के खिलाफ प्रबल दावेदार के तौर पर शुरुआत करेगी।

कागज पर रैंकिंग भारत के पक्ष में दिखती है, विशेषकर लुबोमीर पिस्टेज (149) और यांग वांग (184) की अगुवाई वाली स्लोवाकिया की टीम के खिलाफ।

फिर भी अब संन्यास ले चुके शरत कमल के अनुभव की कमी करीबी मुकाबलों में खल सकती है।

महिला टीम ग्रुप छह में यूक्रेन, युगांडा और रवांडा के साथ है।

मनिका बत्रा (49) की अगुवाई वाली भारतीय टीम में यशस्विनी घोरपड़े (88), दीया चितले (92), सुतीर्था मुखर्जी (120) और सिंड्रेला दास (175) भी शामिल हैं। सिंड्रेला 16 साल की उम्र में इस चैंपियनशिप में खेलने वाली देश की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी हैं।

मार्गरीटा पेसोत्स्का (51) की अगुवाई वाली यूक्रेन की टीम भारत को ठोस चुनौती पेश करेगी जिससे पुरुषों के ग्रुप की तुलना में महिला वर्ग में अधिक कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

बुसान में हुए 2024 टूर्नामेंट में भारत की दोनों टीम नॉकआउट चरण तक पहुंचीं थी लेकिन राउंड ऑफ 32 में बाहर हो गईं।

लंदन में खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट का प्रारूप मुकाबले को और भी रोमांचक बना देता है। सिर्फ ग्रुप में शीर्ष पर रहने वाली टीम को ही मुख्य ड्रॉ में सीधे प्रवेश मिलेगा। दूसरे नंबर पर रहने वाली टीम को मुश्किल क्वालीफिकेशन का सामना करना पड़ेगा।

पुरुषों के लिए टीम की गहराई अब भी एक मजबूत पक्ष है। साथियान और ठक्कर टीम में निरंतरता लाते हैं जबकि शाह का लगातार बेहतर होता प्रदर्शन टीम की ताकत को और बढ़ाता है।

दूसरी ओर महिलाओं की टीम पहले से अधिक संतुलित नजर आती है। इसमें मनिका का बड़े मुकाबलों में शांत और मजबूत प्रदर्शन करने का स्वभाव, अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल कर रही युवा खिलाड़ियों के साथ मिलकर टीम को और भी मजबूत बनाता है।

अगर भारत अपनी संख्यात्मक बढ़त को शानदार प्रदर्शन में बदल पाता है और दूसरे स्थान की अनिश्चितताओं में फंसने से बचता है तो 2024 के मुकाबले इस बार और आगे बढ़ सकता है।

वर्ष 1926 में इंग्लैंड में पहली आईटीटीएफ विश्व टेबल टेनिस चैंपियनशिप होने के ठीक सौ साल बाद यह खेल उसी जगह लौट आया है जहां से इसकी शुरुआत हुई थी जिससे कि सौवीं वर्षगांठ का ऐतिहासिक जश्न मनाया जा सके।

भाषा सुधीर

सुधीर


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