जंगल में मिली 3 दिन की मासूम, चंदा कर जुटाए गए दूध के लिए पैसे, ऐसे मिला भूमिका नाम

जंगल में मिली 3 दिन की मासूम, चंदा कर जुटाए गए दूध के लिए पैसे, ऐसे मिला भूमिका नाम

जंगल में मिली 3 दिन की मासूम, चंदा कर जुटाए गए दूध के लिए पैसे, ऐसे मिला भूमिका नाम
Modified Date: November 29, 2022 / 08:25 pm IST
Published Date: December 1, 2018 6:22 am IST

गरियाबंद। ना जाने उन मां-बाप की क्या मज़बूरी रही होगी जो उन्होंने अपनी 3 दिन की मासूम बच्ची को इस कड़ाके की ठंड में आधी रात को जंगली जानवर के हवाले छोड़ दिया था लेकिन कहते हैं मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है कुछ ऐसा ही हुआ उस मासूम के साथ जिसे एक आदिवासी परिवार ने बचा लिया। बताया जा रहा है की इस परिवार ने रात को किसी कि रोने के आवाज सुनी जिसको जानने के लिए वे अंधेरे में ढूंढते हुए उस जगह पहुंच गए जहां बच्ची पड़ी थी। बच्ची को देखकर दोनों की आँखें भर आई उसकी हालत बेहद ख़राब हो गई थी। जिसे देखते हुए उन्होंने उसे तत्काल घर लाकर आग ताप कर उसे कुछ गर्माहट दी और जैसे तैसे रात गुजारी सुबह जब इस बात की जानकारी गांव वालो को मिली तो सभी मिलकर उस बच्ची के दूध का इंतजाम करने में जुट गए किसी ने 2 रूपए किसी ने 5 मिला कर कुल 330 रूपए एकत्र किये और फिर पास के गांव से उस बच्ची के लिए दूधपावडर लाया गया।

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जैसे तैसे करके बच्ची के कपडे का भी इंतजाम किया गया लेकिन जब बात आई बच्ची को पालने की तो सभी को चिंता सताने लगी कि क्यों न बच्ची के माँ बाप को ढूंढा जाये लेकिन आस -पास के गांव में ढूंढने के बाद भी जब बच्ची के पालको का कोई अता पता नहीं मिला तो ग्रामीणों ने उड़ीसा के भारंग गांव के अस्पताल में भी पता किया वहां भी बच्ची के माता-पिता के बारे में कुछ पता नहीं चला।

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उसके बाद थकहार के ग्रामीण थाने पहुंचे उसके बाद उस दूध मुंही बच्ची का सफर शुरू हुआ सरकार बच्ची बनने का ग्रामीणों ने महिला बाल विकास विभाग की एक योजना पालना घर योजना के तहत बच्ची के सही लालन पालन की मांग महिला बाल विकास के कर्मचारियों से की तो जानकारी जिला स्तर पर भिजवाई गई जिला महिला बाल विकास अधिकारी जगरानी एकका तथा नीलम देवांगन तक पहुंची उन्होंने तत्काल जिला बाल संरक्षण अधिकारी अनिल द्विवेदी को गांव जाने के निर्देश दिया जिसके बाद अधिकारी गांव पहुंचे और बच्ची तथा उसे पालने वाले आदिवासी परिवार को भी साथ लेकर गरियाबंद पहुंचे यहां उसे जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष लाया गया। और निर्णय लिया गया कि बच्ची को रायपुर बाल सरक्षण संस्था भेजा जायेगा। जिसे सुनकर पिछले 9 दिन से बच्ची के लिए दिनरात जागने वाली आदिवासी महिला गणेशन बाई काफी भावुक हो गई बच्ची देते समय उसकी आंखों से आंसू निकल आए पूछने पर बताया कि 9 रात जग कर बच्ची को सुलाया है लगाव हो गया उसने बच्ची को गोद लेने की पेशकश तक अधिकारियों से कर डाली लेकिन नियमों का हवाला देते हुए अधिकारियों ने बताया कि 3 माह तक बच्चे को संस्था में रखा जाएगा और इसके बाद भी यदि बच्ची को कोई लेने नहीं आता तो उसे गोद देने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा सकती है। यहां ये भी बता दें कि उकत बच्ची के नामकरण की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है चुकी बच्ची जमीं अर्थात भूमि में मिली है इसलिए सभी गांव वालो ने उसे भूमिका नाम दिया है।


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