नये कृषि कानूनों के खात्मे के लिये भाजपा को राजनीतिक चोट देना जरूरी : जयंत

नये कृषि कानूनों के खात्मे के लिये भाजपा को राजनीतिक चोट देना जरूरी : जयंत

नये कृषि कानूनों के खात्मे के लिये भाजपा को राजनीतिक चोट देना जरूरी : जयंत
Modified Date: November 29, 2022 / 07:49 pm IST
Published Date: March 7, 2021 2:14 pm IST

बागपत (उत्तर प्रदेश), सात मार्च (भाषा) राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने तीनों नये कृषि कानूनों को किसानों के लिए आपदा करार देते हुए रविवार को कहा कि इन कानूनों को खत्म कराने के लिये भाजपा को सियासी चोट देना जरूरी हो गया है।

जयंत ने यहां किसान महापंचायत में किसानों का ‘दमनकारी नीतियां’ बनाने वाली भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, ”किसानों को इन तीनों कानूनों को खत्म कराने के लिए जाति मजहब भूल कर एकजुट होना होगा। यह हर किसान का आंदोलन है। किसान विरोधी तीनों नये कानूनों को खत्म कराने के लिए भाजपा को राजनीतिक चोट करना जरूरी हो गया है।”

जयंत ने आरोप लगाया कि मंडियां खत्म होने से देश का नुकसान होगा। उनके अनुसार मंडी परिषद के शुल्क से ही गांवों में विकास होता है जबकि अब यह शुल्क कारपोरेट घरानों की तिजोरी में भरा जाएगा।

प्रधानमंत्री के मन की बात पर सवाल खड़ा करते हुए रालोद उपाध्यक्ष ने कहा कि पूरे देश में किसान परेशान हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री को चैन की नींद कैसे आती है। उन्होंने कहा कि सरकार किसान आंदोलन को दबाना चाहती है। जयंत के अनुसार कोशिश की गई कि किसानों पर ऐसा आरोप लगा दो कि ये आंदोलन दब जाए लेकिन किसान वे लाठी—डंडे से डरने वाले नहीं है एवं यह संघर्ष जारी रहेगा।

जयंत ने भाजपा पर हमला जारी रखते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले चार साल से गन्ने का दाम नहीं बढ़ाया गया है। सरकार चीनी मिलों से गन्ना मूल्य का भुगतान कराने में विफल है। महंगाई आसमान छू रही है। पेट्रोल—डीजल और रेल के किराए समेत तमाम चीजों के दाम तीन गुना तक बढ़ गए हैं।

भाषा सं. सलीम राजकुमार

राजकुमार


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