छत्तीसगढ़ की इस बच्ची की ज़िंदगी में फिर आई चांदनी
छत्तीसगढ़ की इस बच्ची की ज़िंदगी में फिर आई चांदनी
कहते हैं ईश्वर अगर आपको एक तरफ ठोकर देता है तो दूसरी तरफ रास्ता भी वही निकालता है राजनाँदगाँव दिग्विजय कॉलेज से पढ़ाई की गोल्ड मैडलिस्ट चाँदनी पराते के जीवन मे अचानक सात जनवरी 2017 को अंधेरा छा गया जब एक ट्रक ने उनके पैर को रौंद दिया।बहुत से सपने लेकर आगे बढ़ने वाली चांदनी टूट सी गयी उसे पूरी ज़िंदगी सिर्फ निराशा ही नज़र आ रही थी.वजह थी चांदनी का मध्यम परिवार से होना जब डॉ ने कहा की चांदनी को जयपुर पैर की मदद से खड़े किया जा सकता है लेकिन उसके लाखो रूपए लगेंगे तो चांदनी सोचने लगी की ये मेरे परिवार के लिए संभव नहीं ? चांदनी के पिता फत्तेलाल फुटकर सब्जी बेचकर पूरे परिवार का जीवन यापन करते है उनकी माली हालत बेहद ख़राब थी।
उस वक्त चांदनी के गुरु ने अपनी शिष्या के लिए मदद मांगी दिव्यांगों के लिए कार्य करने वाली संस्था सँस्कार श्रधांजलि से। जिसके अध्यक्ष सतीश भट्टड़ ने चाँदनी के उज्जवल भविष्य को देखकर जयपुर पैर के बजाय हाई टेक्नोलॉजी वाला जर्मन पावँ लगाने का सकल्प लिया। लेकिन जर्मन पावँ लगाने और ऑपरेशन के लिए खर्च बहुत अधिक आ रहा था। फिर चांदनी की मदद के लिए आगे आये लोगो ने दिल्ली के डॉ ,छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ,सांसद अभिषेक सिंह ,समाज सेवी संस्था और समस्त दिग्विजय कॉलेज में कैम्पिन शुरू कर दी चांदनी की मदद के लिए और एक दिन ऐसा समय आया की दिग्विजय कॉलेज के लोगो और समाज सेवी ममता बुद्धन की मेहनत रंग लायी। अब चांदनी के पैर का ऑपरेशन पूरा हो गया है जिसके बाद अब चाँदनी न केवल चल फिर रही है बल्कि साइकिल व स्कूटी से फिर से अपनी पीएससी की तैयारी में जुट गयी है.चांदनी और चांदनी के गुरुजन हमारे लिए एक नई सुबह का संकेत देते हैं

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