जिला प्रशिक्षण केंद्र में जमकर हो रही शराबखोरी, क्या होगा छात्रों का भविष्य

जिला प्रशिक्षण केंद्र में जमकर हो रही शराबखोरी, क्या होगा छात्रों का भविष्य

जिला प्रशिक्षण केंद्र में जमकर हो रही शराबखोरी, क्या होगा छात्रों का भविष्य
Modified Date: November 29, 2022 / 08:05 pm IST
Published Date: May 28, 2017 12:14 pm IST

 

प्रत्येक जिले के जिला एवं प्रशिक्षण केंद्र को शिक्षा का वो मंदिर माना जाता है जहां विद्यार्थी के अलावा शिक्षकों को भी बेहतर शिक्षा की तालीम दी जाती है जहां से एक आम व्यक्तित्व का बौद्धिक विकास होता है और यही से प्रशिक्षण प्राप्त कर ही वो शिक्षण कहलाता है पर ऐसे संस्थान की जब शराबखोरी के अड्डे बन जाये तो क्या विधार्थीओ का क्या शिक्षको भविष्य तय होगा इसकी आसानी से कल्पना की जा सकती है शिक्षा के मंदिर को शर्मशार करने वाली ये तस्वीरें नरसिंहपुर के जिला प्रशिक्षण केंद्र की है जहां कूड़ेदान और परिसर में एक दो नही बल्कि दर्जनों शराब की बोतलें पाई गई है जब मीडिया ने इन्हें कैमरे में कैद किया विभाग का एडमिनिस्ट्रेशन से लेकर चपरासी तक नए नए बहाने बनाते नजर आए और जब हमने विभागीय विकास परिषद के अधिकारी से बात करनी चाही तो वे अपनी जबाबदेही से पल्ला झाड़ते नजर आए। 

विभागीय विकास परिषद अधिकारी जिला प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य से जब हमने परिसर के अंदर शराबखोरी की बात कही तो पहले वे इसे सिरे से नकारते नजर आए पर जब हमने परिसर के इधर उधर बिखरी पड़ी शराब को बोतले उन्हें दिखाई तो उन्होंने पहले तो नई कहानी गाड़ते हुए उसमे मिट्टी का तेल लाये जाने की बात कही पर जब हमने बोलतो से आ रही शराब की दुर्गंध का अहसास कराया तो उन्होंने खुद स्वीकार किया है शायद यहाँ रात्रि में शराबखोरी होती है और इसका पूरा ठीकरा चैकीदार पर थोपते हुए और कार्यवाही की बात कह खुद की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।

शिक्षा के इस मंदिर में शराबखोरी की घटना इसलिए और भी संवेदनशील हो जाती है कि यही परिसर में बने छात्रावास में सैकड़ो छात्र छात्राए रहकर शिक्षा अर्जित करते है ऐसे हाल में ये कृत्य किसी अन्य अपराध को भी जन्म दे सकता है वाबजूद इसके अधिकारी अपनी जबाबदेही से बचते नजर आ रहे है और अपने अधीनस्थ छोटे से कर्मचारी पर पूरा ठीकरा फोड़ रहे है पर यहां सवाल उठना लाजमी है कि शिक्षा के मंदिर के भगवान कहे जाने वाले विभागीयकर्मी ही जब शराबखोरी में लिप्त रहेंगे तो ऐसे में प्रशिक्षार्थियों को कितना ज्ञान दे पाएंगे ये बड़ी चिंता का विषय है।


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