कॉलेज की भूमि पीएमआरडीए को देने के महाराष्ट्र सरकार के निर्णय पर उच्च न्यायालय ने उठाए सवाल

कॉलेज की भूमि पीएमआरडीए को देने के महाराष्ट्र सरकार के निर्णय पर उच्च न्यायालय ने उठाए सवाल

कॉलेज की भूमि पीएमआरडीए को देने के महाराष्ट्र सरकार के निर्णय पर उच्च न्यायालय ने उठाए सवाल
Modified Date: November 29, 2022 / 08:07 pm IST
Published Date: October 16, 2020 1:00 pm IST

मुंबई, 16 अक्टूबर (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने पुणे में सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज की लगभग 26 एकड़ भूमि पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) को सौंपने के महाराष्ट्र सरकार के निर्णय पर शुक्रवार को सवाल उठाए।

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ ने ‘जीपीपीयन्स’ (पुणे के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज के पूर्व छात्रों के संघ) द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में सरकार के 27 अगस्त 2019 के प्रस्ताव को चुनौती दी गई, जिसके तहत उसने गणेशखंड रोड पर स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज की जमीन का एक हिस्सा मेट्रो लाइन के लिये पीएमआरडीए को दिया है।

याचिकाकर्ता का दावा है कि राज्य सरकार ने पीएमआरडीए को वित्तीय अनुदान देने के बजाय मेट्रो परियोजना का वित्तपोषण करने के लिये व्यवसायिक उपयोग के लिये जमीन दी है।

याचिका के अनुसार राज्य सरकार को मेट्रो रेल परियोजना के लिये 812 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करनी थी, लेकिन उसने अनुदान जुटाने के लिये पीएमआरडीए को जमीन प्रदान करने का फैसला किया।

पीठ ने शुक्रवार को कहा कि यह ‘वस्तु-विनिमय’ व्यवस्था जैसा है।

अदालत ने कहा, ”क्या इस तरह की वस्तु विनिमय व्यवस्था जायज है? आज आप (सरकार) मेट्रो परियोजना के लिये काफी पुराने कॉलेज की जमीन दे रहे हैं…कल आप (सरकार) किसी और काम के लिये कुछ और जमीन दे देंगे। यह किस लिहाज से सही है?”

पीठ ने महाराष्ट्र सरकार और पीएमआरडीए को याचिका के जवाब में हलफनामे दायर करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई 8 दिसंबर तक स्थगित कर दी।

अदालत ने कहा कि सभी पक्षकार संबंधित जमीन के अधिग्रहण को लेकर 31 जनवरी 2021 तक यथास्थिति बनाए रखें।

भाषा जोहेब पवनेश

पवनेश


लेखक के बारे में