जनता मांगे हिसाब: IBC24 की चौपाल में गूंजा महू के मुद्दों की गूंज

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जनता मांगे हिसाब: IBC24 की चौपाल में गूंजा महू के मुद्दों की गूंज

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  • Publish Date - May 24, 2018 / 11:38 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:11 PM IST

अब बात करते हैं इंदौर की महू विधानसभा की…ये सीट सबसे हाईप्रोफाइल सीटों में से एक मानी जाती है…विधानसभा की प्रोफाइल पर एक नजर डालते हैं…

इंदौर जिले में आती है विधानसभा सीट

कुल मतदाता- 2 लाख 53 हजार

पुरुष मतदाता- 1 लाख 31 हजार 

महिला मतदाता- 1 लाख 22 हजार 244

आदिवासी बाहुल्य इलाका

डॉ भीमराव आंबेडकर की जन्मस्थली है महू 

चोरल और पाताल पानी पर्यटन स्थल

आलू, प्याज और लहसुन की बंपर पैदावार

वर्तमान में विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा

कैलाश विजयवर्गीय हैं बीजेपी विधायक

महू की सियासत

आजादी के बाद से ही महू को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था…लेकिन 2008 में कांग्रेस के इस किले को ढहाया बीजेपी के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय ने…अब फिर चुनाव नजदीक हैं तो सियासी बिसात बिछना शुरु हो गई है ।

एक दौर था जब महू विधानसभा कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी लेकिन 2008 के चुनाव में कैलाश विजवर्गीय ने कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाते हुए बीजेपी को जीत दिलाई… 2008 की तरह ही 2013 में भी कैलाश विजयवर्गीय ने जीत दर्ज की और कांग्रेस के अंतरसिंह दरबार को मात दी…अब एक बार फिर विधानसभा चुनाव नजदीक हैं तो टिकट के दावेदारों भी सामने आने लगे हैं..बीजेपी की बात करें तो वर्तमान विधायक कैलाश विजयवर्गीय महासचिव हैं इसलिए हो सकता है इस बार विजयवर्गीय चुनाव ना लड़ें लेकिन उनके बेटे आकाश विजयवर्गीय सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं…इसके अलावा शिव शर्मा भी टिकट की दौड़ में हैं…तो वहीं कविता पाटीदार का नाम भी दावेदारों में शामिल है….इसके अलावा अशोक सोमानी भी दावेदार माने जा रहे हैं.. बात  कांग्रेस की करें तो  पूर्व विधायक अंतरसिंह दरबार प्रबल दावेदार हैं…तो वहीं कैलाश दत्त पांडे भी दावेदारों में से एक हैं ।

महू के मुद्दे

सियासी तौर भले हाइप्रोफाइल सीट हो महू विधानसभा लेकिन विकास के मामले पिछड़ा नजर आता है. एक नहीं कई समस्याओं से जूझ रहे हैं लोग । डॉ भीमराव अंबेडकर की जन्मस्थली महू विधानसभा वैसे तो सियासी दिग्गजों का गढ़ है. बावजूद इसके क्षेत्र में विकास की रफ्तार धीमी नजर आती है..मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं क्षेत्रवासी.. सड़कों की बात करें तो आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क नहीं है..तो वहीं कोई बड़े उद्योग नहीं होने की वजह से लोग रोजगार के तलाश में पलायन करने को मजबूर हैं…भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी एक प्रमुख समस्या है…हेमा बेरछा फायरिंग रेंज में सेना के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई थी जिसका मुआवजा आज तक किसानों को नहीं मिल पाया है.. .बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जन्मस्थली के पास अनुयाईयों के ठहरने के लिए अब कोई इंतजाम नहीं हो पाए हैं.इसके अलावा क्षेत्र में अतिक्रमण भी एक समस्या है..शिक्षा की बात करें तो क्षेत्र के एकमात्र कॉलेज है वो भी जरुरी संसाधनों के लिए जूझ रहा है.

 

वेब डेस्क, IBC24