बुनियादी सुविधाओं की बाट जोह रही धौहनी की जनता

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बुनियादी सुविधाओं की बाट जोह रही धौहनी की जनता

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  • Publish Date - July 26, 2018 / 11:47 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:10 PM IST

अब बात करते हैं मध्यप्रदेश के धौहनी विधानसभा की

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र

संजय टाइगर रिजर्व है पहचान

मतदाता-2 लाख 23 हजार 789

पुरुष मतदाता 1 लाख 15 हजार 568

महिला मतदाता 1 लाख 8 हजार 210 

वर्तमान में विधानसभा पर बीजेपी का कब्जा

कुंवर सिंह  टेकाम हैं बीजेपी विधायक

सियासत-

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र धौहनी विधानसभा सीट में करीब ढाई लाख मतदाता हैं..जो उम्मीदवारों के किस्मत का फैसला करते हैं…सीट पर वर्तमान में बीजेपी के कुंवर सिंह टेकाम विधायक हैं..हालांकि आने वाले यहां बीजेपी के लिए सीट पर जीत हासिल करना इतना आसान नहीं रहने वाला…वहीं दूसरी ओर दावेदारों की लंबी कतार कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। 

सीधी जिला में शामिल धौहनी विधासनभा सीट.. अनुसूचित जनजाति के लिए लिए आरक्षित है…मध्यप्रदेश के इस सीट की सियासी समीकरण की बात करें तो फिलहाल बीजेपी के कुंवर सिंह टेकाम यहां से विधायक हैं…विधासनभा चुनाव 2018 के लिए कुंवर सिंह टेकाम एक बार फिर शिवराज सरकार के विकास कार्यों के साथ जनता के बीच जाने को तैयार हैं…हालांकि क्षेत्र की जनता उनसे काफी नाराज हैं…जिसे पार्टी आलाकमान नजरअंदाज नहीं कर सकती। अगर ऐसा होता है तो बीजेपी वर्तमान जनपद अध्यक्ष कुशमी हीरा बाई सिंह पर दांव लगा सकती है..दूसरी ओर कांग्रेस में टिकट दावेदारों की लंबी लिस्ट है…पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्यामवती सिंह इस दौड़ में सबसे आगे है..आदिवासी समाज में अच्छी पकड़ रखने वाली श्यामवती वर्तमान में प्रदेश प्रतिनिधि भी है..वहीं पूर्व सांसद तिलक राज सिंह राजू को कभी कांग्रेस अगले चुनाव में आजमा सकती है। 

मुद्दे-

धौहनी विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले आदिवासी आज भी बुनियादी जरूरतों से काफी दूर है। कहने के लिए राज्य सरकार तमाम योजनाओं को उन तक पहुंचाने की बात करती रही है। लेकिन धऱातल पर हकीकत कुछ और ही नजर आता है..वहीं जनप्रनितिधि भी केवल चुनावी समय में ही समस्याओं और मुद्दों की बात करते हैं। 

धौहनी विधानसभा क्षेत्र में विकास की रफ्तार आज भी सुस्त नजर आती है..यहां गरीबी और बेरोजगारी की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है…यहां के आदिवासी रोजगार के लिए भटकने को मजबूर हैं..दरअसल पावर प्लांट में नौकरी की लालच में यहां के स्थानीय लोगों ने अपनी जमीन से हाथ तक धो चुके हैं…लेकिन बेरोजगारी की समस्या दूर नहीं हुई..वहीं शिक्षा के क्षेत्र में भी इलाका काफी पिछड़ा है..एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय..आईटीआई जैसे संस्थानों के लिए करोड़ों के भवन तो तैयार हो गए हैं..लेकिन टीचर नहीं होने से शिक्षा का स्तर नहीं सुधरा है। 

वहीं संजय टाइगर रिजर्व विस्थापन में 41 गांवों का विस्थापन का मुद्दा भी आगामी चुनाव में गूंज सकता है.. पिछले साल इन आदिवासियों के घर गिरा दिए है..लेकिन मुआवजा के नाम पर आदिवासियों को कुछ खास नहीं मिला..इसके अलावा विस्थापित आदिवासी परिवार कहां जाए इस बात को लेकर शासन प्रशासन कोई इंतजाम नही किया है। स्वास्थ्य सुविधाओं का भी हाल बेहाल है..सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में डॉक्टर, नर्स स्टाप नहीं होने से आदिवासियों का सही इलाज नहीं होता है.. महिला सुरक्षा की भी यहां गंभीर समस्या है।  जिसके लिए प्रशासन स्तर पर यहाँ कोई पहल नहीं की गई है 

 

 

वेब डेस्क, IBC24