सीबीआई की चार्जशीट में चिकित्सा माफियाओं के पोषक शामिल क्यों नहीं – के.के मिश्रा
सीबीआई की चार्जशीट में चिकित्सा माफियाओं के पोषक शामिल क्यों नहीं - के.के मिश्रा
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर व्यापमं महाघोटाले की जांच कर रही जांच एजंेसी सीबीआई पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि उसके द्वारा आज 592 आरोपियों के खिलाफ प्रस्तुत चार्जशीट में इन चिकित्सा माफियाओं के वे पोषक शामिल क्यों नहीं हैं, जिनके संरक्षण में महाभ्रष्टाचार का यह खेल रचा गया? यही नहीं गिरफ्तार डीमेट के कोषाध्यक्ष डॉ. यू.सी. उपरीत द्वारा एसटीएफ को दिये गये उस बयान पर भी संज्ञान क्यांे नहीं लिया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘‘चिकित्सा शिक्षा मंत्री के कुर्सी संभालते ही हम उन्हें देते थे 10 करोड़ रूपये?’’ उस दौरान चिकित्सा शिक्षा मंत्री का प्रभार किसके पास था? सीबीआई इतने गंभीर आरोप पर खामोश क्यों है?
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श्री मिश्रा ने कहा कि चार्जशीट में इन नामों का शामिल होना इस बात का भी स्पष्ट प्रमाण है कि तत्कालीन जांच एजेंसी द्वारा की गई जांच भी निष्पक्ष नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह प्रश्न भी अनुत्तरित है कि जब इन चिकित्सा माफियाआंे पर एएफआरसी ने 13 करोड़ 10 लाख रूपयों का दंड आरोपित किया था, इसके बाद इन संचालकों ने उस पर स्थगन प्राप्त कर लिया, तब विधि विभाग कहां, क्यों, किन्हें बचाने के लिए और किसके निर्देश पर सोया रहा? इसके लिए अधिकृत सरकारी अधिवक्ताओं की भूमिका भी चिकित्सा-शिक्षा माफियाओं से मिलीभगत के रूप में दिखाई दे रही है? उन्होंने भी इस स्थगन के विरूद्व न्यायालय में सरकार का पक्ष क्यों नहीं रखा?
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इसी तरह सरकारी कोटे की सीटें भारी भरकम धनराशि के लेन-देन के बाद मैनेजमेंट कोटे से भरे जाने के मामले में भी जब खुलासा हुआ, इसके बाद तत्कालीन प्रमुख सचिव, चिकित्सा-शिक्षा ने निजी मेडिकल कॉलेजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिये थे, इस निर्देश के पलट वे कौन तत्कालीन चिकित्सा-शिक्षा मंत्री थे, जिन्होंने अपनी नोटशीट दिनांक 6.5.2014 को ‘‘एफआईआर दर्ज करने के बजाय सिर्फ कठोर कार्यवाही करने की बात’’ लिखकर इनके संचालकों को क्यों, किसलिए और किस स्वार्थ के तहत उपकृत किया? इसके बाद इन मेडिकल कॉलेजों पर सिर्फ जुरमाने की साधारण कार्यवाही कर दी गई, जिसके खिलाफ भी निजी मेडिकल कॉलेज अपील कमेटी में चले गये?
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मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अरूण यादव ने उक्त आरोपों से संबंधित सारे दस्तावेज डीआईजी, सीबीआई (व्यापमं) को प्रोफेसर कॉलोनी स्थित उनके कार्यालय में सौंपकर उसकी पावती भी ली थी, किन्तु सीबीआई ने उक्त प्रामाणित गंभीर आरोपों को अपनी जांच की परिधि में लेकर संज्ञान क्यों नहीं लिया?
वेब डेस्क, IBC24

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